Rajasthan में महिला कर्मचारी बर्खास्त : पौरव कालेर ने ब्लू टूथ से करवाई थी नकल, 06 साल नौकरी के बाद सरोज बिश्नोई बर्खास्त
नकल से बनी लिपिक को RPSC ने किया बर्खास्त, 06 साल से कर रही थी नौकरी
RNE Jaipur.
सरकारी नौकरी पाने के लिए भर्ती परीक्षा में नकल करने वाली एक लिपिक को आखिरकार अपनी नौकरी गंवानी पड़ी। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कनिष्ठ सहायक/लिपिक ग्रेड-2 भर्ती परीक्षा-2018 में कथित रूप से ब्लूटूथ के जरिए नकल कर चयनित हुई लिपिक ग्रेड-1 सरोज बिश्नोई को राजकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। खास बात यह है कि वह करीब 6 वर्षों से नौकरी कर रही थी, लेकिन जांच में दोषी पाए जाने के बाद आयोग ने उसे सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया।
ब्लूटूथ से मिले जवाब, चेक देकर चुकाई कीमत :
आयोग की जांच में सामने आया कि सरोज बिश्नोई ने परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए ब्लूटूथ डिवाइस का इस्तेमाल किया था। आरोप है कि पेपर लीक गिरोह के मुख्य आरोपी पौरव कालेर और उसके सहयोगियों ने परीक्षा के दौरान ब्लूटूथ के माध्यम से उत्तर उपलब्ध कराए थे। इसके बदले में आरोपी को हस्ताक्षरित चेक भी दिए गए थे।
गोपनीय सूचना से खुला राज :
सरोज बिश्नोई का चयन वर्ष 2018 की भर्ती परीक्षा में ओबीसी वर्ग की मेरिट सूची में 17वें स्थान पर हुआ था और उसने मार्च 2020 में आयोग में ज्वाइन किया था। बाद में आयोग को मिली गोपनीय सूचना के आधार पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। आयोग की शिकायत पर एसओजी ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की, जिसमें नकल और पेपर लीक की पुष्टि हुई।
बीमारी और कानूनी दांव भी नहीं आए काम :
विभागीय जांच के दौरान आरोपित कर्मचारी ने बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और व्यक्तिगत सुनवाई से बचने जैसे कई आधारों पर कार्रवाई टालने की कोशिश की। उसने यह तर्क भी दिया कि जब तक आपराधिक मुकदमे का फैसला नहीं हो जाता, तब तक विभागीय जांच रोकी जाए। हालांकि आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया।
हाईकोर्ट ने भी दिया सख्त संदेश :
सरोज बिश्नोई ने विभागीय कार्रवाई पर रोक लगाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में याचिका दायर की थी। लेकिन अदालत ने स्पष्ट कहा कि आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं और प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने के लिए अनुशासनिक कार्रवाई जारी रह सकती है। हाईकोर्ट ने माना कि सरकारी सेवा में सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण सर्वोपरि है तथा ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई रोकने का कोई आधार नहीं बनता।
RPSC का सख्त संदेश :
आरपीएससी ने राजस्थान सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1971 के तहत कार्रवाई करते हुए माना कि कर्मचारी ने सरकारी सेवक के लिए आवश्यक सत्यनिष्ठा और नैतिक मानकों का गंभीर उल्लंघन किया है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद आयोग ने 1 जून 2026 को बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया।