टाउन हॉल के किराए में हजार गुना वृद्धि से कलाकार गुस्से में, साहित्य जगत का भी रंगकर्मियों को नैतिक समर्थन
अभिषेक आचार्य

RNE Special.
अचानक से बीकानेर विकास प्राधिकरण ने टाउन हॉल का किराया एक हजार गुना बढ़ा दिया। हर कोई इस निर्णय से अचंभित है। प्रदेश व देश के रंगकर्मियों में आपसी जुड़ाव है, जब ये जानकारी बीकानेर से बाहर के रंगकर्मियों के पास पहुंची तो वे सकते में आ गए। ऐसा कैसे हो सकता है, यह उनकी समझ ही नहीं आ रहा। पहले तो उनको भरोसा नहीं हुआ, बारबार कन्फर्म किया। जब कन्फर्म हो गया तो बेहद गुस्सा उनको आया। बीकानेर के जन प्रतिनिधियों व प्रशासन को उन्होंने एकमत से संवेदनहीन घोषित कर दिया।

इसमें भी एक रोचक तथ्य है। टाउन हॉल बीकानेर विकास प्राधिकरण के जिम्मे है। इसकी हालत बहुत खराब थी। न वॉश रूम सही, न मेकअप स्थान, न मंच सही तो न लाइट्स सही। सोफे और कुर्सियां भी माशाअल्लाह। रंगकर्मी, गायक, संगीतकार प्राधिकरण के अधिकारियों से सुधार व मरम्मत के लिए मिलते रहे मगर एक पैसा सुधार व साधनों के लिए खर्च नहीं किया।

हारकर रंगकर्मी अपने सांसद व केंद्रीय कानून मंत्री से मिले। उनसे टाउन हॉल की दशा सुधरवाने का आग्रह किया। तब उन्होंने अपनी सांसद निधि से 15 लाख रुपये स्वीकृत कर सुधार करवाया। रखरखाव और विकास सांसद कोटे से हुआ, विकास प्राधिकरण से नहीं। मगर किराया विकास प्राधिकरण ने बढ़ाया, वो भी हजार गुना। ये तो हद ही है।

रंगकर्मी अब सड़कों पर:
अपने अभिनय, गायन, निर्देशन, लेखन से पूरे देश में बीकानेर की साख बढ़ा पहचान बनाने वाले रंगकर्मियों को मजबूरी में अपने कलात्मक कार्यों की रिहर्सल छोड़कर सड़क पर आना पड़ा है।

सोमवार को सभी रंगकर्मी सांसद व देश के कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित प्रशासन के अधिकारियों से मिले। सांसद ने कलाकारों को भरोसा तो दिलाया है कि वे किराया पुराना कराएंगे। मगर भूखे की भूख तो रोटी मिलने के बाद ही दूर होगी।

इस मामले में यह बहुत ही चिंतनीय बात है कि विकास प्राधिकरण ने किराया बढ़ा दिया, मगर सांसद व किसी भी विधायक तक को नहीं बताया। इस जिले से राज्य सरकार में सुमित गौदारा कैबिनेट मंत्री है, मगर उनको भी इस हजार गुना किराया बढ़ोतरी का इल्म नहीं।

टाउन हॉल राजपरिवार की संपत्ति रहा है एक समय मे। ये पूरा परिसर राज परिवार का दिया हुआ है। उसी परिवार की सम्मानीय सिद्धि कुमारी अभी बीकानेर पूर्व क्षेत्र की विधायक है, मगर उनको भी पता नहीं है कि बीकानेर के कलाकारों के साथ टाउन हॉल का किराया हजार गुना बढ़ाकर अत्याचार किया गया है।
साहित्य जगत का नैतिक समर्थन:
रंगकर्मियों के किराया वृद्धि के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन का बीकानेर के साहित्य जगत ने भी नैतिक समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह बेतहाशा किराया वृद्धि अभिव्यक्ति की स्वतबत्रता पर कुठाराघात है। सरकार को अविलंब किराया वृद्धि वापस लेनी चाहिए।
साहित्यकार मधु आचार्य ' आशावादी °, कमल रंगा, बुलाकी शर्मा, ब्रजरतन जोशी, नगेन्द्र किराड़ू, बुनियाद हुसैन, जाकिर अदीब, नदीम अहमद नदीम आदि ने रंगकर्मियों के आंदोलन का समर्थन किया है।

