कांग्रेस के प्रदर्शन के एक दिन बाद आज गोविंदराम मेघवाल दिखाएंगे अपनी ताकत
बॉर्डर पर मस्जिदें, दरगाहें तोड़ने के खिलाफ कलेक्ट्रेट परिसर में गोविंदराम मेघवाल की अगुवाई में प्रदर्शन
एक दिन पहले कांग्रेस ने पीबीएम में अव्यवस्थाओं के साथ ही इस मुद्दे पर भी किया था प्रदर्शन
प्रदेश अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी हुए थे प्रदर्शन में शामिल
कांग्रेस के प्रदर्शन में पूर्वमंत्री गोविंदराम मेघवाल का भाषण शुरू होते ही हुई थी ‘हूटिंग’ लगे थे ‘डूडी-अमर रहे’ नारे
पंचायती : धीरेन्द्र आचार्य
RNE Special.
बीकानेर के कलेक्ट्रेट परिसर में लगातार दूसरे दिन बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है। मंगलवार को देहात और शहर कांग्रेस की अगुवाई मंे पीबीएम हॉस्पिटल की अव्यवस्थाओं और बॉर्डर में धार्मिक स्थल तोड़ने के मुद्दे पर प्रदर्शन हुआ था। इसमें प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली भी शामिल हुए थे।

आज कमोबेश इसी मुद्दे पर कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल की अगुवाई में बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है। यह प्रदर्शन बॉर्डर एरिया में भवनों को तोड़ने के खिलाफ है। आरोप है कि इस कार्रवाई में जान-बूझकर मस्जिदों, मदरसों, दरगाह आदि को तोड़ा जा रहा है। चूंकि बीकानेर का खाजूवाला बॉर्डर एरिया है और गोंिवदराम मेघवाल यहां से विधायक-मंत्री रहे हैं।

पिछला चुनाव भी लड़ा है ऐसे में मेघवाल के लिए यह अपने विधानसभा क्षेत्र का बड़ा संवेदनशील मुद्दा है। हालांकि इस प्रदर्शन को सर्वधर्म या सर्वसमाज जैसे बैनेर के तले किया जा रहा है। इसमें सीधे तौर पर पार्टी का नाम नहीं जोडा गया है।
हालांकि गोविंदराम ने कांग्रेस की ओर से पीबीएम के मुद्दे पर प्रदर्शन की घोषणा से पहले ही इस आंदोलन-प्रदर्शन की घोषणा कर दी गई थी। इसके बावजूद कांग्रेस के प्रदर्शन के एक दिन बाद ही यह दूसरा प्रदर्शन करने की जरूरत पर सवाल जरूर उठ रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि मदले हालात में गोविंदराम को बार-बार अपनी जमीनी ताकत दिखानी पड़ रही है।

ताकत दिखाने की वजह भी साफ है। बीकानेर जिले में कांग्रेस पूरी तरह दो खेमों में बंट गई है। हालांकि अंदरखाने ये सब पहले भी था लेकिन गोंिवदराम मेध्ज्ञवाल का एक ऑडियो वायरल होने के बाद यह फूट खुलकर चौड़े आ गई। एक तरफ गोविंदराम मेघवाल है वहीं दूसरी तरफ देहात कांग्रेस अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, विधयक सुशीला रामेश्वर डूडी, शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल सहित युवक कांग्रेस, एनएसयूआई के नेता आदि का गुट है।
हालांकि यह फूट पहले भी थी लेकिन गोविंदराम मेघवाल एक ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद लड़ाई खुलकर सड़क पर आ गई। इस ऑडियों में गोविंदराम की आवाज होने का आरोप लगाया गया है। इसमंे दिग्गज कांग्रेस नेता रहे रामेश्वर डूडी के प्रति अपशब्द कहे गए हैं। शहर कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा प्रत्याशी रहे मदन गोपाल मेघवाल को लेकर भी अशोभनीय भाषा का उपयोग हुआ। इसके बाद कांग्रेस नेताआंे ने खुलकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदेश आलाकमान से लेकर राष्ट्रीय मुख्यालय तक आपत्ति जताई। दूसरी ओर गोविंदराम ने भी अपना पक्ष रखा। वे बार-बार पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकातें करते नजर आए। इतना ही नहीं विरोध खुलकर हुआ तो गोंिवदराम ने भी खुलेआम आरोप लगा दिया कि उन्हें हराने के लिए कांग्रेस के नेता भाजपा के सांसद-मंत्री अर्जुनराम से मिले हुए थे। वोटिंग प्रतिशत से लेकर उनके काम-धंधों तक का जिक्र कर डाला। कैसी-कैसी डील हुई इसके भी आरोप लगाए।

ऐसे ही हालात के बीच एक दिन पहले बीकानेर में हुए कांग्रेस के प्रदर्शन में जब प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली पहुंचे तो पूर्व मंत्री गोंिवदराम मेघवाल भी मंच पर रहे। मेघवाल का भाषण शुरू होते ही हूटिंग के अंदाज में ‘रामेश्वर डूडी अमर रहे’ नारे लगने लगा। माहौल बिगड़ता देख प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा उठे। मेघवाल के हाथ से माइक लिया और लोगों को नसीहत देकर शांत करवाया।
बीकानेर में कांग्रेस की इस फूट से प्रदेश स्तर पर चिंता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीबीएम में अव्यवसथाओं और बॉर्डर पर निर्माण तोड़ने के मुद्दे पर हुए आंदोलन में डोटासरा अपने भाषण का बड़ा हिस्सा बीकानेर में कांग्रेस की फूट से हो रहे नुकसान को रखा। इसके साथ ही एकजुटता की नसीहतें दी।

हालांकि कहने-सुनने में एकता की बतों अच्छी लग सकती है लेकिन जमीनी हालात यह है कि फिलहाल कांग्रेस के भीतर सुलग रही चिंगारी भड़क कर आग का रूप ले चुकी है। खुद कांग्रेस मानती है कि अपनी इस फूट की वजह से ही बीकानेर की लोकसभा सीट जीतने से चूक गये। विधानसभा चुनाव में भी अच्छा माहौल होने के बावजूद अच्छे नतीजे नहीं ले पाए। ऐसे मंे अब जब पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनाव सामने हैं और उससे ठीक पहले एक बार फिर बीकानेर में कांग्रेस ही आमने-सामने दिख रही है तो वोटिंग प्रदर्शन पर कितना असर पड़ेगा इसका अनुमान भी लगाया जा सकता है। अगले विधानसभा चुनाव में पार्टी को हो सकने वाले नुकसान का संकेत भी डोटासरा कर गए हैं।

जाहिर है कि रामेश्वर डूडी की जयंती से एक दिन पहले मंच से दी गई नसीहत और डूडी की जयंती के दिन होने रहे प्रदर्शन के दिन कांग्रेस ‘भूलो और माफ करो’ मंत्र अपनाती है तो भाजपा के लिए बीकानेर बड़ी चुनौती बन सकता है लेकिन फिलहाल ऐसा होता नजर नहीं आ रहा।

