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अर्जुनराम बोले—जिस वार्ड का निवासी, उसी वार्ड में मिलेगा टिकट; अपवाद में दूसरे वार्ड से भी मौका संभव

 

 

 

 

 

 

आरएनई, बीकानेर।

नगर निगम चुनाव की सरगर्मियों के बीच केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री तथा बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल को बुधवार को पत्रकारों के सवालों का सामना करना पड़ा। भाजपा के संभाग कार्यालय में हुई पत्रकार वार्ता में नगर निगम चुनाव, टिकट वितरण और बड़ी संख्या में सामने आए दावेदारों को लेकर सवाल पूछे गए।

विधायक की नाराजगी, कई बड़े नामों को दूसरे वार्डों से उतारने की तैयारी से जुड़े सवालों है के बीच केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने टिकट वितरण को लेकर पार्टी की रणनीति के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी चयन में सर्वे, स्थानीय राजनीतिक समीकरण और आपसी सहमति को आधार बनाया जाएगा। साथ ही संबंधित क्षेत्र के विधायकों और पार्टी के प्रतिनिधियों की राय को भी महत्व मिलेगा।

मेघवाल ने टिकट वितरण के एक अहम फॉर्मूले को स्पष्ट करते हुए कहा कि सामान्य तौर पर जिस वार्ड का व्यक्ति निवासी है, उसे उसी वार्ड से पार्टी का टिकट दिया जाएगा। हालांकि कुछ मामलों में अपवाद हो सकता है। यदि पार्टी की संबंधित कमेटी किसी उम्मीदवार को दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ाने का निर्णय करती है तो ऐसा भी किया जा सकता है।

वार्ड बदलकर टिकट की गुंजाइश भी :

भाजपा में टिकट के दावेदारों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या किसी मजबूत दावेदार को उसके मूल वार्ड के बजाय दूसरे वार्ड से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। मेघवाल के जवाब से संकेत मिला कि नियम वार्ड की स्थानीयता को प्राथमिकता देने का होगा, लेकिन इसे पूर्ण रूप से बाध्यकारी नहीं रखा जाएगा।

यानी पार्टी पहले उम्मीदवार की स्थानीय पकड़ और उसके निवास वाले वार्ड को प्राथमिकता देगी, लेकिन चुनावी परिस्थितियों और संगठन की राय के आधार पर कुछ मामलों में वार्ड बदला जा सकता है।

विधायकों की राय भी होगी महत्वपूर्ण :

टिकट वितरण में बीकानेर के भाजपा विधायकों की भूमिका को लेकर भी मेघवाल ने स्थिति स्पष्ट की। प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया में विधायकों सहित पार्टी के स्थानीय प्रतिनिधियों की राय को महत्व दिया जाएगा।

इससे संकेत है कि टिकट का फैसला केवल प्रदेश या केंद्रीय नेतृत्व के स्तर पर नहीं होगा, बल्कि स्थानीय राजनीतिक फीडबैक को भी चयन प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। संबंधित वार्ड में उम्मीदवार की स्थिति, संगठन में उसकी सक्रियता, स्थानीय समीकरण और चुनाव जीतने की संभावना जैसे पहलुओं पर विचार किया जाएगा।

सर्वे बताएगा किसकी जमीन मजबूत :

भाजपा के टिकट वितरण में सर्वे भी महत्वपूर्ण आधार रहेगा। बड़ी संख्या में दावेदारों के बीच पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना है कि कौन सा चेहरा वास्तव में चुनावी मैदान में मजबूत है।

ऐसे में दावेदार की व्यक्तिगत लोकप्रियता, वार्ड में पकड़, सामाजिक और राजनीतिक समीकरण तथा पार्टी संगठन के साथ उसकी सक्रियता को परखा जा सकता है। सर्वे की रिपोर्ट और स्थानीय नेताओं के फीडबैक के बीच तालमेल बनाकर नामों पर सहमति बनाने की कोशिश होगी।

80 वार्डों में टिकट, दावेदार सैकड़ों :

बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में भाजपा के टिकट के लिए बड़ी संख्या में दावेदार सामने आए हैं। ऐसे में पार्टी के सामने चुनौती केवल मजबूत उम्मीदवार चुनने की नहीं, बल्कि टिकट से वंचित होने वाले दावेदारों और उनके समर्थकों को भी साथ बनाए रखने की है।

यही वजह है कि भाजपा का संभावित फॉर्मूला "सर्वे, राजनीतिक समीकरण,  स्थानीय प्रतिनिधियों की राय, सहमति" के आसपास घूमता नजर आ रहा है।

टिकट के बाद बगावत रोकना भी चुनौती :

भाजपा के सामने असली परीक्षा टिकटों की घोषणा के बाद होगी। एक वार्ड में कई दावेदार होने की स्थिति में एक नाम पर सहमति बनने के बाद बाकी दावेदारों को साधना संगठन के लिए चुनौती रहेगा।

मेघवाल के बयान से इतना साफ है कि पार्टी स्थानीय निवासी को स्थानीय वार्ड में टिकट देने की नीति को प्राथमिकता देगी, लेकिन चुनावी परिस्थितियों में कमेटी को अपवाद का अधिकार भी रहेगा।

अब नजर इस बात पर है कि सर्वे और स्थानीय नेताओं के फीडबैक के बाद भाजपा किन चेहरों पर भरोसा करती है। क्योंकि 80 वार्डों के टिकट केवल उम्मीदवारों का चयन नहीं होंगे, बल्कि बीकानेर भाजपा के भीतर स्थानीय राजनीतिक संतुलन का भी संकेत देंगे।

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