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44° के पास तप रहा राजस्थान, यूरोप में 40° के आसपास तापमान में 1000 से ज्यादा मौतें!
 

 

RNE Bikaner-New Delhi. 

एक ओर बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर और बाड़मेर सहित पश्चिमी राजस्थान में मानसून की धीमी रफ्तार के कारण तापमान 43-44 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा हुआ है, वहीं दूसरी ओर यूरोप के कई देशों में 40 से 44 डिग्री तापमान ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पिछले एक सप्ताह में यूरोप में हीटवेव से 10 00 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक टेढ़े होकर उखड़ने लगे हैं और कई ट्रेनों का संचालन रोकना पड़ा है। 

इधर भारतीय मौसम विभाग के अनुसार रविवार को देश का सबसे अधिक तापमान 43.8°C फलौदी में दर्ज किया गया, जबकि बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में भी भीषण गर्मी बनी हुई है। हालांकि 2 से 5 जुलाई के बीच आंधी और बारिश के साथ राहत मिलने की संभावना है। 

यूरोप में 40°C ही क्यों बन गया संकट?

हालांकि राजस्थान में हर साल इससे ज्यादा गर्मी पड़ती है, फिर यूरोप में इतने तापमान पर इतना बड़ा संकट क्यों? इस सवाल के जवाब में विशेषज्ञ कई वजह गिनाते हैं। 

1. यूरोप गर्मी के लिए बना ही नहीं : 

यूरोप के अधिकांश घर और इमारतें ठंड से बचाने के लिए बनाई गई हैं। मोटी दीवारें और बंद ढांचे गर्मी को अंदर कैद कर लेते हैं। लगातार गर्म रातों के कारण घर "भट्टी" बन जाते हैं और लोगों को राहत नहीं मिलती। 

2. एसी की भारी कमी : 

भारत के बड़े शहरों और पश्चिमी राजस्थान में अब बड़ी संख्या में घरों, दुकानों और कार्यालयों में एयर कंडीशनर उपलब्ध हैं। इसके विपरीत यूरोप में केवल लगभग 20% घरों में एसी हैं, जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा महज 7% है। कई अस्पताल और सार्वजनिक भवन भी बिना एसी के हैं। 

3. बुजुर्ग आबादी ज्यादा, 85% मौतें उन्हीं की : 

यूरोप की लगभग 22% आबादी 65 वर्ष से अधिक है। हीटवेव से हुई मौतों में करीब 85% बुजुर्ग हैं। अधिकतर मौतें घरों के अंदर हुईं, जहां लोग गर्मी से बच नहीं सके। 

4. दिन लंबे, धूप ज्यादा : 

इन दिनों यूरोप में करीब 16 घंटे तक सूरज रहता है, जबकि भारत में औसतन 12-13 घंटे। लगातार लंबी धूप जमीन और भवनों को अधिक गर्म कर देती है। 

जानिए यूरोप में क्या-क्या हालात बने?

* पिछले सात दिनों में 1000 से अधिक लोगों की मौत।
* फ्रांस में सड़कें पिघलने लगीं।
* जर्मनी में रेलवे ट्रैक गर्मी से टेढ़े होकर उखड़ने लगे, कई ट्रेनें रद्द।
* राहत पाने के लिए नदियों और झीलों का रुख, फ्रांस में डूबने से भी कई मौतें।
* कई देशों में 100 से अधिक वर्षों के तापमान रिकॉर्ड टूट गए। 

पश्चिमी राजस्थान में क्यों संभल जाता है जनजीवन?

राजस्थान के लोग दशकों से भीषण गर्मी के अभ्यस्त हैं। यहां भवनों की बनावट, जीवनशैली, दोपहर में काम कम करने की परंपरा, पानी और छांव की व्यवस्था तथा प्रशासन की हीटवेव तैयारियां इस मौसम के अनुरूप विकसित हुई हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि यहां गर्मी खतरनाक नहीं होती—हर साल लू से बीमारियां और मौतें भी होती हैं। लेकिन यहां का सामाजिक और भौतिक ढांचा लंबे समय से अत्यधिक गर्म मौसम के अनुरूप ढल चुका है।

अब पश्चिमी राजस्थान को राहत कब?

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी राजस्थान में मानसून की सक्रियता बढ़ने के साथ 2 से 5 जुलाई के बीच धूलभरी आंधी, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। तेज हवाओं के साथ तापमान में 4 से 5 डिग्री तक गिरावट आ सकती है और बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान को गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं।