Bikaner Deputy Mayor Election : कांग्रेस में फुट-नसीमा बानो प्रत्याशी, जावेद परिहार, मनोज बिश्नोई, सपना मारू का भी नामांकन
Bikaner Deputy Mayor Election : कांग्रेस के चार नामांकन से बढ़ी हलचल, भाजपा ने पंकज गहलोत को उतारा; नाम वापसी तक तस्वीर साफ होने की उम्मीद
Rudra News Express, Bikaner.
बीकानेर नगर निगम में महापौर चुनाव में 50 वोट हासिल कर कांग्रेस के अनिल कल्ला के महापौर बनने के अगले ही दिन उप महापौर चुनाव को लेकर पार्टी के भीतर नई हलचल सामने आ गई है। कांग्रेस ने वार्ड 66 की पार्षद नसीमा बानो को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है, लेकिन उनके अलावा कांग्रेस से जावेद परिहार, मनोज बिश्नोई और सपना मारू ने भी नामांकन दाखिल किया है।
एक ही पार्टी से चार नामांकन सामने आने के बाद उप महापौर चुनाव को लेकर कांग्रेस के भीतर खींचतान की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि नाम वापसी की समय सीमा दोपहर 2 बजे तक है, इसलिए अंतिम मुकाबले की तस्वीर इसके बाद ही स्पष्ट होगी।
नसीमा बानो वार्ड 66 से कांग्रेस की पार्षद चुनी गई हैं। उन्होंने भाजपा की मोहनी देवी को पराजित किया था। पार्टी ने अब उन्हें उप महापौर पद के लिए अधिकृत प्रत्याशी बनाया है।
दूसरी ओर भाजपा ने वार्ड 51 के पार्षद पंकज गहलोत को अपना प्रत्याशी बनाया है। गहलोत ने वार्ड चुनाव में कांग्रेस के महेंद्र सिंह को हराकर निगम में प्रवेश किया था।
मेयर चुनाव के नतीजे से अलग दिखा संख्याबल :
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में कांग्रेस के 42, भाजपा के 27, निर्दलीय 10 और RLP का एक पार्षद है। मेयर चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला को 50 वोट मिले, जबकि भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले।
इस परिणाम में कांग्रेस को अपने 42 पार्षदों से 8 अधिक वोट मिले थे। अब उप महापौर चुनाव में कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि उसके अधिकृत प्रत्याशी के पक्ष में पार्टी का पूरा संख्याबल किस तरह एकजुट रहता है।
चार नामांकन ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल :
कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी के अलावा तीन और नामांकन सामने आने से फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नाम वापसी के बाद मैदान में कितने प्रत्याशी रहेंगे। यदि अन्य तीन प्रत्याशी नाम वापस लेते हैं तो मुकाबला कांग्रेस की नसीमा बानो और भाजपा के पंकज गहलोत के बीच रह जाएगा। वहीं यदि कांग्रेस के एक से अधिक प्रत्याशी मैदान में रहते हैं, तो कांग्रेस के वोटों का विभाजन होने की स्थिति बन सकती है। ऐसी स्थिति में निर्दलीय और RLP पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिलहाल कांग्रेस नेता नाम वापसी की समय सीमा तक तस्वीर साफ होने को लेकर आश्वस्त बताए जा रहे हैं। इसलिए उप महापौर चुनाव का वास्तविक मुकाबला नाम वापसी के बाद ही स्पष्ट होगा।

