PBM Hospital में प्रसूताओं की मौत, मुआवजे पर अड़ी कांग्रेस, कलेक्ट्रेट तक आक्रोश मार्च
RNE Bikaner.
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने, किडनी फेल होने और मौतों के मामलों ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। कोटा, जोधपुर और बीकानेर के सरकारी अस्पतालों में सामने आए मामलों के बाद प्रदेशभर में चिंता, दुख और आक्रोश का माहौल है। बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भी प्रसूताओं की मौतों के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।

इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस द्वारा चलाया जा रहा "पीबीएम सुधारो आंदोलन" अब और तेज हो गया है। मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं, महिला कांग्रेस और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने मोर्चरी से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकालकर सरकार और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भीषण गर्मी और कड़कती धूप के बावजूद बड़ी संख्या में लोग आंदोलन में शामिल हुए।
मुआवजे के मुद्दे पर अटकी सहमति :
दरअसल पीबीएम अस्पताल में भर्ती प्रसूता शारदा की मौत के बाद कांग्रेस और मृतका के परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद संभागीय आयुक्त विश्राम मीणा की मौजूदगी में कांग्रेस नेताओं और प्रशासन के बीच लंबी वार्ता हुई।

बैठक में कांग्रेस की ओर से 10 सूत्रीय मांगें रखी गईं। इनमें अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार, संसाधनों की उपलब्धता, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने जैसी मांगें शामिल थीं। सूत्रों के अनुसार 10 में से 9 मांगों पर सहमति बन गई, लेकिन मृतक प्रसूताओं के परिजनों को आर्थिक मुआवजा देने और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के मुद्दे पर सहमति नहीं बन सकी। यही कारण रहा कि वार्ता के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ और कांग्रेस ने अपना विरोध जारी रखने का फैसला किया।
"समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन जारी रहेगा"
संभागीय आयुक्त के साथ हुई बैठक में जिला कलेक्टर, अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसपी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य और पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक भी मौजूद रहे। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सा संसाधनों, दवा उपलब्धता और मरीजों की देखभाल से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। वार्ता के बाद कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक अस्पताल में व्याप्त समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होता और पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इसी कड़ी में आज फिर प्रदर्शन हुआ।

कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद :
आंदोलन और वार्ता में कांग्रेस का बड़ा प्रतिनिधिमंडल शामिल रहा। इसमें अनूपगढ़ विधायक एवं जिला प्रभारी शिमला नायक, जिला कांग्रेस देहात अध्यक्ष बिशनाराम सियाग, शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, नोखा विधायक सुशीला रामेश्वर डूडी, भूदान आयोग अध्यक्ष लक्ष्मण कड़वासरा, शहर प्रभारी मुस्ताक खान, डॉ. राजेन्द्र मूंड, डॉ. प्रीति मेघवाल, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष भंवर कूकणा, सुमित वल्लभ कोचर, राजेन्द्र बापेऊ, सीताराम नायक सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल रहे।
सरकार और स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठ रहे सवाल :
पीबीएम अस्पताल में लगातार सामने आ रहे मामलों ने प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसव के बाद महिलाओं की तबीयत बिगड़ने, किडनी फेल होने और मौतों के मामलों को लेकर आमजन में चिंता है, वहीं विपक्ष इसे स्वास्थ्य सेवाओं की बड़ी विफलता बताकर सरकार को घेर रहा है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार पीड़ित परिवारों को राहत देने, जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने और अस्पतालों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए क्या कदम उठाती है, क्योंकि यह मुद्दा अब केवल बीकानेर तक सीमित नहीं रहा बल्कि पूरे राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बहस का केंद्र बन चुका है।

