Rajasthan: बिना चीरा लार ग्रंथि का ऑपरेशन, SMS अस्पताल ने रचा नया इतिहास
RNE Network.
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। SMS अस्पताल के ईएनटी विभाग में पहली बार साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक के जरिए लार ग्रंथि की समस्या का बिना चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया गया। सरकारी स्तर पर राजस्थान में इस तकनीक से किया गया यह पहला ऑपरेशन बताया जा रहा है। खास बात ये है कि मरीज की गर्दन या चेहरे पर किसी तरह का बाहरी चीरा नहीं लगाया गया।
सवाई मानसिंह अस्पताल के ईएनटी विभाग में लार ग्रंथि की सर्जरी के लिए नई और कम इनवेसिव तकनीक का सफल इस्तेमाल किया गया। विभाग के वरिष्ठ आचार्य डॉ. पवन सिंघल के नेतृत्व में दो मरीजों का साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक से उपचार किया गया।
रेवाड़ी के 28 वर्षीय शिव कुमार की सबमंडीबुलर ग्रंथि में पथरी थी, जबकि झुंझुनू के 13 वर्षीय फैजान की पैरोटिड ग्रंथि में स्टेनोसिस की समस्या थी। दोनों मरीजों का ऑपरेशन मुंह के अंदर से किया गया और गर्दन या चेहरे पर किसी तरह का बाहरी चीरा नहीं लगाया गया।
साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक में लार ग्रंथि के प्राकृतिक छिद्र के जरिए एंडोस्कोप अंदर पहुंचाया जाता है और समस्या को सीधे देखकर उसका उपचार किया जाता है। इस तकनीक से बाहरी चीरा लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
डॉक्टरों के मुताबिक पारंपरिक तरीके से लार ग्रंथियों की सर्जरी में चेहरे पर निशान के अलावा कुछ मामलों में चेहरे की नस से जुड़ी जटिलताओं का खतरा भी रहता है। साइलो-एंडोस्कोपिक तकनीक में बाहरी चीरा नहीं लगाया जाता, जिससे ऐसे जोखिमों को कम करने में मदद मिलती है।
इन दोनों मरीजों का ऑपरेशन सफल रहा है। ऑपरेशन के बाद दोनों मरीज पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें किसी तरह का दर्द या बाहरी निशान नहीं है। इस तकनीक की खासियत यह है कि डॉक्टर एंडोस्कोप यानी दूरबीन की मदद से शरीर के अंदर मौजूद समस्या को देखते हैं और प्राकृतिक या छोटे रास्ते के जरिए उपचार करते हैं। लार ग्रंथि में पथरी या संकुचन जैसी समस्याओं के उपचार में यह तकनीक खास तौर पर उपयोगी मानी जाती है।
दोनों मरीजों का उपचार राजस्थान सरकार की मां योजना के अंतर्गत निशुल्क किया गया। इस सफल प्रक्रिया में ईएनटी विभाग के डॉ. पंकज गर्ग, डॉ. आंचल अग्रवाल, डॉ. सिद्धार्थ सिकरवाल और डॉ. इशिता बंसल ने सहयोग किया। वहीं निश्चेतन विभाग की टीम में डॉ. सोनाली बेनीवाल और डॉ. महिपाल तथा नर्सिंग ऑफिसर संदीप और दीपिका भी टीम का हिस्सा रहे।
सरकारी अस्पताल में इस तकनीक की शुरुआत से लार ग्रंथि की ऐसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को आधुनिक और कम इनवेसिव उपचार का विकल्प उपलब्ध होगा। SMS अस्पताल की यह उपलब्धि राजस्थान में आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। बिना बाहरी चीरा लगाए लार ग्रंथि की समस्या का उपचार मरीजों के लिए कम दर्द और बेहतर कॉस्मेटिक परिणाम का विकल्प उपलब्ध कराता है।