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Bikaner : BJP को वैश्य, Congres को मुस्लिम समुदाय ने दिखाई आंख, दोनों दल डेमेज कंट्रोल में जुटे

बीजेपी ने रांका व अशोक भाटी का टिकट काट दिया, कांग्रेस ने आखिर खेल ही दिया कल्ला परिवार पर दाव
 

अब कम हो गए दोनों तरफ मेयर के दावेदार, भाजपा को वैश्य तो कांग्रेस को मुस्लिम समुदाय ने दिखाई आंख


 

मधु आचार्य ' आशावादी '

नगर निगम की चुनावी चौसर अब बिछ गई और मोहरों ने उस पर कदमताल करना भी शुरू कर दिया। नामांकन के अंतिम दिन कल सोमवार को दोनों पार्टियों में बड़े उथल पुथल हुए। इस एक्टिविटी ने एकबारगी तो मेयर के चुनाव की गणित को पूरी तरह से बदल के रख दिया है।

आरम्भ में भाजपा में मेयर पद के काफी दावेदार माने जा रहे थे, मगर उनमें से कइयों की तो पार्टी ने ही करीने से छंटाई कर दी। पता ही नहीं चला कि उन दावेदारों को हाशिये पर किसने धकेल दिया। ये भी रोचक बात किसी भरोसे के नेता ने बताई कि कुछ दावेदारों को निपटाने की स्क्रिप्ट तो टिकट देने और नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही लिख ली गयी थी। उस स्क्रिप्ट को मंचित नामांकन के अंतिम दिन कल 31 अगस्त को किया गया। हालांकि इस उलटफेर से भाजपा को नुकसान होगा, उसके दायरे का अंदाजा शायद पार्टी नेतृत्त्व ने नहीं किया है।

ठीक इसी तरह कांग्रेस में भी संगठन के कमजोर नेतृत्त्व के कारण कोर वोटर मुस्लिम भी नाराज हो गया है। संगठन व नेताओं ने इस बात का अंदाजा ही नहीं किया कि मुस्लिम समाज को नाराज करना कांग्रेस को कितना भारी पड़ेगा। संगठन ने ही पार्टी को रिस्क में डाल दिया। यह स्थिति देहात में नहीं बनी, वहां संगठन ने नेताओं व जातीय समीकरणों से तालमेल किया, वो सही रहा। शहर कांग्रेस संगठन इसमें विफल रहा। भाजपा को वैश्य समाज ने तो कांग्रेस को कई वार्डों में बागी बन उतर के मुस्लिम समुदाय ने आंख दिखाई है। दोनों पार्टियां यह डेमेज कंट्रोल कैसे करेगी, देखने की बात होगी। जो कर जाएगा, वह आगे निकल जायेगा।

भाजपा का हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा : 

भाजपा में बीकानेर नगर निगम चुनाव को लेकर हाई वोल्टेज पॉलिटिकल ड्रामा चला। महावीर रांका को स्वाभाविक रूप से मेयर का दावेदार माना गया और उसी तामझाम से कल दिन में नामांकन भी कराया गया। रांका ने भी अपने को मेयर मान ही लिया और मीडिया को उसी अंदाज में सवालों के जवाब दिए, उनके जवाबों से लगा कि वे अति यानी ओवरकॉन्फिडेंस में बोल रहे हैं। मगर पिक्चर अभी बाकी थी।

स्क्रिप्ट पहले से तैयार, कैसे अनजान रहे :

इस पिक्चर का शो 30 अगस्त को रात 1.10 बजे आरम्भ हो चुका था और उसका क्लाइमेक्स कल दोपहर 3 बजे सामने आया। जब विशाल गोलछा ने नामांकन पत्र लिया। जो 5 बजे से थोड़ा पहले जमा हुआ। हाई वोल्टेज ड्रामे के साथ रांका का टिकट कट गया और गोलछा को मिल गया। इसकी भनक इक्का दुक्का भाजपा नेताओं व एक - दो पत्रकारों को ही थी। अभी कयास लग रहे हैं, सच सामने आना बाकी है।
मेयर पद के दूसरे दावेदार ओबीसी की बात पुख्तगी से रखने वाले अशोक भाटी थे। पार्टी में वे विद्यार्थी परिषद के समय से सक्रिय हैं। उन्होंने भी पूरी उम्मीद के साथ अपने लिए टिकट मांगा। मगर उनको तो पहले ही हिट विकेट कर दिया गया पार्टी द्वारा। बेदर्दी से उनका तो टिकट ही काट दिया। दूसरे अर्थों में ठीक ही रहा। पहले देते और बाद में काटते तो मलाल ज्यादा होता उनके शुभचिंतकों को। अब टिकट न मिलने की कड़वाहट है, शर्मिंदगी नहीं।

अब भाजपा में ये बच गए दावेदार :

भाजपा में अब मेयर पद के दावेदार कम रह गए हैं। यदि पार्टी अपने स्वभाव के अनुसार ओबीसी पर दाव लगाती है तो अशोक प्रजापत बचे हैं। यदि राजपूत समाज को साधना चाहती है तो सुरेंद्र सिंह शेखावत, भगवान सिंह मेड़तिया व श्याम सिंह हाडला बचते हैं। इनके अलावा मधु सुराणा, दीपक पारीक, सुशीला कंवर राजपुरोहित ही दावेदार बची है।
 

कांग्रेस में कल हुआ पॉलिटिकल ड्रामा : 

कांग्रेस में नामांकन के अंतिम दिन कल बड़ा पॉलिटकल ड्रामा हाई वोल्टेज का हुआ। चुनाव में अचानक से पूर्व मंत्री बी डी कल्ला के परिवार की एंट्री हुई। पहले उनके एक भतीजे महेंद्र कल्ला का नाम सामने आया, मगर उन्होंने 3 दिन बाद ही कह दिया वे नहीं लड़ रहे। तब लगा इस परिवार से कोई चुनावी समर में नहीं उतरेगा। मगर कल अचानक से कांग्रेस में 3 दशक से सक्रिय व राजीव यूथ क्लब के माध्यम से सामाजिक व राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय अनिल कल्ला ने वार्ड 73 से नामांकन दाखिल कर दिया। वहीं पूर्व मेयर, पूर्व न्यास अध्यक्ष मकसूद अहमद ने भी कल नामांकन दाखिल किया। ये बड़ी घटनाएं थी।


कल्ला परिवार से उतरे अनिल कल्ला ने कोई आसान सीट नहीं चुनी, अपने ही घर के पास का वो वार्ड चुना जिससे भाजपा के मेयर के दावेदार दीपक पारीक लड़ रहे हैं। कल्ला का यह चुनाव मैसेज देने में कामयाब रहा है कि नई पीढ़ी भी आसान रास्ता नहीं चुन रही, संघर्ष चुना है। भाजपा की यह सीट अब फंसती नजर आ रही है। अब कांग्रेस में स्वाभाविक रूप से युवा अनिल कल्ला, मकसूद अहमद, धर्मवीर नाहटा ' वीरू ', जावेद पड़िहार, संजय आचार्य को दावेदार माना जा रहा है।
 

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