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जनरंजन : भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं की सक्रियता से चुनावी समर रोचक हुआ, वार्ड मतदाता, पार्टी कार्यकर्ता व उम्मीदवार को मिलता है बड़े नेताओं से आत्मबल, रूठों को नहीं मनाया तो असर पड़ेगा चुनाव पर

 

 

 

मधु आचार्य ' आशावादी '

नगर निगम के चुनाव अब पूरी तरह से यौवन पर है। हर गली में पोस्टर, बैनर, होर्डिंग लग गए हैं तो वे बच्चे जिनका वोट नहीं है, वे भी किसी न किसी पार्टी का झंडा उठाकर शाम पड़ते ही नारे लगाते मोहल्ले में निकल पड़ते हैं। महिलाओं के लिए आरक्षित वार्डों में कुछ ज्यादा ही रौनक शहर के भीतर नजर आ रही है।
महिला उम्मीदवार के साथ एक तरफ जहां महिलाओं का एक पूरा ग्रुप जन सम्पर्क के लिए निकलता है, वहीं आदमी भी आगे पीछे चलकर उनकी व्यवस्था बनाने में लगे रहते हैं। पुरुष इन वार्डों में दूसरे नम्बर पर ही रहते हैं, आगे आने की कोशिश भी नहीं करते। 
सभी वार्डों में उम्मीदवारों ने शहर के भीतर तो अपने चुनाव कार्यालय खोल लिए है और वहीं से अपनी गतिविधियों को संचालित करने में लग गए हैं। आरामदेह गद्दे, गाव तकिए और तेज ठंडी हवा फेंकने वाले कूलर इन कार्यालयों में लग गए हैं। शुरुआत चाय, कॉफी से हुई थी, अब बात शहरी अंदाज के खास राबड़िये तक पहुंच गई है। जिसकी परिणीति भोज्य पदार्थों में होनी निश्चित ही है। 
इस तरह के माहौल के कारण ही तो शहर के भीतरी हिस्से के चुनावी माहौल को देखने के लिए कॉलोनियों व बाहरी क्षेत्र के लोग आ रहे हैं। एक तरह से परकोटे के भीतर के पूरे शहर में उत्सव का माहौल है। तनाव, झगड़े की यहां स्थितियां न्यून है, यही तो फ़ितरत है छोटी काशी बीकानेर की। जो उसे खास बनाती है।

बड़े नेताओं की सक्रियता अभी थोड़ी धीमी है

शहर की सरकार के इस चुनाव को लेकर अभी दोनों पार्टियों के बड़े नेताओं की सक्रियता की रफ्तार बहुत धीमी है। नगर निगम में बीकानेर पश्चिम व बीकानेर पूर्व विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। इन दोनों सीटों पर वर्तमान में भाजपा काबिज है। बीकानेर पश्चिम में भाजपा के जेठानन्द व्यास विधायक हैं तो पूर्व  विधानसभा से भाजपा की विधायक सिद्धि कुमारी है। सांसद भी भाजपा के अर्जुनराम मेघवाल है, जो देश के कानून मंत्री हैं। वहीं कांग्रेस की तरफ से वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला सक्रिय हैं। उनका पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में ज्यादा जोर है, क्योंकि यहीं से उन्होंने 10 विधानसभा चुनाव लड़े हैं। वे अपनी पूरी शक्ति वार्डों में लगाये हुए हैं। इसके अलावा भाजपा के संगठन अध्यक्ष जितने सक्रिय नहीं है, उससे कहीं अधिक शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल व देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग सक्रिय है। कुछ वार्डों में पूर्व मंत्री व कोलायत विधायक भंवर सिंह भाटी भी सक्रिय हैं। 
मगर यह भी सही है कि दोनों पार्टियों के इन वरिष्ठ नेताओं को अभी अपनी सक्रियता और बढ़ाने की जरूरत है। इनकी रफ्तार अभी धीमी है। भाजपा विधायक जेठानन्द व्यास अभी अपने विधानसभा क्षेत्र के वार्डों में भाजपा के लिए पूरी तरह से सक्रिय हैं। वे चुनाव कार्यालयों के उद्घाटन करने के बहाने वार्ड वार्ड पहुच रहे हैं। बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी जी अभी उतनी सक्रियता में नहीं है। उम्मीदवारों व कार्यकर्ताओं का आत्मबल वरिष्ठ नेताओं की सक्रियता से बढ़ेगा।

रूठों को मनाना बेहद जरूरी

भाजपा व कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को पहली सक्रियता रूठों को मनाने में लगानी चाहिए। उनके दखल से ही रूठे लोग राजी होंगे, क्योंकि उनके स्वाभिमान की रक्षा होगी। ये रूठे फिर से अपनी मूल पार्टी के प्रत्याशी के लिए सक्रिय होंगे तो निश्चित रूप से पार्टी को लाभ मिलेगा।