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Rajasthan : राजस्थान सरकार ने उद्यमियों को दी बड़ी राहत, अब बड़े भूखंडों को बेच सकेंगे टुकड़ों में, रीको ने दी मंजूरी  

राजस्थान में औद्योगिक विकास व उद्यमियों को लेकर रीकों की तरफ से बड़ी राहत दी है। अब उद्यमी उनको आवंटित हुई भू खंड को छोटे टुकड़ों को बांटकर उसको बेच सकेंगे
 

राजस्थान में औद्योगिक विकास व उद्यमियों को लेकर रीको की तरफ से बड़ी राहत दी है। अब उद्यमी उनको आवंटित हुई भू खंड को छोटे टुकड़ों को बांटकर उसको बेच सकेंगे। इसके लिए रीको की तरफ से भू खंडों को विभाजन की अनुमति दे दी है। इस निर्णय के तहत अब रीको के आवंटी अपने बड़े भूखण्ड छोटे हिस्सों में विभाजित कर विक्रय कर सकेंगे।

रीको द्वारा डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 के नियम 17 (ई) को पुनः लागू करते हुए यह व्यवस्था की गई है कि 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले भूखण्डों का उप-विभाजन किया जा सकेगा। उप-विभाजन के बाद प्रत्येक उप-विभाजित भूखण्ड का न्यूनतम क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर रहेगा।

निर्धारित शर्तों के अनुसार, भूखण्ड का उप-विभाजन भूमि आवंटन के 7 वर्ष बाद ही किया जा सकेगा और संबंधित भूखण्ड विवाद रहित होना चाहिए। उप-विभाजन की प्रक्रिया के तहत आवेदक को प्रस्तावित लेआउट प्लान रीको में जमा कराना होगा, जिसे लैंड प्लान कमेटी से अनुमोदित कराया जाएगा। यदि भूखण्ड पर किसी बैंक या वित्तीय संस्थान का ऋण है, तो उसकी एनओसी भी आवश्यक होगी।

रीको ने स्पष्ट किया है कि उप-विभाजन के बाद विकसित होने वाले क्षेत्र में सड़क, ड्रेनेज, बिजली, स्ट्रीट लाइट, वर्षा जल संचयन और जल आपूर्ति जैसी बुनियादी सुविधाएं मूल आवंटी को अपने खर्च पर उपलब्ध करानी होंगी। इन सुविधाओं को तीन वर्षों के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य होगा।

नियमों के अनुसार, 1500 वर्गमीटर तक के भूखण्ड के लिए न्यूनतम 18 मीटर तथा इससे बड़े भूखण्ड के लिए 24 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़क का प्रावधान रखा गया है।

वित्तीय प्रावधानों के तहत उप-विभाजन शुल्क संबंधित औद्योगिक क्षेत्र की प्रचलित दर का 2 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। इसके अलावा ट्रांसफर चार्ज एवं एक स्वीकृत गतिविधि से अन्य स्वीकृत गतिविधि के परिवर्तन हेतु स्वीकृति शुल्क भी नियमानुसार देय होंगे। उप-विभाजित भूखण्ड की लीज अवधि मूल लीज अवधि से अधिक नहीं होगी और नए खरीदार को पंजीकृत दस्तावेज की तिथि से दो वर्षों के भीतर भूखण्ड का उपयोग करना अनिवार्य होगा।

गौरतलब है कि उद्यमियों द्वारा लंबे समय से बड़े भूखण्डों के उप-विभाजन की मांग की जा रही थी। ऐसे में यह निर्णय न केवल भूमि के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करेगा, बल्कि औद्योगिक क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति देगा तथा नए निवेश एवं रोजगार के अवसर भी सृजित करेगा।