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REET पेपर लीक के बाद से खाली शिक्षा बोर्ड अध्यक्ष के पद पर संघनिष्ठ हनुमानसिंह राठौड़ की नियुक्ति 

 

RNE Jaipur-Ajmer. 

राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। करीब चार साल से खाली पड़े राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष पद पर आखिरकार नियुक्ति हो गई है। राज्य सरकार ने वरिष्ठ शिक्षाविद और पूर्व प्राचार्य हनुमान सिंह राठौड़ को राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का नया अध्यक्ष मनोनीत किया है।

कौन है हनुमानसिंह : 

अजमेर जिले के पीसांगन क्षेत्र से आने वाले हनुमान सिंह राठौड़ शिक्षा जगत में एक जाना-पहचाना नाम हैं। वे सरकारी स्कूल में प्राचार्य रहे हैं और वर्ष 2019 में सेवानिवृत्ति से पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति यानी VRS ले लिया था। सिर्फ शिक्षा ही नहीं, सामाजिक और वैचारिक क्षेत्र में भी उनकी सक्रिय भूमिका रही है। वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS में विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने शिक्षा, समाज और संस्कृति से जुड़े कई विषयों पर पुस्तकें भी लिखी हैं।

क्या है चुनौती : 

राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, राजस्थान माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1957 के तहत गठित समिति की सिफारिश पर हनुमान सिंह राठौड़ की नियुक्ति की गई है। उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्ष का होगा और वे सोमवार को आधिकारिक रूप से कार्यभार संभालेंगे। नए अध्यक्ष के रूप में हनुमान सिंह राठौड़ के सामने सबसे बड़ी चुनौती होगी बोर्ड परीक्षाओं की पारदर्शिता, परीक्षा प्रणाली पर भरोसा कायम रखना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करना।

खाली क्यों था पद : 

जनवरी 2022 में REET पेपर लीक मामले के बाद तत्कालीन बोर्ड अध्यक्ष डी.पी. जारोली को पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड बिना स्थायी अध्यक्ष के ही काम कर रहा था। REET पेपर लीक ने राजस्थान की परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे और इसी वजह से यह पद लंबे समय तक खाली रहा।
 

ऐसे में पदभार संभालने से पहले ही राठौड़ ने अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। उनका कहना है कि  "बच्चों और शिक्षकों का उन्नयन तथा परीक्षाओं का सुचारू संचालन मेरी पहली प्राथमिकता होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के नए प्रावधानों का सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ अच्छे परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है।