{"vars":{"id": "127470:4976"}}

Rajasthan Assembly : Right to Health पर हरिमोहन का सवाल, जूली-खींवसर  भिड़े, जमकर हंगामा!

 

RNE Jaipur. 
 

राजस्थान विधानसभा में गुरुवार को जबरदस्त हंगामा हो गया। एक सवाल के जवाब को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और चिकित्सा मंत्री गजेन्द्रसिंह खींवसर के बीच जबरदस्त खींचतान हो गई। देनों तैश में आकर जोर-जोर से बोलने लगे। दोनों पक्षा के विधायक-मंत्री भी सीटों से खड़े हो गए। जबरदस्त हंगामे के बीच कई विधायक सीट छोड़ आ गए। मामला इतना गरमा गया कि विधानसभा अध्यक्ष देवनानी को चेतावनी देनी पड़ी कि हालात यह रहे तो मैं सदन की कार्रवाई स्थगित कर दूंगा।

मामला यह है : 
 

दरअसल पूरा मसला बूंदी के विधायक हरिमोहन शर्मा के सवाल से जुड़ा था। विधायक हरिमोहन ने पूर्ववर्ती गहलोत सरकार के कार्यकाल में घोषित ‘राइट टू हैल्थ’ एक्ट को लागू करने के लिए अब तक नियम नहीं बनाए जाने की वजह पूछी थी। इस पर मंत्री खींवसर ने वर्तमान सरकार की ओर से मरीजों को फ्री इलाज देने के लिए चलाई जा रही योजनाएं गिनानी शुरू कर दी। 


 

जवाब से असन्तुष्ट : 
 

विधायक शर्मा ने अपने दो टूक सवाल का सीधा-सा जवाब देने की बात उठाई जिस पर सीधा जवाब नहीं आया। इस बीच संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल ने यह कहते हुए आपत्ति जता दी कि इससे जुड़े प्रश्न के जिस हिस्से का सवाल किया जा रहा है वह कोर्ट से जुड़ा मसला है। उसका सवाल-जवाब विधानसभा में नहीं हो सकता। इतना सुनते ही नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली हस्तक्षेप करते हुए खड़े हो गए।

मंत्री खींवसर का निशाना: 
 

पिछली सरकार में जो राइट टू हैल्थ एक्ट लाए थे। एक तो ये अन डेमोक्रेटिक था। इसमें किसी भी स्टेक होल्डर से हॉस्पिटल से चर्चा नहीं की। इलेक्शन आ रहे थे इनको। इनको दिल्ली से दबाव था कि हमें लाना है। व्वस्था ठप हो गई। मंत्री खींवसर ने कहा, इन्हांेने आईएमए, उपचार, नर्सिंग हॉस्पिटल आदि से समझौता किया। इसे एक्ट में नहीं लाए। इन्होंने कितने एक्ट गवर्नर को भेज कर बीच में मंगवा लिये। हमने रूल्स इसलिये नहीं बनाए क्योंकि हमारी मां योजना इतनी बड़ी योजना है कि हमें एक्ट लाने की जरूरत नहीं है। यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज में बुखार से लेकर रोबोटिक सर्जरी, 05 करोड़ लोगों को 25 लाख का कवरेज मिल रहा है। सरकार में आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं मंे किये गए काम मंत्री खींवसर गिनाने लगे। 


 

हरिमोहन शर्मा की आपत्ति जोगराम पटेल का हस्तक्षेप: 
 

विधायक हरिमोहन शर्मा ने आरोप लगाया कि जो स्पेसिफिक प्रश्न पूछा है उसका जवाब नहीं आया। इसके बदले में आपने क्या-क्या किया ये गिना रहे हैं। मेरा सवाल यह भी है कि राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले में सरकार ने क्या जवाब दिया। कब दिया। क्या प्रक्रिया चल रही है।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल उठ खड़े हुए। कहा, जो मसला कोर्ट में चल रहा है उस पर जवाब नहीं दिया जा सकता। इसी बात पर जूली उखड़ गये। खड़े होकर बोले, ऐसा कौनसा कोर्ट में चल रहा है। हमने तो बस यह पूछा है कि कोर्ट ने कब नोटिस दिया। इसमें क्या दिक्कत है! इस पर मंत्री खींवसर ने डाक्टर नरेन्द्र की ओर से हाईकोर्ट मंे दाखिल की गई अपील का जिक्र किया। इसके साथ ही फिर सरकार की निशुल्क ओपीडी, आईपीडी आदि सुविधाओं की लिस्ट पढ़ने लगे। मां योजना का जिक्र करने लगे। इंश्योरेंस इलाज की सुविधा बताने लगे।

 

जूली तैश मंे आए और मंत्री से नोक-झोंक, बहस और तनातनी:
 

जूली ने पूछा, स्पष्ट बताओ की राइट टू हैल्थ एक्ट लागू करना चाहते हैं या नहीं। 
मंत्री खींवसर ने कहा-जब एक्ट लाए थे तो आपने रूल्स क्यों नहीं बनाए! 


 

इसके साथ ही दोनों खड़े होकर एक-दूसरे खिलाफ जोर-जोर से बोलने लगे। पक्ष-विपक्ष के विधायक भी खड़े हो गए। विपक्ष के विधायक कुर्सियां छोड़ वैल में आ गए। जबरदस्त हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष बोले, ये तरीका ठीक नहीं। प्रश्नकाल में ऐसे किया तो प्रश्नकाल स्थगित कर दूंगा। सदन की कार्यवाई स्थगित कर दूंगा।
वैल से निकलकर एक बार फिर जूली माइक पर आए। विधायक सीटों पर बैठे लेकिन हंगामा खत्म नहीं हुआ। एक बार फिर खींवसर-जूली आमने-सामने दिखे। जूली तैश मंे बोले-आप राजस्थान की जनता के स्वास्थ्य का ध्यान रखना चाहते हैं या नहीं! खींवसर ने कहा, आप बताइये कि आचार संहित से ठीक पहले ये एक्ट कैसे लेकर आए! इसके साथ ही एकबारगी वॉक आउट भी हो  गया।