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Indian National Youth Congress के अध्यक्ष उदय भानु AI समिट हंगामे में गिरफ्तार, कोर्ट ने 04 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा

 

RNE New Delhi. 
 

भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन के मामले में उदय भानु चिब को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट में 12:30 बजे फैसला सुनाने की बात कही। बाद में तय वक्त पर फैसला सुनाते हुए  04 दिन के पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश सुनाया। 

क्या है पूरा मामला?
 

दरअसल एआई समिट के दौरान शर्टलेस प्रदर्शन कर विरोध जताने के आरोप में पुलिस ने कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि यह प्रदर्शन एक सोची-समझी योजना के तहत किया गया था और इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की छवि प्रभावित करने की कोशिश हुई।

7 दिन की रिमांड की मांग:

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में दलील दी कि इस मामले में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग शामिल हैं और जांच के लिए कई स्थानों पर ले जाना आवश्यक है। इसी आधार पर पुलिस ने 7 दिन की कस्टडी की मांग की। पुलिस का कहना है कि एआई समिट जैसे वैश्विक मंच पर प्रदर्शन कर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई। विदेशी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में हुए इस विरोध को गंभीर बताते हुए पुलिस ने कहा कि आरोपियों से कुछ टी-शर्ट और अन्य अहम सबूत भी बरामद किए गए हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करने में उदय भानु चिब की अहम भूमिका थी। उन्हें तिलक मार्ग थाने में पूछताछ के लिए बुलाया गया था, जहां लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की गई।
 

पुलिस ने यह भी दावा किया कि पूछताछ के दौरान उन्होंने सहयोग नहीं किया और कई सवालों से मुकर गए।

बचाव पक्ष का तर्क -“कस्टडी की मांग हास्यास्पद” : 

उदय भानु चिब के वकील ने पुलिस रिमांड की मांग का विरोध करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल ने हमेशा जांच में सहयोग किया है। जब भी पुलिस ने बुलाया, वे पेश हुए। ऐसे में गिरफ्तारी की जरूरत क्यों पड़ी? वकील ने तर्क दिया कि केवल टी-शर्ट की रिकवरी के लिए पुलिस कस्टडी मांगना “हास्यास्पद” है।

कांग्रेस का हमला : 
 

Indian Youth Congress और कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी को असंवैधानिक बताया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को दबाने की कोशिश है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार असहमति की आवाज को दबा रही है।