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Bhimsen Choudhary : जिन्होंने बीकानेर में सिर्फ उरमूल डेयरी ही शुरू नहीं की, रूस से विशेषज्ञ लाकर थर्मल प्लांट शुरू करवाया

 

हेमंत चंडीदान उज्ज्वल.

RNE Special.

’’मैं अनुभव करता हूं कि बीकानेर जिले का ग्रामीण अंचल आज भी अपने जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए संघर्ष कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, डेयरी एवं सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने से मरूधरा की जनता प्रगति  के पथ पर कदम रख सकेगी, बस यही ध्येय मेरा है’’,  लोककल्याणकारी सोच को आत्मसात किए ये शब्द पवित्रमना भीमसेन चौधरी  के ही थे, जिन्होंने जीवनपर्यन्त बीकानेर के विकास के लिए प्रयास किए और इसे मुकाम तक पहुंचाया। 

श्री चौधरी  का जन्म 5 जनवरी 1925 को बीकानेर तहसील के बंधा ग्राम में एक साधारण कृषक परिवार में हुआ। शुरूआती दौर में एक शिक्षक, फिर एक वकील, एक समाजसेवी और एक जनप्रतिनिधि, चौधरी  साब ने अपने हर रूप में आमजन के कल्याण की बात सोची और उसे लेकर जमीनी स्तर पर काम किया।  17 साल की उम्र में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेकर भीमसेन चौधरी  ने अपने जीवन को युवावस्था से ही देश सेवा के लिए समर्पित कर दिया। महात्मा गांधी के अनुयायी भीमसेन चौधरी  कर्मयोगी, कर्मठ, मृदुभाषी और किसानों तथा पिछड़ों के हमदर्द थे। 52 वर्ष के अपने सार्वजनिक जीवन में श्री भीमसेन चौधरी  व्यक्तिवाद, परिवारवाद, जातिवाद और दलीय जातिवाद से परे रहकर संपूर्ण निष्ठा से बीकानेर के सर्वागीण विकास के लिए समर्पित और किसानों, दीन-दुःखियों व मानवता की सेवा के लिए प्रतिपल कटिबद्ध व संघर्षरत रहे। मानव सेवा के साथ-साथ उन्होंने राजस्थान विधानसभा में पशु बलि पर रोक संबंधी विधेयक पारित करवाया। इसी कारण इन्हें इस क्षेत्र का गांधी भी कहकर अपना सम्मान प्रकट करते है। 

भारत छोड़ो आंदोलन से राजस्थान के मंत्री तक :

भारत छोड़ो आंदोलन 1942 में भाग लेकर अपने सार्वजनिक जीवन की शुरूआत करने वाले स्वर्गीय भीमसेन चौधरी  ऊर्जावान व्यक्तित्व एवं कृतित्व के धनी थे। राजनीतिक क्षेत्र में सक्रियता के चलते जननायक भीमसेन चौधरी   वर्ष 1953 में बीकानेर तहसील के प्रथम सरपंच चुने गए और इसी साल उन्हें 1953 में स्टेट स्क्रूटनी कमेटी एण्ड स्टेट इलेक्शन ट्रिब्युनल का अध्यक्ष चुन लिया गया। 1956 तक इस पद पर सफलतपूर्वक कार्य करने के बाद चौधरी  साब को बीकानेर जिला बोर्ड का प्रथम अध्यक्ष बनाया गया। वर्ष 1957 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भीमसेन चौधरी  को लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र से अपना उम्मीदवार बनाया और वे विजयी रहे। बीकानेर जिला बोर्ड का अध्यक्ष पद पर वर्ष 1959 तक कार्य करने के बाद चौधरी  साब बीकानेर के प्रथम जिला प्रमुख बने। 1962 के विधानसभा चुनाव में भीमसेन चौधरी  फिर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव जीते। उन्होंने 1957 से लेकर 1977 तक और 1993 से मृत्युपर्यन्त लूणकरणसर विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 1967 से 1971 के बीच उन्होंने राज्य के खनिज एवं उद्योग मंत्री के रूप में भी कार्य किया। 1972 से 1973 तक चौधरी  साब बीकानेर उरमूल डेयरी के संस्थापक अध्यक्ष रहे और पशुपालकों के उत्थान में अभूतपूर्व योगदान दिया। वे राजस्थान सरकार सरकार में गृह समिति के सभापति, अधीनस्थ विधान संबंधी समिति के सदस्य, भूमि विकास बैंक के निदेशक, भारत  कृषक समाज के संयोजक भी रहे। 

केंद्र से लाए कंवरसेन लिफ्ट की मंजूरी ; 

जननायक भीमसेन चौधरी  को धोरों की धरती बीकानेर में हरित क्रांति का प्रणेता कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। चौधरी  साब ने जिले के ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल के गंभीर संकट को 1965 में केन्द्र सरकार से बजट आबंटित करवाकर राजस्थान नहर से कंवरसेन लिफ्ट योजना मंजूर करवाई, जिससे जनता को पेयजल के साथ-साथ खेतों में सिंचाई के लिए भी भरपूर पानी मिला। कंवरसेन लिफ्ट परियोजना से निकली नहरों से खेतों में पानी पहुंचा और बीकानेर के एक बड़े भूभाग में अकाल की त्रासदी से मुक्ति मिल पाई। नतीजन लूणकरणसर मंडी को मूंगफली उत्पादन को एशिया की सबसे बड़ी मंडी के रूप में पहचान मिली। 

यूं गांव-गांव में पहुंचा दी सरकार : 

बीकानेर के ग्रामीण विकास के लिए उरमूल डेयरी ट्रस्ट की स्थापना से लेकर सड़क, कृषि उपज मंडी, सहकारी समितियों, भूमि विकास बैंक, ग्रामीण बैंक की स्थापना, बिजली, पानी स्वास्थ्य केन्द्र, पशु चिकित्सा केन्द्र, डाक सेवा, दूरसंचार सेवा तथा यातायात सुविधाएं उपलब्ध करवाने में भीमसेन चौधरी  से महती भूमिका निभाई। पूगल को राजस्व तहसील, खाजूवाला को उपखण्ड कार्यालय तथा छतरगढ़ को राजस्व तहसील घोषित करवाकर लोगों को शीघ्र एवं सस्ता न्याय दिलवाने से लेकर भूमिहीन पाक विस्थापितों को निःशुल्क रिहायशी भूखण्ड आबंटित करवाकर चौधरी  साब ग्रामीण विकास के प्रेरक कहलाए। 

Russia की एक्सपर्ट टीम बुलाई : 

बीकानेर जिले के पलाना में थर्मल पावर प्लांट लगवाने के लिए सोवियस रूस की तकनीकी टीम से सर्वेक्षण करवाने, जिले के लिए पेयजल प्रोजेक्ट स्वीकृत करवाने, नोखा सुजानगढ़ हाईवे तथा मेडिकल काॅलेज, पाॅलीटेक्निक काॅलेज की स्थापना के साथ-साथ डूंगर काॅलेज की नई बिल्डिंग बनवाने की स्वीकृति दिलाने, सिरेमिक उद्योग को बढ़ावा देने में भीमसेन चौधरी  ने एक जननायक की भूमिका निभाई। 

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भीमसेन चौधरी यानी प्रतिबद्ध कांग्रेस : 

महात्मा गांधी के आदर्शों पर चलने वाले स्वर्गीय भीमसेन चौधरी  जीवन पर्यन्त भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े रहे। पश्चिमी राजस्थान के तत्कालीन कांग्रेस नेताओं में इनका नाम प्रथम पंक्ति में लिया जाता है। कांग्रेस पार्टी से उनका रिश्ता आजादी से पहले ही जुड़ गया। चौधरी  साब 1948 से 1952 तक जिला कांग्रेस कमेटी के प्रधानमंत्री (महासचिव), 1962 से 1972 तक जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष, 1972 से 1977 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव, 1983 से 1992 तक कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष तथा 1992 से मृत्युपर्यन्त प्रकोष्ठ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष पद पर रहे। कांग्रेस पार्टी के नियमों और सिद्धांतों को अक्षरशः चलने की बदौलत वर्ष 1995 में भीमसेन चौधरी  को राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति का संयोजक बनाया गया। इस पद पर उन्होंने वर्ष 1999 तक सफलतापूर्वक काम किया।

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