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Bikaner : चेक बाउंस मामले में महिला कारोबारी दोषी, साधारण कारावास के साथ 15 लाख रुपये जुर्माना

 
RNE Bikaner
शहर के बागड़ी मोहल्ले की रहने वाली सोना कारोबारी मंजू देवी पत्नी सत्यनारायण सोनी, प्रोपराइटर जे.पी. ट्रेडिंग कंपनी, को चेक बाउंस के एक मामले में बीकानेर की एनआई एक्ट मामलों की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत ने दोषी करार देते हुए एक वर्ष पांच माह के साधारण कारावास तथा 15 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अदालत ने आदेश दिया कि अर्थदंड की राशि परिवादी को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी।
कारोबार के लिए लिए थे 10.50 लाख रुपये
अदालती निर्णय के अनुसार परिवादी रामअवतार पुत्र हीरालाल, निवासी जस्सूसर गेट के बाहर, माताजी मंदिर के पास, बीकानेर और आरोपी मंजू देवी के बीच पूर्व परिचय था। मंजू देवी सोने के व्यापार से जुड़ी हुई थीं। फिलहाल वे बीदासर रहती है. 
आरोप है कि वर्ष 2013 में मंजू देवी ने अपने व्यापारिक कार्यों के लिए रामअवतार से 10 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मांगी। परिवादी ने विश्वास के आधार पर 9 मार्च 2013 को आरटीजीएस के माध्यम से उक्त राशि आरोपी के खाते में स्थानांतरित कर दी। तय अवधि पूरी होने के बाद जब परिवादी ने अपनी रकम वापस मांगी तो आरोपी ने भुगतान के लिए 10.50 लाख रुपये का चेक जारी किया।
बैंक से लौटा चेक
परिवादी ने 19 अगस्त 2013 को चेक बैंक में प्रस्तुत किया, लेकिन 21 अगस्त 2013 को बैंक ने उसे "पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होने" के कारण अनादरित कर वापस लौटा दिया। इसके बाद 30 अगस्त 2013 को आरोपी को विधिक नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की गई, लेकिन निर्धारित अवधि में न तो राशि लौटाई गई और न ही कोई संतोषजनक जवाब दिया गया।
2013 में दर्ज हुआ मुकदमा : 
नोटिस अवधि समाप्त होने के बाद परिवादी ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया। अदालत ने 20 दिसंबर 2013 को मामले में संज्ञान लिया। लंबी सुनवाई के दौरान परिवादी ने चेक, बैंक रिटर्न मेमो, नोटिस, डाक रसीद तथा बैंकिंग दस्तावेज सहित विभिन्न साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।

बचाव पक्ष की दलीलें नहीं हुईं स्वीकार

आरोपी मंजू देवी ने अदालत में दावा किया कि उन्होंने परिवादी से कोई ऋण नहीं लिया था और चेक का दुरुपयोग किया गया है। हालांकि अदालत ने पाया कि आरोपी अपने इस बचाव के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी। दूसरी ओर परिवादी के दस्तावेजी साक्ष्य और बैंक रिकॉर्ड उसके दावे की पुष्टि करते हैं।
अदालत ने माना कि आरोपी यह साबित करने में विफल रही कि चेक किसी अन्य उद्देश्य से दिया गया था या उसका दुरुपयोग हुआ था। ऐसे में धारा 138 एनआई एक्ट के तहत अपराध सिद्ध होता है।
अदालत का फैसला
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (एनआई एक्ट प्रकरण संख्या-2) भारती पाराशर ने 6 जून 2026 को फैसला सुनाते हुए मंजू देवी को दोषी ठहराया। अदालत ने आरोपी को एक वर्ष पांच माह के साधारण कारावास तथा 15 लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना जमा नहीं कराने की स्थिति में अतिरिक्त छह माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। मामले में परिवादी की ओर से अधिवक्ता राधेश्याम सेवग ने पैरवी की, जबकि आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता सम्पूर्णानन्द व्यास ने न्यायालय में पक्ष रखा।

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