Bikaneri Usta Art : नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस परेड में बीकानेर के उस्ता आर्ट की झांकी
RNE New Delhi-Bikaner.
देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस परेड समारोह में इस वर्ष राजस्थान की झांकी के माध्यम से बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला राष्ट्रीय मंच पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ने जा रही है।
कर्तव्य पथ पर निकलने वाली इस झांकी में उस्ता कला की पारंपरिक बारीकियों, शुद्ध सोने की पत्तियों से सजे उभरे डिज़ाइनों और मरुधरा की सांस्कृतिक आत्मा को सजीव रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। ऊँट, लोकसंगीत और पारंपरिक नृत्य की संगति में यह झांकी राजस्थान की पहचान को और अधिक प्रभावशाली बनाएगी।

पीएम मोदी, राष्ट्रपति मुर्मू के आगे से गुजरेगी उस्ता आर्ट झांकी :
यह झांकी परेड के दौरान मुख्य मंच से होकर गुजरेगी, जहाँ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे। परेड के बाद 26 से 31 जनवरी तक यही झांकी दिल्ली के ऐतिहासिक भारत पर्व (लाल किला परिसर) में भी प्रदर्शित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि 26 जनवरी 2026 की परेड में कुल 30 झांकियाँ शामिल होंगी, जिनमें 17 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों तथा 13 केंद्र सरकार के मंत्रालयों व विभागों की झांकियाँ होंगी। इस वर्ष झांकियों की थीम “स्वतंत्रता का मंत्र—वंदे मातरम” और “समृद्धि का मंत्र—आत्मनिर्भर भारत” रखी गई है।

कैसा है बीकानेर का उस्ता आर्ट :
बीकानेर की उस्ता कला, जो ऊँट के चर्म (कैंट), लकड़ी और पत्थर पर शुद्ध सोने की पत्तियों से की जाने वाली बारीक नक्काशी के लिए जानी जाती है, समय के साथ नवाचार की राह पर भी आगे बढ़ी है। इसी क्रम में उस्ता कलाकार सैफ अली उस्ता के अनुभव इस उपलब्धि को व्यापक संदर्भ देते हैं। उनके अनुसार जी-आई टैग मिलने के बाद उस्ता कला को न केवल संरक्षण मिला है, बल्कि कारीगरों के काम को नई पहचान और सम्मान भी प्राप्त हुआ है। राष्ट्रीय मंच पर झांकी के माध्यम से इस कला का प्रदर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और बीकानेर की पारंपरिक विरासत को मजबूती देगा।

झांकी में आशीष की कुप्पी :
झांकी में प्रदर्शित की जा रही उस्ता कला से जुड़ी एक कुप्पी का डिज़ाइन बीकानेर के उस्ता कलाकार आशीष द्वारा तैयार किया गया है, जिसका रिप्लिका झांकी में शामिल है। उनके रचनात्मक सफर में परंपरा और प्रयोग का संतुलन स्पष्ट झलकता है। उनके अनुसार झांकी में उनके डिज़ाइन का स्थान पाना व्यक्तिगत उपलब्धि से कहीं आगे, बीकानेर की कला परंपरा के सम्मान का प्रतीक है। वे मानते हैं कि उस्ता कला को समकालीन उपयोगिता से जोड़ते हुए देश-विदेश तक पहुँचाना समय की मांग है और ऐसे राष्ट्रीय अवसर इस दिशा में नए द्वार खोलते हैं।
कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर बीकानेर की उस्ता कला का यह प्रदर्शन न केवल राजस्थान की सांस्कृतिक समृद्धि को रेखांकित करता है, बल्कि मरुधरा की इस दुर्लभ और बेजोड़ कला को वैश्विक पहचान की ओर एक और मजबूत कदम भी प्रदान करता है।

