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पहले राजस्थान के माधव हाड़ा को काग पुरस्कार 2026, ममता कालिया को मिला आकाशदीप सम्मान

अपने अपने क्षेत्र के दोनों ही महारथी
उदास साहित्य माहौल में इनसे खुशी की लहर
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.


साहित्य जगत के लिए ये समय खास अच्छा नहीं। एक तरफ जहां कुछ बड़े रचनाकारों को हमने खोया है, वहीं दूसरी तरफ एक बार फिर सत्ता के घेरे में साहित्य को लेने का जीवंत दृश्य देखना पड़ रहा है। इस दौर में ही हमने कथाकार मनोज रूपड़ा का सरेआम अपमान होते देखा है। सत्ता के इस रूप को देखना ही शायद शेष था। 

इतना ही नहीं, मनोज रूपड़ा प्रकरण के बाद दो हिस्सों में बंटते साहित्य समाज को भी देखा। ठीक इसी तरह जैसे कुछ रचनाकारों ने मनोज रूपड़ा के साथ अशालीन व्यवहार होते देखा। 
देश की साहित्य संसद  साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली की स्वायत्तता पर आ रहे संकट को भी देख भर रहा है साहित्य समाज। साहित्यकारों को नहीं, साहित्य को मिलने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार पर अंकुश को भी हम देख भर रहे है। आश्चर्य है कि इस पर भी मौन है, मुखरित हो ही नहीं रहे। जिस साहित्य अकादेमी के अध्यक्ष प जवाहर लाल नेहरू रहे और यात्रा विश्वनाथ प्रसाद तिवारी तक पहुंची। अब माधव कौशिक अध्यक्ष है। 

इसके अलावा विश्व पुस्तक मेले में घटती भागीदारी भी हम देख रहे है। इस आयोजन के विमर्श पहलू में नये , अलग तरह के लोगों की अधिक भागीदारी भी दिख रही है। राज नेताओं की भागीदारी और उनके द्वारा साहित्य पुस्तकों के लोकार्पण को भी देख रहे है। साहित्य के इससे अच्छे ( ? ) दिन तो क्या आयेंगे।

मूल स्वभाव कहां खो गया:

साहित्य के बारे में नामवर सिंह जी से लेकर छोटे से गांव में बैठकर सृजन करने वाला रचनाकार भी कहता है कि साहित्य आम आदमी के साथ खड़ा रहता है, क्योंकि वो सत्ता का स्थायी विपक्ष है। उसका धर्म यही है। मगर अफसोस, इस दौर में सत्ता के विरोध को नेता विशेष या राजनीतिक दल का विरोध माना जाने और कहा जाने लगा है। जबकि आदिकाल से अर्थ, धर्म, समाज व राज की सत्ताओं के प्रकार बताए जाते रहे है। उनको भूलकर एक नेता या एक दल का विरोध परिभाषित किया जा रहा है, हम देख भी रहे है चुपचाप। 


दो सुकून देने वाली खबरें:

साहित्य के इस अजीबोगरीब हालात में दो सुकून देने वाली खबरें भी आई। जिससे ये उम्मीद जगी कि अब भी समाज साहित्य को सम्मान देता है। उसे सत्ता के आश्रय की जरूरत नहीं। साहित्य अकादेमी के 24 भाषाओं के पुरस्कार एकबारगी भले ही सरकार ने रोक लिए हो, मगर जो अपने बूते पर यह काम करते है वे प्रभावित नहीं हुए।

इन दिनों की पहली खबर मिली काग पुरस्कार 2026 की। यह पुरस्कार राजस्थान के रचनाकार, लोक साहित्य पर शोधपरक कार्य करने वाले, आलोचक माधव हाड़ा को घोषित हुआ। सटीक चयन के लिए हर रचनाकार संतुष्ट था।

दूसरी खुश खबर थी आकाशदीप सम्मान की। यह सम्मान वरिष्ठ लेखिका, कथाकार, उपन्यासकार ममता कालिया को घोषित हुआ। हर रचनाकार इस घोषणा से प्रसन्न था। उसे संतोष था। इन दो अच्छी खबरों ने सारे अवसाद को हल्का कर दिया।