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जनरंजन : आरएनई ने इसी कॉलम में उठाया था यह सवाल, सोमवार को गहलोत विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए

मंगलवार को राजे आ गयी सदन में
नेता प्रतिपक्ष के तेवर हो गए तब एकदम तीखे
कांग्रेस विधायकों में दिखा उपस्थिति का असर
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
 

राज्य विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। पक्ष - विपक्ष में जबरदस्त टकराहट चल रही है। एक बार फिर विपक्षी कांग्रेस दल हावी है। मंत्रियों को घेर रहा है। कई मंत्रियों की कमजोर तैयारी भी सामने आ रही है। भाजपा के भी कुछ विधायक अपने तीखे सवालों से मंत्रियों व सरकार के सामने परेशानी खड़ी कर रहे है। वहीं कुछ वरिष्ठ विधायक इस बार भी मौन साधे हुए है, चुप्पी तोड़ नहीं रहे है।

मगर बीते सोमवार का दिन राज्य विधानसभा के लिए कुछ खास था। इस दिन सदन में अपने निर्धारित स्थान पर बैठे दिखे पूर्व मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत। कांग्रेस के लोगों के लिए यह चोंकाने वाली बात नहीं थी, क्योंकि वो इससे पहले विधायक दल की बैठक में भी शामिल हुए थे।  चकित तो विपक्ष था, सतर्क भी। गहलोत की उपस्थिति का असर दोनों पक्षों में साफ दिख रहा था।

इस कारण पहुंचे गहलोत:

पूर्व सीएम अशोक गहलोत के उस दिन सदन में आने की भी खास वजह थी। एक दिन पहले सत्ता पक्ष व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली, गोविंद डोटासरा में टकराहट हुई थी। सीएम की चुनोती को स्वीकारा गया ' पांच साल बनाम दो साल ' की बात को। पांच साल सरकार गहलोत की थी, इस वजह से वो आये।

दूसरी वजह, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली द्वारा बुलाई गई विधायक दल की बैठक थी। गहलोत भी विधायक है, इस वजह से वे विधिवत सूचना पर बैठक में आये। जब आये तो सदन में भी बैठे।

जुली उस समय हो गए हमलावर:

गहलोत की सदन में उपस्थिति का असर पड़ा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली वैसे तो सदा सत्ता पक्ष पर आक्रामक रहते है, मगर उस दिन अधिक हमलावर थे। उनका साथ भी कांग्रेस विधायक जोश के साथ दे रहे थे। सत्ता पक्ष के मंत्री जवाहर सिंह व अविनाश गहलोत को बोलना पड़ा कि गहलोत की उपस्थिति में आप लोग अपनी परफॉर्मेंस दिखाने में लगे हुए हो। मतलब अशोक गहलोत की उपस्थिति का असर तो था। जो स्वीकारा भी गया।


अब राजे कब दिखेंगी सदन में ?

अशोक गहलोत की सदन में उपस्थिति के बाद अब सब लोगों व विधायकों की जुबान पर एक ही सवाल है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब कब सदन में गहलोत की तरह बैठेंगी ? जिस दिन उनकी उपस्थिति होगी, उस दिन भाजपा सरकार के मंत्रियों व विधायकों में भी जोश निश्चित होगा। यह तो तय है। कई विधायकों का मौन भी टूटेगा।


गहलोत व राजे निरंतर रहें तो लाभ:

दूसरे दिन यानी मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे विधानसभा पहुंची। ये भी बड़ी बात थी।यदि विधानसभा सत्र के दौरान लगातार अशोक गहलोत व वसुंधरा राजे बैठते है तो उनके दलों को फायदे की बात तो बाद में है, राज्य की जनता को अवश्य फायदा होगा। उनके अनुभव का लाभ सरकारी योजनाओं के निर्माण में मिलेगा। विपक्ष भी सृजनात्मक ऊर्जा को अभिव्यक्त करेगा। इस बात को गहलोत व राजे पूरी करे, तब बात बने।