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भगवान को ज्ञापन : हे प्रभु! अब आप ही न्याय दिलाओ... अस्पताल मौतों पर लोगों ने भगवान से लगाई फरियाद

 

Rudra News Express Bhilwara. 

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत और प्रसव के बाद लगातार बिगड़ती तबीयत के मामलों ने पूरे प्रदेश में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। भीलवाड़ा में पांच महिलाओं की मौत के विरोध में लोगों ने इंसाफ के लिए भगवान के दरबार में ज्ञापन सौंपा, वहीं जोधपुर में पिछले दो दिनों में फिर पांच प्रसूताओं की हालत बिगड़ने से स्वास्थ्य व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार से दो सप्ताह में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

भीलवाड़ा में भगवान के दरबार में फरियाद : 

लगातार हो रही प्रसूताओं की मौतों के बाद लोगों का आक्रोश अब अनोखे रूप में सामने आ रहा है। प्रशासन और व्यवस्था से निराश लोग पुलिस, कलेक्टर या अदालत की बजाय सीधे भगवान के दरबार में न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ऐसी ही एक तस्वीर 450 वर्ष पुराने ऐतिहासिक श्री चारभुजा नाथ मंदिर से सामने आई है। 

भीलवाड़ा में आंदोलन का सबसे भावुक क्षण तब आया जब पदयात्रा के रूप में श्री चारभुजा नाथ बड़े मंदिर पहुंचे। यहां प्रदर्शनकारियों ने भगवान की प्रतिमा के समक्ष अपना ज्ञापन पढ़कर सुनाया और उसे श्रीचरणों में अर्पित कर न्याय की प्रार्थना की। गौरतलब है कि हाल ही भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय (एमजी हॉस्पिटल) में कथित चिकित्सकीय लापरवाही के चलते तीन प्रसूताओं सहित कुल पांच महिलाओं की मौत हो गई थी। दोषी चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ पर कार्रवाई की मांग को लेकर युवाओं ने भीमगंज थाना क्षेत्र से 'न्याय पदयात्रा' निकाली। प्रदर्शन के दौरान  "मांओं की मौत का हिसाब दो" "बहनों को न्याय दो, न्याय नहीं तो चैन नहीं" "अस्पताल प्रशासन हाय-हाय" "गायनिक विभाग हाय-हाय" आदि नारे आक्रोश के साथ लग रहे थे। 

जोधपुर में फिर 5 प्रसूताओं की हालत गंभीर : 

इधर जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में पिछले दो दिनों के भीतर पांच प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए हैं। अस्पताल अधीक्षक डॉ. मोहन मकवाना के अनुसार सभी मरीज अलग-अलग सरकारी एवं निजी अस्पतालों से रेफर होकर आई थीं।

इनमें तीन प्रसूताएं आईसीयू में भर्ती हैं, जबकि एक को कुछ समय के लिए वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि सभी मामलों में डिलीवरी के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव (ब्लड लॉस), हाई ब्लड प्रेशर या अन्य चिकित्सकीय जटिलताएं थीं और दवाइयों को लेकर फिलहाल कोई संदेह नहीं है।

एक महीने में 13 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ी : 

जोधपुर में यह पहली घटना नहीं है। पिछले एक महीने में सिजेरियन डिलीवरी के बाद 13 प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ चुकी है। इससे पहले पावटा जिला अस्पताल में भी आठ प्रसूताओं की हालत बिगड़ने का मामला सामने आया था, हालांकि बाद में सभी स्वस्थ होकर घर लौट गई थीं।

गलत ब्लड चढ़ाने की लापरवाही भी आई सामने : 

उम्मेद अस्पताल में हाल ही में धापू नामक प्रसूता को गलत ब्लड ग्रुप चढ़ाने का मामला भी सामने आया। जांच में पाया गया कि एक ही नाम की दो मरीज होने से पहचान में गड़बड़ी हुई और बिना पर्याप्त क्रॉस-चेक किए गलत रक्त चढ़ा दिया गया। इसके बाद प्रसूता की किडनी प्रभावित हुई और उसे महात्मा गांधी अस्पताल में डायलिसिस के लिए रेफर करना पड़ा।

NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान : 

लगातार सामने आ रहे मामलों को गंभीर मानते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने राजस्थान के भीलवाड़ा और बांसवाड़ा सहित विभिन्न जिलों में प्रसूताओं की मौत पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

आयोग ने कहा है कि यदि मीडिया में प्रकाशित तथ्य सही हैं तो यह सुरक्षित मातृत्व सेवाओं में गंभीर चूक और मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है। आयोग ने राज्य सरकार से जांच की प्रगति, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के उपायों की जानकारी भी मांगी है।

03 महीने में 23 प्रसूताओं की मौत : 

राजस्थान में पिछले लगभग तीन महीनों के दौरान प्रसव के बाद किडनी फेल होने अथवा गंभीर जटिलताओं के कारण 23 प्रसूताओं की मौत दर्ज की जा चुकी है। इनमें बांसवाड़ा में 6, भीलवाड़ा में  5, कोटा में 5, बीकानेर में 4, जोधपुर में 2 और अन्य जिले में 1 मौत शामिल है।  इन लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, संक्रमण नियंत्रण, रक्त प्रबंधन और अस्पतालों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार की विभिन्न जांच समितियों की रिपोर्ट का इंतजार है, जबकि पीड़ित परिवार अब शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।