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Anshuman Singh Bhati : कोलायत के मंत्री थे, 285 को 07.50 हजार बीघा अनियमित आबंटन हुआ, रद्द करो!

सिक्किम राज्य से बड़ी कोलायत तहसील, 02 उप तहसील बनाओ!
 
RNE Bikaner-Jaipur
‘वर्ष 2011 के आंकड़े से देखें तो कोलायत तहसील का 08 हजार वर्ग किलोमीटर से बड़ा क्षेत्रफल है। यह सिक्किम राज्य से बड़ा है। मरुस्थलीय तहसील बनाने के लिए नॉर्म है कि 10 पटवार सर्किल पर उप तहसील और 20 पटवार सर्किल पर तहसील बनती है। भौगोलिक परिस्थिति और क्षेत्रफल को देखते हुए नार्म्स में शिथिलन दें और 08 पटवार सर्किल पर उप तहसील बनाएं। इसके साथ ही 16 पटवार सर्किल पर तहसील बनाई जाएं। इस लिहाज से कोलायत के गिरिराजसर और बज्जू के गोकुल गांव में उप तहसील घोषित की जाएं।’
नीचे फोटो पर क्लिक कर सुने क्या कहा विधायक अंशुमान सिंह ने 

Anshuman singh bhati

यह कहना है कोलायत के विधायक अंशुमानसिंह भाटी का। अंशुमानसिंह शनिवार को राजस्थान विधानसभा में राजस्व विभाग की अनुदान मांग पर चल रही चर्चा में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने जमीन से जुड़े ऐसे मसले रखें कि देखने-सुनने वाले हैरान रह गए। उन्होंने पूर्वमंत्री भंवरसिंह भाटी का नाम लिए बगैर कहा, बीकानेर जिले के मंत्री थे। राजस्व, उपनिवेशन, आईजीएनपी, ऊर्जा जैसे विभाग इस जिले में हैं। यहां खाजूवाला विधानसभा के छत्तरगढ़ में लगभग 06 हजार बीघा जमीन का अनियमित आबंटन पकड़ में आया और एक साल पहले इस आबंटन को रद्द किया गया है। इसी तरह कोलायत विधासभा में इलाके में 285 ऐसे अनियमित आबंटन सामने आए हैं जिनमें 07.50 हजार बीघा जमीन का गलत आबंटन किया गया है। इस आबंटन को भी रद्द किया जाएं।
कोलायत सीओ का ऑफिस भी अलॉट कर दिया:
अंशुमानसिंह भाटी ने कोलायत में फर्जी आबंटन का बड़ा मसला उठाते हुए कहा, वर्ष 2015 में सीओ ऑफिस की जमीन अलॉट हुई। यहां वर्ष 2017 में भवन बन गया। सीओ ऑफिस लगने लगा। इसके बाद वर्ष 2020 में महाजन फील्ड फायरिंग विस्थापितों के नाम पर यह जमीन अलॉट हो जाती है। नामांतरण खुल जाता है। खातेदारों के नाम जमीन की रजिस्ट्री हो जाती है। कुछ ही दिनों मंे उस क्षेत्र के 5000 स्क्वायरमीटर में कॉमर्शियल लैंड बताते हुए अलग-अलग काम शुरू हो जाते हैं। इस अनियमितता में जो कोलोनाजेशन कमिश्नर, तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी शामिल रहे हैं उनके खिलाफ कार्रवाई हो।
कपिल सरोवर कैचमेंट में ये 52 बीघा अलॉटमेंट रद्द करो: 
अंशुमानसिंह भाटी ने कहा, जलदाय विभाग ने एक नक्शा कपिल सरोवर का जारी किया। इसमें जल संरक्षण में 1562 हैक्टैयर भूमि दिखाई गई। वर्ष 2021-22 में गांव इंदों का बाला में खसरा संख्या 655-621, 654-621, 663-622, 619-398 और 626-380में 52 बीघा जमीन, अब्दुल रहमान वर्सेज सरकार के नियम के विरूद्ध जाकर जो अलॉटमेंट किया गया है उसका प्रकरण विचाराधीन है। इस अलॉटमेंट केा तुरंत रद्द किया जाए।
आधे रह गए ऊंट-भेड़े, किसानों को सोलर क तरह जमीन अलॉट करो:
कोलायत विधायक भाटी ने सर्वे और रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि रेगिस्तान में ऊंटों की आबादी 50 प्रतिशत और भेड़ें 30 प्रतिशत तक घट गई है। इस पर्यावरणीय असंतुलन की सबसे बड़ी वजह यह है कि अवैध कास्त बढ़ जाने से पशुओं के लिए रोही में मुक्त विचरण और जनसंख्या बढ़ाने के अवसर घट गए हैं। मरुस्थलीकरण को दिल्ली-एनसीआर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए राजस्थान में बारानी जमीनों के आबंटन पर रोक लगाई गई। उपनिवेशन के सैकंड फेज में भी यही रोक। 
एक तरफ हम गरीब किसानों को अलॉट नहीं कर रहे। दूसरी तरफ मानते हैं कि अवैध कास्त नहीं होनी चाहिए। ऐसे में मेरा मानना है कि जिस तरह सोलर कंपनियों को जमीन दी जा रही है उसी तर्ज पर राजस्थान के गरीब किसानों को जमीन दी जाए। इसके साथ ही जैसे जापान में 65 प्रतिशत क्षेत्र को फॉरेस्ट एरिया के रूप में आरक्षित रखते हैं उसी तरह पश्चिमी राजस्थान में भी जमीन आरक्षित रखी जाएं।
बीठनोक के किसान को 06 लाख की जगह 50 लाख देने पड़ रहे: 
अंशुमानसिंह भाटी ने उपनिवेशन में 1970-80 के टीसी अलॉटी और भूमहीनों को आबंटन का मुद्दा जोरदार तरीके से रखा। कहा, इन्हें जमीन की खातेदारी मिली। जमीन में रहने लगे। सिंचाई सुविधा बढ़ाई। घर बनाए। कुछ ने जमीन बेच दी। यह जमीन राजस्व विभाग से उपनिवेशन विभाग में गई तो सभी को 2002 में गैर खातेदार घोषित कर दिया। आज तक ये सभी गैर खातेदार हैं। वर्ष 2007 में खातेदारी देने का आदेश हुआ। सिलिंग क्लॉज रखा गया कि 25 बीघा से अधिक जमीन हो तो डीएलसी दर अप्लाई करे। जिस व्यक्ति ने 25 साल पहले खातेदारी के पैसे भर दिए। वहां सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं है। उसकी फर्स्ट और सैकंड फेज के आम किसान से तुलना करें तो गलत होगा। 
बीठनोक गांव के उदाहरण से बात करूं तो 06 लाख में खातेदारी मिलती थी। अब डीएलसी 1.81 लाख रुपए हैं। इस लिहाज से अपनी ही जमीन की खातेदारी लेने के लिए किसान को 50 लाख से अधिक रुपए लगाने पड़ते हैं। यह सरासर गलत है। सीलिंग हटाई जाएं। इसके साथ ही किसान को 1970 की बजाय आज की इकाई के हिसाब से खातेदारी दी जाएं चाहे इसमें कोई विक्रय वाले भी शामिल हों।
म्यूटेशन करो वह भी सरल प्रक्रिया से: 
कोलोनाइजेशन के सैकंड फेज में हजारों आबंटन हुए। इसके म्यूटेशन की सरल प्रक्रिया थी उसे जटिल कर दिया। बीकानेर जिले में किसी भी प्रकार के आबंटन का इंतकाल नहीं किया गया है। मौखिक तौर पर कहा गया है कि इनका इंतकाल नहीं करें। इस कमेटी को भंग करें और जिस तरह पहले तहसीलदार, पटवारी म्यूटेशन की कार्रवाई करते थे, उसी तर्ज पर करें। स्मॉल पैच-मीडियम पैच आबंटन किसान का अधिकार है। इस पर लगी रोक हटाएं और एसडीएम और एसीसी को अधिकृत किया जाए।
रास्तों के विवाद सुलझाएं: 
रास्ते छोटे-छोटे विवाद से रोक दिए जाते हैं। स्टेट टाइम के कटान रास्तों को फिर से चालू करें। खेजड़ी-ओरण का मसला। खेजड़ी कटाई पर प्रतिबंध का स्वागत। मुख्य कड़ी राजस्व विभाग है। प्रत्येक खेजड़ी जो सोलर इलाके में उनकी जियो टैगिंग हो और खसरावार डिटेल बनें। इसी आधार पर जब नियम बनेंगे तो उनकी पालना होगी।
जैसलमेर में ओरण बाप-दादो ने सिर कटवाकर बचाई: 
जैसलमेर की ओरण भूमि आस्था से जुड़ी हुई है। हमारे बाप-दादाओं ने इसके लिए सिर कटवाएं हैं। ये जमीन बचनी चाहिए। जिस तरह अलॉटमेंट हो रहे हैं वैसे होते रहे तो अगले कुछ ही सालों मंे आबादी विस्तार के लिए भी एक बिस्वा जमीन नहंी मिलेगी!

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