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राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता व दूसरी राजभाषा बनाना जरूरी, हर राजस्थानी की अस्मिता से जुड़ा है सवाल, हमारी भाषा, संस्कृति को बचाना बहुत जरूरी

 

 

 

 राजा बोहरा

भारतीय वांग्मय के गर्न्थो वेद, उपनिषद का हम अध्ययन करें तो पता चलता है कि हमारी मायड़ भाषा राजस्थानी सबसे प्राचीन भाषा है। इन प्राचीन ग्रन्थों में भी उसका उल्लेख मिलता है। राजस्थानी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जिसमें हमें स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े गीत व कविताएं मिलते हैं। आजादी के संघर्ष का ऐसा साहित्य अन्य भाषाओं में बहुत कम मिलता है। इस बात का आप सहित हम सभी राजस्थानियो को गर्व है। यह गर्व की बात भी है। 

 

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क्योंकि भाषा ही हमारी पहचान होती है और उसी से हमारी संस्कृति की रक्षा सम्भव होती है। यदि हम भाषा को मान नहीं देते तो हमारी अस्मिता ही समाप्त हो जाती है। दुनिया में ऐसे अनेक उदाहरण है जब लोगों ने अपने पुत्र के स्थान पर अपनी भाषा को पहले चुना। क्योंकि भाषा नहीं तो कुछ भी नहीं। यह बात हर प्रदेश और देश की मातृभाषा पर लागू होती है।
 

 

हम 12 करोड़ लोग हैं जो अपनी मातृभाषा राजस्थानी को बोलते हैं। इससे बहुत कम संख्या में लोग जिस भाषा को बोलते हैं, उन भाषाओं को भी संवैधानिक मान्यता मिली हुई है। उनकी मान्यता का विरोध नहीं है, मगर राजस्थानी को यह मान्यता न मिलने का मलाल जरूर है। 


प्राथमिक शिक्षा मायड़ भाषा मे जरूरी

वर्तमान केंद्रीय सरकार ने शैक्षिक सुधार के लिए गहन मंथन के बाद नई शिक्षा नीति बनाई। उसमें यह बात प्राथमिकता से उल्लेखित की गई कि बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में ही दी जानी चाहिए। इससे वह जल्दी विकास करता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी ने अनेक बार अपने वक्तव्यों में मातृभाषा मे बच्चों को शिक्षा देने की सीख दी है।

  

अब तो माननीय न्यायालय ने भी यह निर्देशित कर दिया है कि बच्चों को शिक्षा मातृभाषा में दी जाए। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कुछ वर्ष पहले एक सर्वे कराया था जिसमें यह तथ्य उभर के सामने आया कि जिन बच्चों ने मातृभाषा में शिक्षा हासिल की, वे बहुत आगे बढ़े। न्यूटन, आइंस्टीन इसके उदाहरण है।

अब तो उम्मीद पूरी करो सरकार

सुनो सरकार ! आपकी अब तक कि कार्य प्रणाली और निर्णयों से यह उम्मीद जागी है कि आप मायड़ भाषा को उसका सम्मान दिलवा देंगे। आप हमारी राजस्थानी भाषा को केंद्र सरकार से अपने प्रभाव का उपयोग कर संवैधानिक मान्यता दिलवाएं। आप अपनी तरफ से आपकी और हमारी भाषा राजस्थानी को दूसरी राजभाषा का दर्जा दें। प्राथमिक स्कूलों से उसकी पढ़ाई आरम्भ कराएं। आप भागीरथ है, यह उम्मीद पूरी करेंगे, यही आशा है।