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बीकानेर गोचर आंदोलन: 27 से बड़े आंदोलन का ऐलान, सीएम से मिलकर भाजपा ने कहा-हो गया समाधान

 

RNE Bikaner.
 

बीकानेर में गोचर बचाने के मुद्दे पर अब बड़ा राजनीतिक घमासाान शुरू हो गया है। एक ओर संत सरजूदास महाराज की अगुवाई में 27 जनवरी से अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा होने से माहौल गरमाया है वहीं पूर्वमंत्री बी.डी.कल्ला इस मुद्दे पर खुलकर सामने आए हैं। भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कल्ला गोपाष्टमी के दिन धरना भी दे चुके हैं। इसके साथ ही जब उन पर अरोप लगा कि गोचर भूमि में यूनिवर्सिटी बनवाने में उनका हाथ था तो उन्होंने भाजपा पर पलटवार किया और साफ किया यूनिवर्सिटी बनवाने का प्रयास मेरा है लेकिन उसका भवन गोचर भूमि में भाजपा कार्यकाल में बना।
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इन सबके बीच भाजपा लगातार जब बैकफुट पर आती नजर आई तो अब तुरूप का पत्ता चलते हुए पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष और नोखा से विधायक रहे बिहारीलाल बिश्नोई आगे आए हैं। वे बीकानेर जिले के तीन भाजपा विधायकों विश्वनाथ मेघवाल, अंशुमानसिंह भाटी और ताराचंद सारस्वत के साथ सीएम भजनलाल से मिले। इस उच्चस्तरीय मीटिंग में पब्बाराम बिश्नोई, जसवंत बिश्नोई भी साथ रहे। ऐसे में मुद्दा रहा गोचर के साथ ही खेजड़ी बचाना। 
 

इस मीटिंग के बाद बीकानेर आकर बिहारीलाल बिश्नोई एवं भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री भजनलाल ने स्पष्ट कर दिया है कि गोचर का कोई भू-उपयोग परिवर्तन नहीं होगा। वह भूमि गोचर के ही काम आएगी। 

यहां एक हैरान करने वाली बात यह है कि बीकानेर शहर से सटती जिस गोचर को बचाने के लिए हाई लेवल मीटिंग हुई उसमंे बीकानेर शहर के दोनों भाजपा विधायक जेठानंद व्यास और सिद्धीकुमारी मौजूद नहीं रहे। अलबत्ता बीकानेर आने के बाद जब भाजपा नेताओं ने प्रेस को मीटिंग का ब्यौरा दिया उसमें जरूर ये दोनों विधायक सामने आए।

ऐसे में अब एक ओर जहां गोचर बचाओ आंदोलन तेजी पकड़ रहा है और मोहल्लों-गलियों मंे जनसंपर्क किया जा रहा है वहीं इस पर राजनीतिक घमासान भी तेज हो गया है। दरअसल यह पूरा मसला तब गरमाया जब बीकानेर विकास प्राधिकरण यानी बीडीए ने बीकानेर शहर से सटती गोचर भूमि का मास्टर प्लान में व्यावसायिक के रूप में परिवर्तन दर्शा दिया। हालांकि यह मुद्दा उठने के बाद जमीन के कारोबार से जुड़े लोगों में भी बड़ी हलचल दिख रही है। बढ़ते हुए बीकानेर में रियल एस्टेट के फैलते कारोबार में भी बीकानेर के ‘जमीन से जुड़े नेता’ भी शामिल हैं। ऐसे मंे मुद्दे की तह तह पहुंचना और इसमें गौमाता सहित सर्वहित तलाशने के लिए बड़ी कवायद की जरूरत भी महसूस होती है।

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