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भाषाएं मनुष्य को तोड़ती नहीं जोड़ती है : अर्जुनदेव चारण 

 

RNE jodhpur.

भारत की सभी भाषाएं आपस में जुड़ी हुई है । अनुवाद के मार्फत एक भाषा रूपांतरित होकर दूसरी में बदल जाती है । जब हम एक भाषा में बात कहते है तो वो दूसरी भाषा में स्वत ही अनुगूंजित होने लगती है। भारतीय कविता वास्तविकताओं का प्रतिबिंब है। काव्य का सत्य स्थायी है और विज्ञान का अंतरिम इसलिए एक समय के बाद विज्ञान का सत्य बदल जाता है मगर काव्य का सत्य कभी भी असत्य नहीं होता। भारतीय कविता यूरोप की तरह छायांकन नहीं बल्कि वैकल्पिक यथार्थ रचती है । यह विचार ख्यातनाम हिंदी कवि -आलोचक उदयन वाजपेयी ने शनिवार को रम्मत संस्थान द्वारा ताजहरि महल में आयोजित भारतीय कविता उत्सव के उदघाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किये । इस अवसर पर उन्होंने भारतीय कविता परम्परा की विशद विवेचना करते हुए कहा कि प्रत्येक कवि अपनी कविता के मार्फत एक ब्रह्मांड की रचना करता है मगर जब कोई भाषा खत्म होती है तो एक ब्रह्मांड खत्म हो जाता है।  

 

इस अवसर पर ख्यातनाम पंजाबी कवि-आलोचक डाॅ. मनमोहन सिंह ने अपने अध्यक्षीय उदबोधन में कहा कि भाषायी विविधता हमारी ताकत एवं पहचान है । भारतीय भाषाओं का अंतर भाषायी संबंध बहुत जरूरी है ताकि हम एक दूसरे की संवेदना और साहित्य को भलीभांति समझ सके । ख्यातनाम कवि - आलोचक प्रोफेसर अर्जुनदेव चारण ने भारतीय कविता उत्सव की परिकल्पना को उजागर करते हुए कहा कि कहा कि भाषाएं मनुष्य को तोड़ती नहीं बल्की जोड़ने का काम करती है। उन्होंने कहा कि भाषा एक पुष्प की तरह होती है जो इस लोक को अपनी खुश्बू को सराबोर करती है । उदघाटन सत्र का संयोजन डाॅ.गजेसिंह राजपुरोहित ने किया । उदघाटन सत्र के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के चित्र के सामने दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्प अर्पित किये गए । 

इस अवसर पर प्रोफेसर सत्यनारायण, प्रोफेसर सोहनदान चारण डाॅ.पद्मजा शर्मा, मराठी के प्रतिष्ठित कवि श्रीधर नांदेड़कर, मीनाक्षी पाटिल एवं नामदेव कोली, राजस्थानी के प्रतिष्ठित कवि राजेश कुमार व्यास, ओम नागर, राजेन्द्र बारहठ, प्रकाशदान चारण,संतोष चौधरी पंजाबी भाषा के प्रतिष्ठित कवि मनमोहनसिंह, तरसेम एवं गगनदीपसिंह, गुजराती के प्रतिष्ठित कवि भाज्ञेश झा,हरिश मीनाश्रु यज्ञेश दवे, संस्कृत के प्रतिष्ठित कवि हर्षदेव माधव, प्रवीण पंड्या, कौशल तिवारी,हरिसिंह राजपुरोहित,प्रोफेसर कौशलनाथ उपाध्याय प्रोफेसर के एल रेगर, बसंती पंवार, चांदकौर जोशी,डाॅ.मनीषा डागा लता खत्री, दशरथ कुमार सोलंकी, माधव राठौड, कमलेश तिवारी, मोहनसिंह रतनू, रामरतन लटियाल, किरण बाला किरन, तरनीजा मोहन राठौड, रेणुका श्रीवास्तव, डॉ.धनंजया अमरावत, रम्मत के सचिव दीपक भटनागर,महेश माथुर, दिनेश सिंदल सावित्री चौधरी, आशीष चारण,  डाॅ.कप्तान बोरावड, डॉ गौरीशंकर निमिवाळ, डॉ. जितेंद्रसिंह साठिका, डॉ इन्द्रदान चारण, डॉ.सवाईसिंह, डॉ.अमित गहलोत, उम्मेद सिंह रतनू, सत्येंद्र चारण,श्रवणराम भादू सहित अनेक प्रतिष्ठित रचनाकार एवं साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

आज होगा समापन : दो दिवसीय भारतीय कविता उत्सव का समापन समारोह ख्यातनाम गुजराती कवि भाग्येश झा के मुख्य आतिथ्य एवं ख्यातनाम संस्कृत कवि हर्षदेव माधव की अध्यक्षता में रविवार को दोपहर बाद 4 बजे होगा। इससे पूर्व दो अलग अलग सत्रों में गुजराती एवं संस्कृत कवियों का कविता पाठ होगा।