निकाय चुनाव : कांग्रेस एकजुट रही तो निर्दलीय भी कुछ नहीं कर सकेंगे, भाजपा पर कांग्रेस के धमकाने के आरोप, पीसीसी खफा, कांग्रेस को बचाना पड़ेगा अपना किला, भाजपा के पास खोने को कुछ नहीं
कांग्रेस के बागी नवरतन डागा के कल मेयर पद के अपने नामांकन पत्र को वापस ले लेने के बाद अब मैदान में केवल कांग्रेस के अनिल कल्ला व भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत मैदान में रह गए हैं। मेयर के लिए अब सीधा मुकाबला है, जो यह तय कर देगा कि शहर किसकी तरफ जा रहा है। वहीं कांग्रेस ने कलेक्टर को चुनाव आयोग के नाम ज्ञापन देकर आरोप लगाया है कि सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है, उसे रोका जाये।
मधु आचार्य 'आशावादी'
तीन दिन चले नाटकीय घटनाक्रम के बाद आखिरकार कल कांग्रेस के बागी और वार्ड 50 के पार्षद नवरतन डागा ने अपना मेयर पद का पर्चा वापस उठा लिया। उनके पर्चा उठाने के समय नगर निगम में शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल, देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिसनाराम सियाग, शहर कांग्रेस कोषाध्यक्ष मनीष पुरोहित ' नटसा ', शिवलाल गोदारा के अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ बी डी कल्ला भी उपस्थित थे। आज पहली बार लगा कि कांग्रेस एकजुट है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद डोटासरा के हस्तक्षेप के बाद डागा मान गये। उनके पर्चा उठाते ही भाजपा के भीतर बैचेनी बढ़ गयी। क्यूंकि भाजपा को बड़ी उम्मीद डागा से ही थी। डागा कांग्रेस के कुछ वोट खराब करते और भाजपा निर्दलीयों के सहारे आगे निकल जाती। मगर राजनीति अगर मगर का खेल नहीं, वहां तो नम्बरों का खेल चलता है।
डागा का दाव बेकार होने के बाद पहली बार भाजपा के बाड़ेबंदी का वीडियो सामने आया। जिसमें मेयर पद के उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह शेखावत भाजपा पार्षदों का मोरल बूस्ट करते दिखाई दे रहे हैं। जो मोरल बागी कांग्रेसी के मैदान से हटने के बाद थोड़ा कम हो गया था। इस वीडियो में भी भाजपा की बाड़ेबंदी में पार्टी के बड़े नेता दिखाई नहीं दे रहे। सारा दारोमदार भाजपा उम्मीदवार सुरेंद्र सिंह शेखावत पर टिका दिखता है।
यह है निगम में दलीय स्थिति
80 सदस्यों के बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, आरएलपी का 1 और 10 निर्दलीय पार्षद है। भाजपा को तो कांग्रेस में बड़ी टूट और सभी निर्दलीयों के समर्थन पर भरोसा है, जो थोड़ा कम भरोसे का लगता है। क्योंकि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ निर्दलीय कांग्रेस की बाड़ेबंदी में भी है, जिनको कईयों ने देखा भी है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार उनके पक्ष में कुछ विपक्षी पार्षद भी वोट करेंगे। अब यह सब तो दावों की बात है, असलियत तो सोमवार को पता चलेगी।
कल्ला ने सरकार पर गम्भीर आरोप लगाए
कांग्रेस के दिग्गज नेता व निगम चुनाव की कमान संभाल रहे पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला ने राज्य सरकार पर कल कई गंभीर आरोप लगाए और चुनाव आयोग के नाम का एक ज्ञापन भी पार्टी नेताओं के साथ जिला कलेक्टर को दिया। आमतौर पर डॉ कल्ला गुस्से में कम ही रहते हैं, मगर कल अधिकारियों के व्यवहार को लेकर खासे नाराज और गुस्से में दिखाई दिए। सॉफ्ट भाषा में अधिकारियों को धमकी भी वे दे गए।
डॉ कल्ला ने पार्षद मनोज विश्नोई की होटल को लेकर बीकानेर विकास प्राधिकरण के 2 दिन में जवाब देने के नोटिस को नियम विरुद्ध व पार्षद को धमकाने वाला बताया। उनका कहना था कि चुनाव आयोग ऐसे अधिकारियों को तुरन्त हटाये।
पूर्व मंत्री कल्ला ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जैसलमेर में चल रही कांग्रेस की बाड़ेबंदी में भी सीआईडी के कुछ लोगों ने सादी वर्दी में प्रवेश करने की कोशिश की है।
अधिकारियों की मनोज विश्नोई पर हुई कार्यवाही व सीआईडी के प्रवेश पर पीसीसी चीफ गोविंद डोटासरा, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जुली ने भी नाराजगी का इजहार किया है।
कांग्रेस को केवल अपना किला बचाना है
बागी कांग्रेस पार्षद के पर्चा उठा लेने के बाद अब कांग्रेस को तो केवल अपना किला बचाने का काम करना है, क्योंकि जनता ने तो उनको बहुमत दे दिया। उसको रक्षित करके ही चुनाव जीता जा सकता है। निर्दलीय कुछ समर्थन में आते हैं, आएंगे ही, यह प्लस में है। मजबूत किलेबंदी से कांग्रेस इस संघर्ष में सफल हो जाएगी।
दूसरी तरफ भाजपा के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। उसे तो जनता ने केवल 27 सीटें दी है, जो बहुमत से बहुत कम है। भाजपा यदि 27 वोट रक्षित कर ले तो भी उसके लिए एक सफलता है। जितने निर्दलीय वो अपने पक्ष में लाएगी, वह प्लस में होगा।