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Bikaner Nagar Nigam : निर्दलीय बनेंगे मेयर की चाबी? भाजपा-कांग्रेस गैरदलीय मजबूत पार्षदों की टोह ले रहे!

अनुमानों में बता रहे कांग्रेस की अधिक सीटें, वहीं भाजपा का अपना आगे रहने का दावा
 

नगर निगम के 79 वार्ड में मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गयी। भाजपा एक वार्ड पहले ही निर्विरोध जीत चुकी है। अब मेयर के चुनाव के लिए अंदरखाने रस्साकस्सी शुरू हो गयी है। राजनीतिक विश्लेषकों व सट्टा बाजार के अनुसार दोनों ही दल बहुमत के आंकड़े को छू नहीं सकेंगे, मगर कांग्रेस निगम में सबसे बड़ा दल बनेगी। भाजपा इस तर्क को मानने के लिए तैयार नहीं, उसका कहना है कि पार्टी को बहुमत मिलेगा। मेयर के लिए काउंटडाउन शुरू हो चुका है।


मधु आचार्य ' आशावादी '

बीकानेर नगर निगम के 79 वार्ड के लिए कल मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गयी। छुटपुट घटनाओं के अलावा मतदान शांतिपूर्ण रहा। हालांकि मतदान प्रतिशत अधिक नहीं रहा। निकाय चुनाव को देखते हुए यह माना जाना चाहिए कि यह प्रतिशत कम है। चूंकि छोटा क्षेत्र होता है इस कारण उम्मीद की जाती है कि 80 प्रतिशत से अधिक मतदान होगा, मगर 70 तक भी वो कल शाम 6  बजे तक नहीं पहुंच पाया।

80 का नगर निगम का बोर्ड है और उसमें बहुमत के लिए 41 पार्षद चाहिए। 41 पार्षद होने पर ही मेयर का पद जीता जा सकेगा। इस 41 के जादुई आंकड़े को पाने के लिए अब भाजपा व कांग्रेस रणनीति बनाने के लिए जुट गए हैं। हालांकि दोनों ही तरफ से अभी तक मेयर के लिए कोई उम्मीदवार संभावित के रूप में भी सामने नहीं आया है।

जाहिर है, अभी मतगणना 14 सितम्बर को है, तब तक एक रणनीति को अमलीजामा पहनाया जाना जरूरी है। जो कोई दोनों ही दलों में मेयर का उम्मीदवार बनेगा, उसे ही सारे प्रबन्ध करने होंगे। बाड़ेबंदी है, यदि जादुई आंकड़े में कुछ पार्षद घटते हों तो उनकी व्यवस्था है। यह तभी कोई करेगा, जब उसे मेयर उम्मीदवार बनाया जाना पार्टियां तय करेगी।

निर्दलीयों की संख्या अधिक होने का अनुमान :

एक अनुमान के अनुसार इस बार निर्दलीय उम्मीदवार भी अच्छी संख्या में चुनाव जीतेंगे। इनके अलावा कुछ वार्ड आरएलपी व बसपा के हाथ भी आ सकते हैं। इसी कारण तो किसी भी दल को निगम में स्पष्ट बहुमत मिलता नजर नहीं आ रहा है। निर्दलीय उम्मीदवार ही अधिकतर वार्डों में हार - जीत का समीकरण उलट गए हैं, जिसकी वजह से ही दोनों दलों को बहुमत के लिए हाथ पैर मारने पड़ रहे हैं।

जो दल निर्दलीयों को जितना अपने साथ लाने में सफल रहेगा, वही दल मेयर की कुर्सी के निकट पहुंचेगा। आरएलपी व बसपा से कांग्रेस को काफी उम्मीद है। वहीं भाजपा के पास राज्य सरकार है तो वो निर्दलीयों को अपने पाले में लाने की पूरी ताकत झोंकेंगी। अब दोनों दलों में से जो पहले प्रबन्ध कर जायेगा, वह आगे निकल जायेगा।

मेघवाल व कल्ला पर दारोमदार : 

मेयर के लिए भाजपा जहां केंद्रीय कानून मंत्री व सांसद अर्जुनराम मेघवाल पर निर्भर रहेगी, वहीं कांग्रेस दिग्गज नेता व पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला के भरोसे रहेगी। निगम चुनाव में टिकट वितरण की प्रक्रिया में कानून मंत्री मेघवाल की बड़ी भूमिका रही है। इसके अलावा कंट्रोवर्सी की स्थितियों को भी उन्होंने ही हल किया है। जाहिर है, पिछली बार की तरह इस बार भी मेयर बनाने की जिम्मेवारी उनको ही मिल सकती है। हालांकि भाजपा ने अभी तक कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है।

वहीं कांग्रेस तो दिग्गज नेता डॉ बी डी कल्ला के भरोसे ही अपनी नाव मंझधार से निकालने की उम्मीद करेगी। डॉ कल्ला का हालांकि बीकानेर पश्चिम विधानसभा सीट के वार्डों में ही टिकट वितरण का काम रहा। पूर्व में उनका दखल नहीं था। मगर कांग्रेस की तरफ से कल्ला ही ऐसे नेता थे, जिन्होंने पूरे दिन, पूरी रात पश्चिम व पूर्व के वार्डों में कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे। उनके बाद सर्वाधिक सक्रिय शहर कांग्रेस अध्यक्ष मदन मेघवाल थे।

अब मेयर के लिए अच्छी खींचतान होगी, जादुई आंकड़ा मिलता किसी भी दल को दिख नहीं रहा। अभी तक विधिवत रूप से भाजपा व कांग्रेस ने मेयर बनाने की किसी भी नेता को जिम्मेदारी भी नहीं दी है। आज हो सकता है इन सब बातों पर दोनों दल निर्णय कर लें।

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