नकली बीज छापेमारी में भ्रष्टाचार के छींटे : बीज निगम निदेशक समेत 6 आरोपी पांच दिन की रिमांड पर
RNE Bikaner-Jaipur.
किसानों को नकली और घटिया बीजों से बचाने के लिए शुरू हुआ सरकारी अभियान अब राजस्थान के सबसे चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में बदलता नजर आ रहा है। नकली मूंगफली बीज प्रकरण में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान राज्य बीज निगम के नामित निदेशक जुगल किशोर बिश्नोई, उनके भांजे सहित छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। बीकानेर की एसीबी स्पेशल कोर्ट ने सभी आरोपियों को पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है।
एसीबी के अनुसार अब तक की कार्रवाई में 2 करोड़ 44 लाख रुपए नकद बरामद किए जा चुके हैं। आरोप है कि यह रकम नकली बीजों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावित करने, सैंपल पास कराने और सील किए गए बीजों को वापस गुजरात भेजने की एवज में ली गई रिश्वत का हिस्सा हो सकती है।
ऐसे शुरू हुई पूरी कहानी :
कहानी की शुरुआत कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा के उस अभियान से हुई, जिसमें पूरे राजस्थान में नकली खाद और बीज के खिलाफ ताबड़तोड़ छापेमारी की गई। मंत्री स्वयं कई बार आधी रात को गोदामों पर पहुंचे, खेतों में जांच की, ट्रकों को रुकवाया और बीजों के सैंपल लिए। किसानों के हित में चलाए गए इस अभियान की देशभर में चर्चा हुई।
इसी अभियान के दौरान गुजरात की गजराज ब्रांड मूंगफली बीज कंपनी के गोदाम पर कार्रवाई हुई। करीब 15 करोड़ रुपए मूल्य के बीज सीज किए गए, बिक्री पर रोक लगाई गई और सैंपल जांच के लिए भेजे गए।एसीबी जांच में सामने आया कि कार्रवाई को कमजोर करने, सैंपल पास कराने और गोदाम में रखे बीजों को वापस गुजरात भेजने की व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपए की डील हुई।
जांच एजेंसी का आरोप है कि गजराज ब्रांड के संचालक किरण कापड़िया से लगभग 1 करोड़ 20 लाख रुपए जुगल किशोर बिश्नोई ने लिए, जबकि करीब 60 लाख रुपए गणपत बिश्नोई को मिले। बाकी रकम अन्य स्तरों पर खर्च होने की आशंका जताई जा रही है।
बस में पकड़े गए 85 लाख, खुल गया राज :
7 जून को एसीबी को सूचना मिली कि जुगल किशोर बिश्नोई अपने भांजे स्वतंत्र बिश्नोई के माध्यम से बड़ी रकम श्रीगंगानगर भिजवा रहे हैं। सूचना के आधार पर लूणकरणसर क्षेत्र में एक निजी बस को रुकवाकर तलाशी ली गई। तलाशी में स्वतंत्र बिश्नोई के पास से 85 लाख रुपए नकद बरामद हुए। मौके पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद एसीबी की दूसरी टीम ने जुगल किशोर बिश्नोई के आवास पर छापा मारकर 1 करोड़ 59 लाख रुपए नकद बरामद कर लिए। इस तरह कुल बरामदगी 2 करोड़ 44 लाख रुपए तक पहुंच गई।
छह आरोपी रिमांड पर :
एसीबी ने इस मामले में जुगल किशोर बिश्नोई, स्वतंत्र बिश्नोई, किरण कापड़िया, गणपत बिश्नोई, सुनील सेठिया और सतपाल सिंह को गिरफ्तार किया है। सभी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से पांच दिन की रिमांड मंजूर हुई है। अब एसीबी यह पता लगाने में जुटी है कि रिश्वत की यह रकम किन-किन लोगों तक पहुंचनी थी और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था।
पहले भी लगे थे उगाही के आरोप :
इस पूरे मामले ने इसलिए भी सनसनी फैला दी है क्योंकि इससे पहले कृषि विभाग के कुछ कर्मचारियों पर भी कार्रवाई के नाम पर उगाही के आरोप लग चुके हैं। सीकर में एक बीज कंपनी के संचालकों ने आरोप लगाया था कि कुछ कर्मचारी खुद को कृषि मंत्री का ओएसडी बताकर छापेमारी नहीं करने की एवज में लाखों रुपए मांग रहे थे। उस मामले में विवाद इतना बढ़ा कि मारपीट और पुलिस मुकदमे तक की नौबत आ गई थी।
राजनीति में मचा भूचाल :
मामला सामने आते ही कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने आरोप लगाया कि जो लोग किसानों के नाम पर छापेमारी कर रहे थे, वही करोड़ों रुपए की सौदेबाजी में पकड़े गए। डोटासरा ने सवाल उठाया कि यदि अधिकारी इतनी बड़ी रिश्वत लेने का साहस कर रहे थे तो यह पैसा आखिर कहां तक पहुंच रहा था। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए सरकार को कठघरे में खड़ा किया। वहीं कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने चुनौती देते हुए कहा है कि यदि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का एक भी आरोप साबित हो जाए तो वह तत्काल इस्तीफा देने को तैयार हैं।