Deshnok : आसोज मास उज्वल पक्ष सातम शुक्रवार, चौदह सौ चमालवें मां करणी लिए अवतार..
Rudra News Express Deshnok-Bikaner.
दूर तक भक्तों की कतार। निज मंदिर के पास खुले चौक में सैकड़ों भक्त कर रहे जय-जयकार। युवाओं की एक टोली ढोलक, मंजीरा के साथ भजनों की लय में लीन। घूंघट वाली महिलाओं का एक दल इन्हीं भजनों की ताल पर कर रही "घूमर"। यहाँ पहुँचने वाला शख्स खुद-ब-खुद उत्साह और भक्ति में डूब जाता है और कब जयकार लगाना और नाचना शुरू कर देता है पता ही नहीं चलता।
यह नजारा बीकानेर के देशनोक स्थित करणी माता मंदिर का। दुनियाभर में चूहों वाली माताजी के नाम से प्रसिद्ध भगवती के दरबार में नावरात्रा शुरू होने के पहले दिन से ही हजारों की कतार लग रही है। हालांकि देशभर में स्थापना, अष्टमी, नवमी को माता के दरबार में खास पूजा और उत्साह होता है लेकिन देशनोक में इसके अलावा भी एक दिन हजारों उमड़ते हैं। वह दिन है आसोज नवरात्रा की सप्तमी का।
क्यों खास है आज का दिन :
आसोज मास उज्वल पक्ष सातम शुक्रवार,
चौदह सौ चमालवें मां करणी लिए अवतार..।
इस दोहे के मुताबिक आज यानि आसोज मास की सप्तमी को माँ करणी का अवतरण दिवस है। इसी तिथि को संवत 1444 में शुक्रवार को मां करणी ने मनुष्य रूप में अवतार लिया। उनका जन्म जोधपुर जिले की फलोदी तहसील के सुवाप गांव में हुआ था। उनके पिता मेहाजी चारण किनिया शाखा के थे और माता का नाम देवल देवी था।
सप्तमी के दिन माताजी की सवारी निकलती है। भगवती को चांदी की पालकी में उनकी आराध्य देवी तेमड़ा राय माता के मंदिर तक ले जय जाता है। वहाँ करणी माता अपनी आराध्या को धोक लगाती है। एक साथ दो महादेवियों के मिलन के इस दृश्य का लाभ लेने हजारों भक्त इस यात्रा का दर्शन करने पहुंचे हैं।
पूरी रात चलकर पहुँच रहे हजारों लोग :
मां करणी की भक्ति और श्रद्धा का सैलाब बीकानेर से जोधपुर हाइवे पर देखा जा सकता है। नवरात्रा स्थापना से पहले पूरी रात, हजारों लोग पैदल चलते हुए इस मंदिर तक पहुंचे और धोक लगाई। अब भी हर दिन सैकड़ों लोग पैदल पहुँच रहे हैं। मां के दरबार में शीश झुकाकर खुद को धन्य मां रहे हैं। आज सप्तमी को जहां विशेष पूजा-अनुष्ठान चल रहे हैं वही अष्टमी-नवमी को भी भक्तों की कतारें लगी रहेगी।

