Rajasthan Vidhansabha : खेजड़ी आंदोलन पर डूंगरराम गेदर ने सरकार को घेरा, जूली ने हमला बोला
RNE Jaipur-Bikaner-Suratgarh.
बीकानेर मंे चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन का मुद्दा बुधवार को एक बार फिर राजस्थान विधानसभा मंे गूंजा। सूरतगढ़ के विधायक डूंगरराम गेदर ने पर्ची के जरिये यह मुद्दा उठाते हुए खेजड़ी सहित पेड़ों को बचाने के लिए हो रहे बड़े आंदोलन के मुद्दे पर सरकार को घेरा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी इस मसले पर सरकार पर हमला बोला।
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दरअसल सूरतगढ़ के विधायक डूंगरराम गेदर ने बुधवार को शून्यकाल में पर्ची के जरिये बीकानेर में खेजड़ी बचाने के लिए चल रहे आंदोलन का मुद्दा उठाय। गेदर ने कहा, राजस्थान में पर्यावरण बचाओ, खेजड़ी बचाओ समिति बिश्नोई समाज की अगवाई में दो साल से बीकानेर में आंदोलनरत है। इसके बावजूद खेजड़ी राज्यवृक्ष की अंधाधुंध कटाई हो रही है। खेजड़ी राज्यवृक्ष है इसको बचाने के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है।
खींवसर चुनाव जीतने के लिए सरकार ने दिया आश्वासन:
एमएलए डूंगरराम ने आरोप लगाया कि 10 नवंबर 2024 को रासीसर में महापड़ाव थाण् उस वक्त खींवसर का उप चुनाव था। आपको लगा कि खींवसर चुनाव हार रहे हैं। इसलिए 09 नवंबर 2024 को कुचेरा में बिश्नोई समाज के साधु-संतों के साथ मुख्यमंत्रीजी की मीटिंग हुई। खेजड़ी बचाने के लिए सख्त कानून बनाने का आश्वासन भी दिया। चुनाव निकल गया। चुनाव जीत लिया। चुनाव जीतने के बाद मुद्दे को जुमलों की टोकरी में टाल दिया।
एक हजार जुर्माना कर पेड़ काटने की छूट दी:
गेदर ने आरोप लगाया कि आश्वासन के लगभग एक साल बाद प्रेस कान्फ्रेंस मंे बताया कि पेड़ काटने पर जो सौ रुपए जुर्माना था वह एक हजार कर दिया है। इसके अलावा वन विभाग की लकड़ी काटने पर छह महीने की सजा की बजाय 05 हजार जुर्माना कर दिया। इससे उद्योगपतियों को खेजड़ी काटने में अनुमति मिल गई।
अनशन पर बैठे संत हो रहे बीमार, 201 दिन से धरना :
डूंगरराम गेदर ने विधानसभा मंे बताया कि बीकानेर के नोखा दैया में रामगोपाल बिश्नोई के नेतृत्व में 567 दिन से धरना चल रहा है। कलेक्ट्रेट में 201 दिन से धरना चल रहा है। बीकानेर मंे 19 दिसंबर 2025 को मुकाम में महापंचायत हुई। इसमें ऐलान किया कि 02 फरवरी को महापड़ाव डाला जाएगा।
सरकार को पता था इसके बावजूद सरकार ने किसी तरह की बातचीत नहीं की। पहले दिन लाखों लोग बीकानेर मंे उमड़े। आज तीसरे दिन 29 संत अन्न-जल त्याग कर बैठे हैं, एक साध्वी बैठी है। इनके साथ ही 60 महिलाए, 429 पुरुष अन्न-जल त्याग आमरण अनशन पर बैठे हैं। तीन की तबीयत खराब हो चुकी है। कोई अधिकारी बात करने नहीं आया। सरकार का कोई मंत्री भी धरनार्थियों से बात करने नहीं आया।
सरकार की नैतिकता पर सवाल :
विधानसभा मंे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस मुद्दे पर सरकार पर हमला बोला। मुद्दे पर हस्तक्षेप करते हुए वे बोले, कम से कम सरकार को इतनी तो नैतिकता होनी चाहिए कि आंदोलनकारियों से बात करें। खेजड़ी राज्यवृक्ष्य ही नहीं देववृक्ष है। लोग पूजते हैं उसको। आप लोगों ने इस पर आंखें बंद कर रखी है। इस पर कोई नीति तो स्पष्ट करें आप लोग।