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Bikaner Theatre Artists Protest :  बेतहाशा बढ़ा टाउन हाल का किराया , रंगकर्मी शुरू करेंगे आंदोलन 

 
RNE, BIKANER.
उत्तर भारत की नाट्य राजधानी कहे जाने वाले बीकानेर शहर में नाटक करना मुश्किल ही नही नामुमकिन सा होता जा रहा है । बीकानेर के वरिष्ठ रंगकर्मियों का कहना है की कला संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयोजन से रियासत कालीन यह प्रेक्षागृह अनेक महत्त्वपूर्ण नाटकों का साक्षी रहा है । पूर्व के प्रशासन ने बीकानेर के कलाकारों के महत्व को समझा व उनकी कला के प्रोत्साहन हेतु कला के क्षेत्र में कार्यरत पंजीकृत संस्थाओं को नाट्य मंचन व अन्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रचलित दरों को कम करते हुवे 1100/- रतथा अपंजीकृत संस्थाओं को 6000/- में टाउन हाल उपलब्ध करवाया जाता था । किंतु गत दिनों लिए गए एक निर्णय के तहत टाउन हाल का किराया 6000/- से बढ़ाकर सीधे 12000/- कर दिया गया तथा पंजीकृत संस्थाओं को 1100/- रुपये में उपलब्ध प्रावधान को भी समाप्त कर दिया गया । प्रशासन के इस निर्णय से नाट्य संस्थाएं सकते में है । उल्लेखनीय हैं की अपनी पहचान के संकट से झूझ रही नाट्य कला को बीकानेर के रंगकर्मी पूरी तरह अव्यावसायिक रूप से कार्य करते हुवे इसके सरंक्षण में लगे हुए हैं । बढ़े हूवे किराए ने उनके इन प्रयासों को गहरा धक्का लगा है । लगभग निजी संसाधनों तथा कड़ी मेहनत से नाट्यकर्म को जारी रखने वाले कलाकारों के लिए इस बढ़े हुवे किराए को वहन करना नामुमकिन है तथ यह तय है कि यदि प्रशासन ने पुरानी किराए की व्यवस्था को बहाल नहीं किया तो बीकानेर में नाटकों का मंचन बीते ज़माने की बात हो जाएगी । इसी चिंता को प्रशासन के समक्ष रखने तथा पुराने किराए को बहाल करने के लिए रंगकर्मी शीघ्र ही आंदोलन शुरू करेंगे तथा ज़िला कलेक्टर महोदय से मुलाक़ात कर ज्ञापन भी देंगे । इस हेतु प्रदीप भटनागर, रमेश शर्मा, अभिषेक आचार्य, किशन स्वामी, विजय कुमार शर्मा आदि आंदोलन की आगामी रूपरेखा के लिए रंगकर्मियों से सम्पर्क कर रहे हैं

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