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जनरंजन : प्रदेश से लेकर जिलों तक मे बड़े बदलाव की संभावना, भाजपा-कांग्रेस परिणामों के आधार पर करेगी बड़े फैसले, कांग्रेस स्लीपर सेल को हटाने के काम में जुट गई, भाजपा भी लेगी बदलाव के कड़े निर्णय

 

मधु आचार्य ' आशावादी '

पंचायत राज के चुनाव अब अंतिम चरण में पहुंच रहे हैं। अभी तो भाजपा व कांग्रेस ने इन चुनावों में अपनी पूरी शक्ति झोंक रखी है। राज्य में पिछले 3 महीनें से चुनावी माहौल ही बना हुआ है। पहले स्थानीय निकायों के चुनाव हुए और अब पंचायत राज के चुनाव चल रहे हैं। इन चुनावों को अगली सत्ता का सेमीफाइनल माना जा रहा है। इन चुनावों के पूरा होने के बाद अगले विधानसभा चुनाव के लिए बिसात बिछनी आरम्भ हो जायेगी।

राज्य पिछले 3 महीनों से चुनावी मोड पर है। सब काम रूके हुए हैं और सत्तारूढ़ भाजपा व विपक्षी कांग्रेस, दोनों ही इस समय अपनी पूरी शक्ति चुनाव में लगाये हुए हैं। क्योंकि इन चुनावों को अगले विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार को बने 3 साल पूरे हो रहे हैं, ये चुनाव सरकार के कामकाज पर जनमत है। इस वजह से दोनों ही दल चुनावों को गम्भीरता से ले रहे हैं।
स्थानीय निकाय के चुनावों में संख्यात्मक रूप से तो भाजपा को बड़ी सफलता मिली थी, मगर गुणात्मक रूप से वो सफलता अधिक नहीं थी। सत्ता के सहारे संख्यात्मक रूप से भाजपा आगे रही, इसमें कोई शक ही नहीं। मगर वोटों की कहानी कुछ और ही बयां करती है। स्थानीय निकाय के चुनाव में भाजपा को कांग्रेस से केवल 0.94 प्रतिशत अधिक ही मत मिले। संख्या की दृष्टि से वे डेढ़ लाख से अधिक नहीं है। इस परिणाम ने भाजपा को चिंतित तो किया है।
पंचायत राज चुनाव में सदा से ही कांग्रेस आगे रहती आयी है, उस लिहाज से देखा जाए तो इस बार भी उसमें बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिल रहे। संख्यात्मक व गुणात्मक रूप से यदि भाजपा ने इन चुनावों में भी बड़ी सफलता हासिल नहीं की तो उसके सामने अगले विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा संकट खड़ा हो जायेगा।
कांग्रेस की स्थिति को भी बहुत अधिक सफल नहीं माना जा सकता। क्योंकि सरकार की एन्टीनकम्बेंसी का लाभ वो स्थानीय निकाय चुनावों में उठा ही नहीं सकी। नहीं तो कांग्रेस संख्यात्मक दृष्टि से बेहतर रहती। पंचायत राज चुनाव में भी यदि कांग्रेस संख्यात्मक व गुणात्मक रूप से ज्यादा सफल नहीं रही तो उसके लिए भी अगले विधानसभा चुनाव आसान नहीं रहेंगे।
कांग्रेस की सबसे बड़ी परेशानी है उसकी गुटबाजी। कांग्रेस राज्य में पहले से दो गुटों, अशोक गहलोत व सचिन पायलट गुट में बंटी दिख रही है। अब एक तीसरा गुट पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा का भी खड़ा हो गया है। ये तीन धड़े जिलों में भी साफ नजर आने लग गए हैं।

दोनों दलों की सूरत में बदलाव की संभावना

पंचायत राज चुनाव समाप्त होते ही परिणामों के आधार पर भाजपा व कांग्रेस, दोनों में संगठन के स्तर पर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं ताकि विधानसभा चुनाव के लिए तैयारी आरम्भ हो सके। जाहिर है, गणों ही दल स्थानीय निकाय चुनाव व पंचायत राज चुनाव के परिणामों को आधार बनाकर जिलों में अपने संगठनों की सूरत और सीरत में बड़ा बदलाव करेंगे। क्योंकि अनेक जिलों में आंकलन के बाद यह लगा है कि वर्तमान संगठन के रहते हुए विधानसभा चुनाव की दमदार तैयारियां सम्भव नहीं है। 
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी पिछले दिनों अपने अटपटे बयानों के कारण खूब विवाद में रहे हैं। वहीं कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद डोटासरा को भी इस पद पर काफी समय हो गया है। राहुल गांधी हालांकि उनके काम की तारीफ भी कर चुके हैं। मगर ये भी सही है कि अब राज्य में उनका भी एक गुट खड़ा हो गया है। डोटासरा को कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की बात एआईसीसी में चल रही है। यदि डोटासरा को नई जिम्मेदारी मिलती है तो जाहिर है राज्य में कमान किसी नए नेता को मिलेगी। अशोक गहलोत के एक बार फिर से पुराने मामलो के बयान भी यही संकेत कर रहे हैं।
जिला स्तर पर भी दोनों पार्टियों में संगठन को बदलने की संभावना जताई जा रही है। भाजपा में बीकानेर सहित एक दर्जन से अधिक जिलों में अध्यक्षों के कामकाज की समीक्षा हो रही है और रिपोर्ट तैयार हो रही है। यही स्थिति एक दर्जन से अधिक जिलों में कांग्रेस की भी है। प्रदेश व जिला स्तर पर दोनों पार्टियां पंचायत राज चुनाव के बाद बदलाव कर सकती है।

कांग्रेस ने स्लीपर सेल पर कार्यवाही शुरू की

कांग्रेस ने तो स्लीपर सेल व सुस्त पदाधिकारियों को हटाने की कार्यवाही भी आरम्भ कर दी है। कांग्रेस ने 1 नवम्बर को दिल्ली में वोट चोरी के खिलाफ इंडिया गठबंधन की बड़ी रैली की थी। उस रैली में नहीं जाने वाले युवक कांग्रेस के 13 अध्यक्षों को एक झटके में हटा दिया गया है। वहीं 30 से अधिक प्रदेश पदाधिकारी भी रैली में नहीं गए, उनको को भी पदमुक्त करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस तरह कांग्रेस में तो संगठन के बदलाव का काम आरम्भ भी हो गया। बचा हुआ काम पंचायत राज चुनावों के बाद किया जायेगा, ऐसे स्पष्ट संकेत दे दिए गए हैं।

भाजपा भी लेगी कड़े निर्णय

पंचायत राज चुनाव के बाद भाजपा सीधे 2 साल बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में लगेगी। इस वजह से चुनाव परिणामों व कामकाज के आधार पर वह भी जिलों में बदलाव के कड़े निर्णय लेने की तैयारी में है। अब जिलों व प्रदेश में जिनको सांगठनिक जिम्मेदारी दी जाएगी उनको अगले विधानसभा चुनाव तक नहीं बदला जायेगा। भाजपा के राज्य व अनेक जिलों में सांगठनिक बदलाव की स्क्रिप्ट तैयार है, बस उसे लागू करना है। कुल मिलाकर पंचायत राज चुनावों के बाद दोनों दलों में बड़े सांगठनिक बदलाव होंगे, जिनसे दोनों ही पार्टियों की सूरत - सीरत बदल जायेगी।