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Bikaner : पुष्करणा स्टेडियम में सजा ऐसा मेला, जहां कारोबार के साथ दिखा महिलाओं का आत्मविश्वास

 

 

Rudra News Express, Bikaner

पुष्करणा समाज की महिलाओं की स्किल, हुनर और आत्मविश्वास देखना है तो एक बार बीकानेर के पुष्करणा स्टेडियम का रुख जरूर कीजिए। आमतौर पर खेल और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए पहचाने जाने वाला यह स्टेडियम इन दिनों महिला उद्यमिता की एक ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जो समाज की बदलती सोच और महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास की कहानी कह रही है।

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यहां चल रहे पुष्करणा मेले की पूरी कमान महिलाओं के हाथों में है। मेले में महिलाएं केवल स्टॉल लगाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपने हुनर को कारोबार का रूप देकर बाजार के बीच खड़ी दिखाई दे रही हैं। राखी से लेकर साड़ी तक, मिठाई से लेकर ऑटोमोबाइल तक, कॉस्मेटिक्स से लेकर अचार तक और बेकरी से लेकर बुटीक क्रिएशन तक—एक ही परिसर में महिला प्रतिभा के दर्जनों रंग नजर आ रहे हैं।

सबसे खास बात इन स्टॉलों पर सजा सामान नहीं, बल्कि उसे आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करती महिलाओं के चेहरे हैं। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित मानी जाने वाली प्रतिभाएं अब ग्राहकों से सीधे संवाद कर रही हैं, अपने उत्पाद समझा रही हैं और अपने काम को पहचान दिलाने के लिए मैदान में उतरी हैं।

कारोबार के साथ संस्कृति का रंग : 

पुष्करणा मेला सिर्फ खरीदारी का मंच नहीं है। यहां हर दिन गीत-संगीत की महफिल भी सज रही है। लोकधुनों के बीच महिलाओं की मंडली जब सुर छेड़ती है तो पूरा माहौल जीवंत हो उठता है। लोक संस्कृति की मिठास के साथ खरीदारों और मेले में आने वाले लोगों का स्वागत करते हुए आवाज गूंजती है—“आवो नी पधारो म्हारे देस...” शनिवार को भी महिला मंडली ने गीत-संगीत की संगत जमाई। देखते ही देखते मेले का माहौल मनोरंजन, संस्कृति और उत्साह से भर उठा। शर्मिला व्यास, किसना बोहरा, लक्ष्मी, मंगला बोहरा, सुमन पुरोहित, पूनम व्यास, विजयलक्ष्मी बिस्सा आदि महिलाओं ने खरीददारी के इस मेले में सांस्कृतिक रंग भरे। 

महिलाओं का हौसला बढ़ाने पहुंचे सामाजिक प्रतिनिधि : 

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मेले में महिलाओं की मेहनत और पहल को प्रोत्साहित करने के लिए भाजपा नेता डॉ. सत्यप्रकाश आचार्य, उद्यमी वीरेंद्र किराडू, समाजसेवी एवं नगर निगम के सेवानिवृत्त स्वास्थ्य अधिकारी अनिल आचार्य, भाजपा नेता आनंद व्यास, साहित्यकार एवं राष्ट्रवादी विचारक भाजपा नेत्री सुधा आचार्य, भाजपा नेता गोकुल जोशी, रूपा महाराज सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि पहुंचे। उन्होंने महिला उद्यमियों से मुलाकात की, उनके काम को देखा और उनका उत्साह बढ़ाया।

सामाजिक प्रतिनिधियों का कहना था कि पुष्करणा समाज की महिलाओं ने अपनी प्रतिभा, पहल और लगन से यह साबित किया है कि उन्हें अवसर मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं रहेंगी।

यह सिर्फ मेला नहीं, बदलाव की दस्तक है : 

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पुष्करणा स्टेडियम में सजा यह मेला दरअसल एक बड़े सामाजिक बदलाव की तस्वीर भी पेश कर रहा है। यह उन महिलाओं की कहानी है, जिन्होंने अपने हुनर को पहचाना, उसे कारोबार में बदला और अब समाज के सामने आत्मविश्वास के साथ खड़ी हैं। यहां हर स्टॉल एक कहानी कह रहा है—किसी के संघर्ष की, किसी के सपने की, किसी के हुनर की और किसी के नए सफर की। पुष्करणा समाज की महिलाओं ने मैदान में उतरकर सिर्फ उत्पाद नहीं सजाए हैं, उन्होंने अपने आत्मविश्वास की नई तस्वीर भी सामने रखी है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस तस्वीर को देखकर पूरा समाज उनके साथ खड़ा नजर आ रहा है।

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जानिए कब से कब तक मेला, क्या आयोजन : 

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22 से 26 अगस्त तक चलेगा पुष्करणा मेल। 
22 को दोपहर में पारंपरिक गीतों का आयोजन हुआ वहीं रात को शैक्षणिक संस्थाओं का सम्मान होगा। 
23 को दोपहर में रंगोली प्रतियोगिता और रात को हास्य कवि सम्मेलन। 
24 दोपहर में मेहंदी मांडणा और रात को साहित्यकारों-पत्रकारों का सम्मान। 
25 को पारंपरिक वेशभूषा प्रतियोगिता और रात को अधिवक्ता सम्मेलन। 
26 को दिन में पारंपरिक नृत्य और रात वेद पाठ, सामूहिक भजन संध्या।

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