बीकानेर में आल राजस्थान तरही मुशायरा, इमाम हुसैन की शान में गूंजे कलाम
RNE Bikaner.
बीकानेर में बज्मे मसालमा कमेटी के तत्वावधान में आयोजित 81वें आल राजस्थान तरही मुशायरे में बीकानेर, चूरू और बिसाऊ के शायरों ने हज़रत इमाम हुसैन (रज़ि.) और शहीदाने-कर्बला की याद में भावपूर्ण कलाम पेश किए। "जिंदा रही नबी शरियत हुसैन से" मिसरे पर आधारित रचनाओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया।

इस वर्ष मुशायरे का मिसरा-ए-तरह था—"जिंदा रही नबी शरियत हुसैन से", जिस पर लिखी गई ग़ज़लों और नज़्मों ने श्रोताओं को गहरे भावों से जोड़ दिया।
आयोजक संस्था के संयोजक एवं वरिष्ठ शायर ज़ाकिर अदीब ने अपने कलाम में इमाम हुसैन को लोकतांत्रिक मूल्यों का रक्षक बताते हुए कहा कि न्याय और सत्य के लिए उनका संघर्ष आज भी प्रेरणास्रोत है। संस्था के सचिव बुनियाद हुसैन 'जहीन' ने इमाम हुसैन को सलाम पेश करते हुए न्याय और साहस का संदेश दिया।
डॉ. ज़िया उल हसन कादरी ने अपने कलाम में कठिन समय में भी इमाम हुसैन से प्रेरणा लेने की बात कही, जबकि चूरू के शायर इदरीस राज ने कर्बला की पवित्र धरती की महानता का उल्लेख किया। अब्दुल मन्नान मजहर ने इमाम हुसैन को अन्याय के अंधकार में उजाले का प्रतीक बताया, वहीं बिसाऊ के शायर मखदूम ने तरन्नुम में कलाम पेश कर पूरे माहौल को रूहानियत से भर दिया।

मुशायरे में असद अली असद, इमदाद उल्लाह बासित, अब्दुल जब्बार जज़्बी, अमर जुनूनी, मुहम्मद इसहाक गौरी 'शफ़क', बरकात वारसी, सालिक इरम, महबूब देशनोकवी, गुलफाम हुसैन आही और मुहम्मद यासीन सहित कई शायरों ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. जावेद आलम द्वारा कुरआन शरीफ के पाठ से हुई। समापन पर मंगतू खान, उस्ताद हारून, पूर्व पार्षद सरताज हुसैन एवं उनकी टीम ने सलाम पेश किया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ शायर ज़ाकिर अदीब ने किया।

