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इंसानी मोहब्बत की सुंदर तस्वीर, रमजान के महीनें में साकार हुई गंगा - जमुनी संस्कृति

 

RNE Bikaner.

रमज़ान की रूहानी फिज़ा में इंसानी मोहब्बत,  और गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक तस्वीर उस वक़्त सामने आई, जब समाजसेवी पंकज भाटिया अपने पूरे परिवार सहित अस्मत अमीन हाउस पहुंचे और लगातार पाँचवें वर्ष रोज़ा इफ़्तारी भेंट कर अपनी खूबसूरत परंपरा को कायम रखा।

इस अवसर पर माहौल बेहद आत्मीय, भावुक और अपनत्व से सराबोर रहा। रोज़ेदारों के साथ बैठकर इफ़्तार की तैयारी और अज़ान के इंतज़ार के लम्हों में जो अपनापन और तअल्लुक़ नज़र आया, उसने इंसानी रिश्तों की गर्माहट और आपसी भाईचारे की गहराई को और भी उजागर कर दिया।
 

इफ़्तार के बाद अस्मत अमीन फ़ाउंडेशन तथा सोशल प्रोग्रेसिव सोसायटी, बीकानेर की ओर से पंकज भाटिया एवं उनके परिवार का साहित्य, शाल भेंट कर तहे-दिल से सम्मान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि भाटिया परिवार द्वारा लगातार पाँच वर्षों से निभाई जा रही यह परंपरा न सिर्फ़ क़ाबिले-तारीफ़ है, बल्कि समाज में मोहब्बत, साझेदारी और इंसानियत का मजबूत पैग़ाम भी देती है।

इस मौके पर भाटिया परिवार ने मोहम्मद अमीन लाइब्रेरी का अवलोकन भी किया और उर्दू ज़बान में उपलब्ध रामायण, गीता सहित अन्य दुर्लभ ग्रंथों के बारे में दिलचस्पी से जानकारी हासिल की। लाइब्रेरी में मौजूद स्टोन कलर से बनी श्रीकृष्ण लीला की दुर्लभ पेंटिंग ने भी विशेष रूप से सबका ध्यान आकृष्ट किया। इस दौरान साहित्यिक और सांस्कृतिक संवाद का खुशनुमा सिलसिला भी चला, जिसमें युवा साहित्यकार इमरोज़ नदीम, अरमान नदीम और शिक्षिका तसनीम बानो ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया।
 

कार्यक्रम के अंत में मुल्क में अमन-चैन, आपसी सद्भाव और खुशहाली के लिए दुआ की गई, और सभी ने इस परंपरा के निरंतर बने रहने की उम्मीद जताई।

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