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Bikaner: वैश्विक दौर में प्रेमचंद की प्रासंगिकता ' पर परिसंवाद का आयोजन

 

RNE Bikaner.

उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 125 वीं जयंती लक्ष्मीनारायण रंगा सृजन सदन में आयोजित की गई। इस अवसर पर ' वैश्विक दौर में प्रेमचंद की प्रासंगिकता ' विषयक पतिसंवाद का भी आयोजन किया गया। संस्थान के राजेश रंगा ने बताया कि आयोजन बच्चों को समर्पित रहा।
 

राजेश रंगा ने बताया कि आयोजन में बच्चों ने प्रेमचंद की कहानी ' ईदगाह ' के नाट्य रूपांतर का वाचन किया। जिसके माध्यम से बाल मन की संवेदनाओं एवं रिश्तों के मिठास के महत्त्व को बच्चों को समझाया गया।
 

परिसंवाद के विषय पर बोलते हुए कवि, कथाकार कमल रंगा ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद उर्दू व हिंदी के महान गद्यकार थे। उनका सम्पूर्ण साहित्य मानवीय चेतना, सामाजिक विडम्बनाओं से मुठभेड़ कर मानवीय संवेदनाओं की सूक्ष्म पड़ताल का रहा। रंगा ने कहा कि प्रेमचंद की प्रासंगिकता आज के वैश्विक दौर में उतनी ही है, जितनी पहले थी। परिसंवाद में कासिम बीकानेरी, गिरिराज पारीक, भवानी सिंह राठौड़, महावीर स्वामी, हरिनारायण आचार्य, हेमलता व्यास आदि ने भी विचार व्यक्त किये। धन्यवाद आशीष रंगा ने ज्ञापित किया।

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