बीकानेर पूरे देश के सामने हो रहा शर्मसार, एक हजार गुना किराया याद दिला रहा ओरंगजेब की
केंद्रीय मंत्री की बात तो सुनते अफ़सर
अभिषेक आचार्य

RNE Special.
' हो गयी है पीर पर्वत सी, अब पिघलनी चाहिए
इस हिमालय से अब कोई गंगा निकलनी चाहिए '
दुःख से कातर होकर स्व दुष्यंत ने शायद ये शेर लिखा था। पीड़ जब पर्वत के समान बड़ी हो जाती है तो फिर व्यक्ति धीरे धीरे उसके सामने छोटा होता जाता है। स्थिति तब और भी विकट हो जाती है जब समस्या रूपी पहाड़ उसके संघर्ष को चिथड़े चिथड़े करके बिखेर देता है तो व्यक्ति पूरी तरह से टूट जाता है। अपने को असहाय समझने लगता है और पत्ते भी उसका सिरहाना छोड़कर उड़ने लगते हैं।

बीकानेर नगर विकास न्यास को प्रमोट करके राज्य सरकार ने बीकानेर विकास प्राधिकरण बनाया। पूरी जनता खुस हुई। शहर के विकास को पंख लगने की संभावना बनी। कलाकार ज्यादा खुश हुए। उनके दो तीर्थ स्थल है बीकानेर में। पहला टाउन हॉल व दूसरा रवींद्र रंगमंच। उनको लगा कि इनके दिन भी फिरेंगे। सुविधाएं, साधन बढ़ेंगे और किराया कम होगा ताकि हर कलाकार को इसकी सुविधा मिल सके।

यह सोचना गैरवाजिब भी नहीं था। हर सरकार का पहला धर्म होता है संस्कृति की रक्षा व उसको संरक्षण। संस्कृति के उपादान कभी भी राज की कमाई के साधन नहीं होते। यह तो हर लोक कल्याण कारी राज्य की मूल अवधारणा है।
अचानक गिर गयी गाज:
कलाकारों की हंशी खुशी तो अचानक से काफूर हो गयी। उनकी आशाओं पर तो गाज गिर गयी। प्राधिकरण ने अचानक से टाउन हॉल का किराया एक साथ एक हजार गुना बढ़ा दिया। यह कलाकारों को नहीं अपितु भारतीय संस्कृति को बड़ा धक्का था। बड़ा हादसा था।

हादसा इस वजह से कि जिस टाउन हॉल को सांसद व केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने अपनी सांसद निधि से दुरस्त कराया, उसी का अधिकारियों ने किराया बढा दिया। यह मंत्री के साथ, सांसद के साथ प्राधिकरण की धोखाधड़ी है।
देश के सामने बीकानेर शर्मसार:
प्राधिकरण के इस अविवेकी निर्णय से बीकानेर जो उत्तर भारत की नाट्य राजधानी है, पूरे देश के सामने शर्मसार हुई है। हर कोई किराये में इतनी वृद्धि देखकर चकित है। वो भी देश के लोकप्रिय सांसद व मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के क्षेत्र में। शर्मसार करा दिया प्राधिकरण के अधिकारियों ने। जरा तो हमारे शहर की सोचते, हमारे देश मे लोकप्रिय सांसद व मंत्री की सोचते, आपने तो जरा सा भी नहीं सोचा। शेम !
मजबूरी अब नरेंद्र ऑडिटोरियम की:
बीकानेर की प्रज्ञा का केंद्र नागरी भंडार रहा है। साहित्यिक गतिविधियों का प्रतिष्ठित केंद्र। अब यही रंगमंच की गतिविधियों का केंद्र बन रहा है। इसका नरेंद्र सिंह ऑडिटोरियम अब कलाकार लेने लगे हैं क्योंकि संस्था का ध्येय प्राधिकरण की तरह कमाई नहीं है। कलाओं को पोषित करना है।

केंद्रीय मंत्री की भी नहीं सुनी:
केंद्रीय कानून मंत्री व हमारे सांसद अर्जुनराम मेघवाल, भाजपा नेता रविशेखर मेघवाल ने भी प्रशासन को किराए पर विचार कर वापस कम करने का कहा मगर अधिकारियों पर असर नहीं हुआ।
संभागीय आयुक्त हुए सक्रिय:
इस मसले पर अब संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा भी सक्रिय हुए हैं। कलाकारों के साथ खड़े हुए हैं और उन्होंने जिला कलेक्टर को समिति की बैठक कर किराये पर विचार करके कम करने का कहा है। कलाकारों को अब संभागीय आयुक्त से बड़ी उम्मीद है। वे स्वभाव के अनुसार निराश नहीं करेंगे।

