कांग्रेस का PBM सुधारो आंदोलन : 9 मांगों पर सहमति, मुआवजे पर बात अटकी
RNE Bikaner.
पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और चिकित्सा व्यवस्थाओं को लेकर चल रहे कांग्रेस के "पीबीएम सुधारो जनआंदोलन" के बीच रविवार को प्रशासन और संघर्ष समिति के बीच हुई वार्ता में अधिकांश मांगों पर सहमति बन गई। हालांकि पीड़ित प्रसूताओं और मृतक महिलाओं के परिजनों को मुआवजा देने के मुद्दे पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका।

पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के नेतृत्व में हुई बैठक में संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा, जिला कलेक्टर निशांत जैन, एसपी मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा, पीबीएम अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया और एसडीएम राजेश नायक मौजूद रहे।
बैठक में संघर्ष समिति की 10 में से 9 मांगों पर सहमति बन गई। इनमें सीएम मूंधड़ा मेडिसिन विंग और जनाना विंग को शुरू करना, अस्पताल में भ्रष्टाचार की स्वतंत्र जांच, सफाई व्यवस्था में सुधार, जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांच सुविधाओं को सुचारू करना, बंद पड़े उपकरणों को चालू करना, डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना तथा मरीजों और परिजनों के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए सख्त कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल हैं।
विवाद का केंद्र बनी नौवीं मांग पर सहमति नहीं बन सकी। संघर्ष समिति ने चिकित्सकीय लापरवाही से प्रभावित उन प्रसूताओं, जिनकी किडनी खराब हुई है, को 25 लाख रुपये मुआवजा तथा मृतक प्रसूताओं के परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग रखी।
इस पर संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा ने बताया कि इस संबंध में राज्य सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा से चर्चा की गई है। मुआवजे के विषय पर सरकार स्तर पर विचार-विमर्श के बाद 24 घंटे के भीतर संघर्ष समिति और डॉ. बी.डी. कल्ला को जवाब दिया जाएगा।
बैठक के बाद संघर्ष समिति ने कहा कि मुआवजे और जिम्मेदारी तय करने के मुद्दे पर संतोषजनक निर्णय नहीं होने तक आंदोलन की रणनीति पर विचार जारी रहेगा। कांग्रेस नेताओं ने पीबीएम अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया।

