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Bikaner : वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार रजनी रमण शर्मा का निधन, साहित्य और रंगकर्म जगत में शोक की लहर

 

 


RNE Bikaner

रजनी रमण शर्मा ने
जब लिखना शुरू किया तो कविता, कहानी, समीक्षा और आलेख में उनका नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाने लगा। जब रंगकर्म में उतरे तो निर्देशन और अभिनय में इतनी महारथ हासिल किया कि विशेषज्ञों की श्रेणी में आ गए। पत्रकारिता में उतरे तो प्रिंट मीडिया से लेकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया तक छा गए। पौराणिक श्रृंगार में देशकाल की इतनी समझ कि उनके द्वारा किए गए श्रृंगार में वह काल जाग उठता था। संगठन चलाने में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान छोड़ गए । ऐसे ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी और इंदौर जलेस के सबसे लम्बे समय तक अध्यक्ष रहे रजनी रमण शर्मा जी बात करे तो सृजन में रचे-बसे उस व्यक्तित्व की, जिनके बनाए रास्ते पर आज नई पीढ़ी चल रही है।

 

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​रजनी रमण जी मूलतः राजस्थान के बीकानेर शहर के रहने वाले थे, लेकिन उनके अंदर व्यक्तित्व से राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश की संस्कृतियों की आभा फैली रहती थी। ब्रज के रास लिखने में तो उनका कोई तोड़ ही नहीं था। आकाशवाणी दिल्ली से उनके रासों प्रसारण दशकों तक होता रहा। आकाशवाणी की बात आई तो यह भी रेखांकित किया जाएगा राजस्थान, दिल्ली और मध्यप्रदेश के आकाशवाणी और दूरदर्शन केन्द्रों के बहुत सारे कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता महत्वपूर्ण रही है। *साहित्य अकादमियों से लेकर विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के कार्यक्रमों में संचालक से लेकर सहभागी के रूप में उनको हमेशा याद किया जाएगा। उनकी आवाज में एक किस्म की कसक थी, जो श्रोताओं को बाँधकर रखती थी।
रजनी रमण शर्मा 
​का पहला उपन्यास तुम्हारे आस-पास राजस्थान साहित्य अकादमी के सहयोग से प्रकाशित हुआ था। जिसमें मुख्य पात्र मुहल्ला है। यह प्रयोग पाठक को उसके सामाजिक सरोकारों से जोड़ने में सफल रहा। इसके अलावा एक आलेखों की कृति बोधी प्रकाशन से प्रकाशन की प्रक्रिया में हैं। कहानी, कविता, साक्षात्कार और ब्रज के रासों की पाण्डुलीपियाँ तैयार हैं। उनके खोज एवं शोधपरक रिपोर्ट्स का उपयोग शासन प्रशासन ने किया।* उनको भी जोड़ें एक जरूरी किताब बनेगी। उनके द्वारा बनाए गए डाक्युमेंटरी खूब चर्चा में रहे, चाहे बुद्ध मुस्करा रहे है हो, चाहे देवास के आस-पास पानी की कमी पर डाक्युमेंटरी हो या फिर ब्रज चौरासी कोस की बात करें हर जगह उनकी अपनी शैली दिखाई देती है।*
रजनी रमण शर्मा द्वारा अभिनीत एवम निर्देशित नाटक 
​घासीराम कोतवाल, मशीन, जुलूस, पूस की एक रात, सुन लड़की दबे पांव आते हैं सभी मौसम, थैंक्यु मिस्टर ग्लाड, शम्बूक की हत्या, हम रोशनी बाँटते हैं, भस्मासुर अभी जिंदा है, अंधेर नगरी, मेघदूत, ढोला-मारू, हाउस आफ मैड, ओमार सोनार बांग्ला, रक्तदीप और नयायुग जैसे लगभग तीन दर्जन नाटकों में रजनी रमण के अभिनय को न केवल सराहा गया बल्कि बहुत सारे बेस्ट एक्टर के पुरस्कारों से उनको नवाजा भी गया। उनके द्वारा निर्देशित नृत्य नाटिका मेघदूत, श्री कृष्ण पारिजातम् और टोड़ो राव में उनकी रंग दृष्टि हतप्रभ कर देती है। अफसर हुसैन और अलका जी जैसे बड़े रंगकर्मियों के साथ काम करने का माद्दा रखने वाले रजनी रमण को राजस्थान संगीत नाटक अकादमी ने भी पुरस्कृत किया। वे नाटक में लेखन, अभिनय, तकनीकी निर्देशन, निर्देशन, मंच सज्जा और प्रकाश, हर विधा में प्रवीण थे। जिस विधा में भी कार्य किया वहाँ पर अपनी छाप छोड़ी। रजनी रमण शर्मा के लेखन का प्रकाशन धर्मयुग  लेकर वातायन तक लेखन का सभी तरह के पत्र-पत्रिकाओं में लगातार होता रहा है। साहित्य में कथारंग रंग कथा सम्मान सहित बहुत सारे सम्मान मिले हैं। उनकी रचनाओं पर बने पोस्टर सोशल मीडिया पर बहु प्रसारित हैं। हिन्दी साहित्य में सुपरिचित एवं शीर्षस्थ साहित्कारों हरीश भादाणी, राजेश जोशी, चंद्रकांत देवताले, प्रभु जोशी, अजय तिवारी, प्रकाशकांत, रामप्रकाश त्रिपाठी, रतन चौहान और विजय बहादुर आदि से मित्रवत् संबंध रखने वाले रजनी रमण को इसलिए विशेष याद किया जाएगा कि वे नवोदितों को भी समान सम्मान देते थे। नवांकुरों को तराशने एवं आगे बढ़ाने के लिए वे सदैव तत्पर रहते थे।

​जैसा की अमूमन होता है कि एक ईमानदार सृजनधर्मी का निज इतना व्यापक हो जाता है कि उसमें उसका पूरा समय समा जाता है। रजनी रमण के साथ भी ऐसा ही रहा, यही कारण है कि उनके खुद के सृजन को न तो वे बहुत गंभीरता से संजो पाए, ना ही उनके प्रकाशन और प्रसारण का कोई विशेष प्रयास किया। यह लगभग वैसा ही है, तेरा तुझको अर्पण। जहाँ से जो लिया, उसे वहीं पर सजा-संवारकर छोड़ दिया। यह प्रवृत्ति बहुत ही विरल है। व्यक्तिगत लोलुपता से बहुत दूर यह सृजन कर्मी अपने समय और समाज के वैज्ञानिक विकास के लिए पूरा जीवन खपा दिया।
​1990 से उनका प्रवास मुख्यतः इंदौर शहर, मध्य प्रदेश रहा है। वे शुरू जरूर हुए थे राजस्थान के बीकानेर शहर से, लेकिन मध्य प्रदेश के स्थापित रचनाकार के रूप में पहचान अर्जित किए । जनवादी लेखक संघ इंदौर इकाई के तो रीढ़ रहे और लगातार बारह वर्षों तक इकाई के अध्यक्ष रहे। इस दौरान जलेस की इंदौर इकाई ने विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजन किया। उनके निर्देशन में ही इंदौर इकाई ने मासिक रचना पाठ का सिलसिला चलाया जिसका क्रम निरंतरता के साथ 150 तक पहुँच गया। उनके द्वारा इंदौर इकाई के माध्यम से मालवा के वरिष्ठ लेखकों एवं सृजनधर्मियों को सम्मानित करने की श्रृंखला शुरू की गई जिसका स्वागत सभी लेखक समाज ने किया।
​तमाम विकट परिस्थितियों में सामान्य रहना, विरोध और बहस को सार्थक मोड़ देना, दूसरों के विचारों और सुझावों को महत्व देना और संगठन के बिखराव की हर संभावनाओं को नेस्तनाबूद करने में रजनी रमण का कोई विकल्प नहीं है। उनका मानना था कि एक लेखक और सृजन से जुड़े व्यक्तित्व को सदैव सतर्क और सक्रिय रहना चाहिए। उसका चौकन्नापन और सूक्ष्म दृष्टि ही उसे उपयोगी लेखक बनाती है। प्रसिद्धि और सम्मान से व्यक्ति जितना दूर रहता है, उतना अपनी जमीन से जुड़ता है। जमीन से जुड़ने की प्रक्रिया ही एक रचनाकार के बनने की प्रक्रिया है। विभिन्न धर्म, संस्कृतियों और समाज में लगातार आवाजाही करते रहना चाहिए। इससे मनुष्यता समृद्ध होती है। रजनी रमण का सम्पूर्ण सृजनकर्म मनुष्यता से लबालब मनुष्यों के समाज के निर्माण का स्वप्न है। हर रचनाकार स्वप्नजीवी होता है। बहुत कम रचनाकार ऐसे होते हैं, जो अपने समय की बेहतरी के साझा स्वप्न के दर्शी होते हैं। रजनी रमण ऐसे ही रचनाकार थे। जिनकी अनुपस्थिति हिन्दी साहित्य में निर्वात पैदा करेगी। वे सही मायने में बहुमुखी प्रतिभा के धनी रहे हैं। उनके पास सृजन का पछाड़ खाता समुद्र है। जिसमें वे अपनी भविष्य दृष्टि के पतवार से नाव खे रहे हैं। उनको साहिल नहीं मझधार चाहिए। सही अर्थों में वे आज सृजन के परिदृश्य पर सुनहरा सितारा हैं। 
रजनी रमण शर्मा पौराणिक श्रृंगार के सिद्धहस्त कलाकार -* पौराणिक श्रृंगार में देश-काल की उनकी इतनी गहरी समझ थी कि उनके द्वारा किए गए श्रृंगार में वह काल स्वयं जाग उठता था। बीकानेर में जन्माष्टमी पर उनके द्वारा बनाई गई पुरस्कृत  सर्वशेष्ठ झांकियां पूरे शहर में अत्यंत प्रसिद्ध रही हैं और उन्हें आज भी लोग याद करते हैं। यह जानकारी उनके अनुज भ्राता  रामावतार शर्मा ने दी ।
रजनी रमण शर्मा की अंतिम यात्रा मैं साहित्यकार रंग कर्मी पत्रकार एवम शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे प्रतिभा के धनी रजनी रमण शर्मा को ग़मगिन आँखो से विदाई व विनम्र श्रद्धांजलि दी

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