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Cold Wave Alert : शीतलहर की चपेट में आएगा हरियाणा, 8 तक मौसम रहेगा खुश्क 

उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं (शीतलहर) के कारण ठिठुरन में भारी बढ़ोतरी होगी। अभी दिन के समय धूप कम निकलने से मौसम में ठंडक घुल रही है। दिन और रात का तापमान भी सामान्य से नीचे चल रहा है।
 

हरियाणा में आने वाले दिनों में ठंड का प्रकोप और बढ़ने वाला है। मौसम विशेषज्ञों ने संकेत दिए हैं कि 8 जनवरी तक मौसम आमतौर पर खुश्क बना रहेगा, लेकिन उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं (शीतलहर) के कारण ठिठुरन में भारी बढ़ोतरी होगी। अभी दिन के समय धूप कम निकलने से मौसम में ठंडक घुल रही है। दिन और रात का तापमान भी सामान्य से नीचे चल रहा है।

चौधरी चरणसिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार अब फिर से मौसम में परिवर्तन की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा, लेकिन 5 और 6 जनवरी को जिले के आसमान में बीच-बीच में हल्के बादल छाए रह सकते हैं। इन बादलों की वजह से धूप का असर कम होगा और दिन के तापमान में आंशिक उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। सबसे अधिक प्रभाव रात्रि के तापमान पर पड़ेगा, जिसमें भारी गिरावट आने की संभावना जताई गई है।

धुंध से यातायात और जनजीवन प्रभावित

वातावरण में नमी की अधिकता के कारण दक्षिणी हरियाणा, विशेषकर रेवाड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सुबह और देर रात्रि को गहरी धुंध व कोहरा छाए रहने की संभावना है। प्रशासन ने वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है, क्योंकि धुंध के कारण दृश्यता काफी कम रह सकती है। हालांकि, पश्चिमी हरियाणा की तुलना में इस क्षेत्र में कोहरे का असर अधिक रहने की उम्मीद है।

शीतलहर से बचाव की अपील 

 मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिमी शीत हवाओं के चलते लोगों को भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने को कहा है। खासकर बुजुर्गों और बच्चों को सुबह की ठंड से बचने की सलाह दी गई है। दिन के समय धूप निकलने से थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन शीतलहर का प्रभाव जारी रहेगा।

किसानों के लिए मौसम का गणित

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ठंड और धुंध रबी की फसलों, र गेहूं और सरसों के लिए काफी हद तक फायदेमंद है। गेहूं की फसलः मौजूदा निम्न तापमान गेहूं की फसल में 'फुटाव' के लिए संजीवनी का काम करता है। इससे दाने की गुणवत्ता और पैदावार में सुधार होता है।

सरसों की चिंता: यदि रात का तापमान जमाव बिंदु के करीब पहुंचता है और पाला गिरता है, तो अगेती सरसों की फसल को नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि पाले की स्थिति में फसलों में हल्की सिंचाई करें, ताकि मिट्टी का तापमान बना रहे। सब्जियों पर असर : धुंध और शीतलहर का सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव टमाटर, मिर्च और बेल वाली सब्जियों पर पड़ सकता है।