{"vars":{"id": "127470:4976"}}

वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026 : 5 जून तक प्रदेशभर में होंगे जल संरक्षण कार्यक्रम

 

RNE Network.
 

प्रदेश में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पारम्परिक जलस्त्रोतों की सफाई के उद्देश्य से आज सोमवार से वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026 शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा आज बीसलपुर बांध से अभियान का शुभारम्भ करेंगे। यह अभियान विश्व पर्यावरण दिवस— 5 जून तक चलेगा। इस दौरान नदियों, नहरों का पूजन, प्रभात फैरी, कलश यात्रा और नुक्कड नाटक, पौधरोपण और जल संरक्षण शपथ कार्यकम होंगे। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने के प्रयास किये जायेंगे। इसके तहत आज जिला ब्लॉक और पंचायत स्तर पर जल स्त्रोतों, तालाबों और नदियों पर स्वच्छता अभियान चलाकर श्रमदान किया जाएगा। इसके साथ ही चूरू, सवाईमाधोपुर, अलवर, हनुमानगढ़, बारां, अजमेर, बाडमेर, पाली, करौली और भरतपुर सहित अन्य जिलों में जल पूजन, आरती और दीपदान के कार्यकम होंगे।
 

मुख्यमंत्री सोमवार को टोंक में बीसलपुर बांध पर जल पूजन और शिव मंदिर में अभिषेक के साथ अभियान का शुभारंभ करेंगे। साथ ही, मुख्यमंत्री ईसरदा, बंध बरेठा और गालवा बांध का हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे। इसी दिन मुख्यमंत्री भरतपुर के गंगा माता मंदिर में आरती और सुजानगंगा नहर में दीपदान भी करेंगे। 
 

प्रदेशभर में इसी दिन कुओं, बावड़ियों, तालाबों, नहरों एवं अन्य जल स्रोतों के पूजन के साथ जिला स्तरीय अभियान की शुरुआत होगी। इस दौरान जिले से लेकर ग्राम स्तर तक जल स्रोतों पर स्वच्छता अभियान, श्रमदान, दीप प्रज्ज्वलन और जन-जागृति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, जल संसाधन विभाग द्वारा जल उपयोगिता संगम और किसानों के सहयोग से नहरों एवं खालों की साफ-सफाई की जाएगी। साथ ही, नदी, बांधों, सरोवर एवं नहरों पर पूजन किया जाएगा। वहीं, नए जल संरक्षण कार्यों का शिलान्यास, भूमि पूजन एवं पूर्ण कार्यों का लोकार्पण भी किया जाएगा। विद्यार्थियों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से वंदे गंगा प्रभात फेरियां, गंगा दशहरा की महत्ता पर लेखन प्रतियोगिताएं तथा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजीविका से जुड़ी महिलाओं द्वारा कलश यात्राएं निकाली जाएंगी तथा पीपल पूजन, पौधारोपण एवं ईको फ्रेंडली स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनियां लगाई जाएंगी।
 

वहीं मंगलवार, 26 मई को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग द्वारा जल संरक्षण एवं जनभागीदारी को लेकर नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाएंगे। वहीं, अधिकतम संख्या में लोगों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। साथ ही, अमृत सरोवर एवं अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के नए कार्यों का शिलान्यास और पूर्ण कार्यों का लोकार्पण किया जाएगा। हरियालो राजस्थान अभियान के तहत पौधारोपण की अग्रिम तैयारियों के साथ ‘कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान’ के तहत जल संरक्षण कार्यों की शुरुआत भी होगी। 
 

27 मई को पशुपालन, गोपालन, देवस्थान विभाग, आरसीडीएफ एवं स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा गोशालाओं, पशु चिकित्सालयों और दुग्ध संघों में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। जिला एवं ब्लॉक स्तर पर धार्मिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, भामाशाहों और गणमान्य नागरिकों की संगोष्ठियां आयोजित कर जल संरक्षण को लेकर संवाद किया जाएगा। 
 

जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग द्वारा 28 मई को रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, कृषि उपज मंडियों सहित सार्वजनिक स्थलों पर भामाशाहों एवं स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से ‘वंदे गंगा जल सेवा’ आयोजित की जाएगी। वहीं, वर्षा जल संचयन तकनीकों की जानकारी देने, जल परीक्षण अभियान चलाने और जन-जागरूकता संबंधी कार्यक्रम भी होंगे। इसी प्रकार भू-जल विभाग द्वारा ‘कर्म भूमि से मातृ भूमि’ अभियान के तहत कार्यों का अवलोकन भी किया जाएगा। वहीं, सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा राजकीय भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई एवं मरम्मत की जाएगी। उद्योग विभाग द्वारा जल उपयोग अंकेक्षण, ग्रीन ऑफिस इनीशिएटिव, एनर्जी ऑडिट तथा ग्रीन बजट को बढ़ावा देने के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
 

29 मई को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण एवं राजीविका द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में प्राचीन तालाबों, जोहड़ों एवं अन्य जल स्रोतों की मैपिंग, साफ-सफाई और मरम्मत के कार्यों के साथ ही मुख्य मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा। इसी प्रकार 30 मई को जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान के अंतर्गत पूर्ण कार्यों का अवलोकन एवं लोकार्पण के अलावा नए कार्यों का शुभारंभ किया जाएगा। वहीं, औरण एवं चारागाहों का चिन्हीकरण, पौधारोपण की अग्रिम तैयारी तथा ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर जल चौपालों का आयोजन भी किया जाएगा।
 

रविवार, 31 मई को पंचायती राज विभाग एवं खेल विभाग द्वारा स्वयं सेवी संस्थाओं के सहयोग से वंदे गंगा प्रभात फेरियां, साइकिल रैलियां और जागरूकता अभियान रैलियां निकाली जाएंगी। वहीं, पुलिस, सेना एवं अर्द्धसैनिक बलों द्वारा चिन्हित स्थानों पर श्रमदान किया जाएगा। इसके अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा बावड़ियों एवं जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई, पशुओं के लिए स्वच्छ पेयजल व्यवस्था तथा पक्षियों के लिए परिंडे बांधने जैसे कार्यक्रम आयोजित होंगे। वहीं, स्वायत्त शासन विभाग द्वारा जल स्रोतों की साफ-सफाई व मरम्मत कर दीप प्रज्वलन किया जाएगा। अमृत 2.0 के अंतर्गत कार्यों का अवलोकन एवं लोकार्पण करने के साथ ही स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा रख-रखाव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ‘नो प्लास्टिक डे’ के तहत प्लास्टिक कचरे का चिन्हित स्थानों पर निष्पादन भी किया जाएगा।
1 जून को कृषि एवं उद्यानिकी विभाग द्वारा स्प्रिंकलर, ड्रिप, फार्म पॉण्ड एवं पाइपलाइन जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धति पर कार्यशाला एवं प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। वहीं, कृषि विज्ञान केन्द्रों पर संगोष्ठियां आयोजित कर प्राकृतिक खेती, जैविक खेती, प्रिसीजन फार्मिंग पर चर्चा के साथ ही किसान चौपाल आयोजित की जाएंगी। इसी प्रकार 2 जून को जल संसाधन विभाग द्वारा नदियों, बांधों, सरोवरों एवं नहरों पर पूजन कार्यक्रम आयोजित होंगे। वहीं, नहरों और खालों की साफ-सफाई तथा गाद निकालने के कार्य किए जाएंगे। साथ ही, नए कार्यों का शिलान्यास एवं पूर्ण कार्यों का लोकार्पण भी होगा। वहीं, पीएचईडी द्वारा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम निर्माण की तकनीकी जानकारी, जल बचत हेतु जन जागृति कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

 

बुधवार, 3 जून को जिला प्रशासन द्वारा चिन्हित स्थानों पर विशेष नवाचार एवं अभिनव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही, ऊर्जा विभाग द्वारा ट्रांसफार्मर्स के आस-पास साफ-सफाई के अलावा सौर ऊर्जा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वालों का सम्मान किया जाएगा। 4 जून को जिला स्तर पर जल एवं पर्यावरण संरक्षण को लेकर निबंध, नारा लेखन, चित्रकला, खेलकूद प्रतियोगिताएं और नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जाएंगे। वहीं, सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा सरकारी भवनों में स्थापित वर्षा जल संचयन संरचनाओं की साफ-सफाई की जाएगी। इसी प्रकार ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर जल चौपाल आयोजित कर जल संग्रहण एवं जल संरक्षण कार्यों पर चर्चा की जाएगी।
 

विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून को वन विभाग द्वारा हरियालो राजस्थान अभियान के तहत गड्ढे खोदने, वन क्षेत्र की जल संरचनाओं की गाद निकालने एवं अवलोकन-लोकार्पण जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वहीं, चयनित स्थानों पर ईको फ्रेंडली आर्ट लगाने के साथ ही आमजन को तुलसी के पौधों का वितरण भी किया जाएगा। साथ ही, स्वायत्त शासन विभाग द्वारा सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग नहीं करने को लेकर जन-जागृति अभियान चलाया जाएगा।
 

इसी दिन अभियान के तहत जिला स्तरीय समापन समारोह आयोजित किए जाएंगे। इस अवसर पर जल संरक्षण एवं जनभागीदारी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भामाशाहों, संस्थाओं, पंचायतों, नगर निकायों और जल योद्धाओं को “जल गौरव सम्मान” प्रदान किया जाएगा। साथ ही, पर्यटन विभाग की ओर से सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी किया जाएगा। 
 

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अभियान के दौरान राज्य की लगभग 11 हजार ग्राम पंचायतों में 3 लाख 70 हजार से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इनमें 42 हजार 200 जल स्रोतों की सफाई, 18 हजार 900 पूर्ण कार्यों का लोकार्पण और 5 हजार 600 नवीन कार्यों का शुभारंभ शामिल है। इन कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ 53 लाख लोगों ने भागीदारी निभाई थी, जिनमें 1 करोड़ 32 लाख महिलाएं शामिल थीं। राज्य सरकार इस वर्ष भी जल संरक्षण को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए व्यापक स्तर पर जनभागीदारी आधारित अभियान चलाने जा रही है।