चुनाव परिक्रमा : Bikaner शहर का वार्ड 73 आ गया सुर्खियों में, अनिल व दीपक की राजनीति में कैसी रहेगी एंट्री, इस पर नजर, छात्र चुनाव के बाद अब फिर मैदान में मेड़तिया
शहर में तो इन दिनों निगम चुनाव का जबरदस्त माहौल है। कोई चौकी, पाटा, गली, गवाड़, मोहल्ला, चौक, पान की दुकान, चाय की दुकान ऐसी नहीं जहां चुनाव को लेकर चर्चा न हो रही हो। सब अपने अपने चुनावी घोड़े दौड़ा रहे हैं। कयासों से चर्चा को गर्मागर्म किये हुए हैं। भले ही पक्ष का कोई व्यक्ति चुनाव न लड़ रहा हो मगर अधिकतर चौक में आने जाने वालों की खातिरदारी चाय व राबड़िये से की जा रही है। या तो पुष्करणा ओलंपिक के समय या फिर पार्षद चुनाव के समय ऐसा लगता है जैसे पूरा परकोटे के भीतर का शहर एक घर है और सब साथ है।

राजा बोहरा
नगर निगम के वार्ड पार्षद चुनने के लिए वोट तो 9 सितम्बर को पड़ेंगे, मगर लगता शहर का वोटर तो तत्काल मतदान करने के लिए तैयार है। उसने लगभग अपना मानस बना लिया है कि उसे किसको वोट देना है। अब तो केवल पारिवारिक दबाव व रिश्तेदारी के कारण ही मत बदल सकेंगे, जिनका प्रतिशत 5 भी नहीं है।
शहर के अनेक वार्ड को आजकल भीतरी वोटर भी हॉट सीट कहने लग गए हैं। पहले वे लोग यह शब्द काम में नहीं लेते थे, मगर अखबारी भाषा अब उन्होंने भी अपना ली है। इन दिनों शहर में जिन वार्ड की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, उनमें से एक है वार्ड 73। यह वार्ड ब्रह्मपुरी, डीडु सिपाहियन, डागा चौक आदि का वार्ड है। यह वार्ड बहुत खास है। पहले यह वार्ड केंद्रीय मंत्री, यूपी के राज्यपाल रहे स्व मोहम्मद उस्मान आरिफ का था।

अब यह वार्ड कांग्रेस के दिग्गज नेता, 10 विधानसभा चुनाव लड़ चुके पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला का है। यह भी संयोग है कि इस बार इस वार्ड से उनके ही भतीजे अनिल कल्ला की चुनावी राजनीति में एंट्री हो रही है। वे बी डी कल्ला के पहले चुनाव से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। राजीव यूथ क्लब से सामाजिक गतिविधिया करते रहे हैं और राजनीति की घुट्टी उनको भी विरासत में बी डी कल्ला जी की तरह अपने पिता जनार्दन कल्ला ' भाईसा ' से मिली है। जिन्होंने भी अपनी राजनीति पार्षद चुनाव लड़कर की थी। अनिल वर्षों से सक्रिय राजनीति में है मगर पहली बार उनको चुनाव लड़ने की घर व पार्टी से साथ साथ अनुमति मिली है। इस कारण यह वार्ड हॉट सीट बन गया है। सबकी नजर इस बात पर है कि अनिल कल्ला की चुनावी राजनीति में एंट्री कैसी रहती है? क्योंकि यहां कांग्रेस के एक बागी उम्मीदवार भी मैदान में उतरे हुए हैं।

वहीं दूसरी तरफ भाजपा की तरफ से भी यहां पहली बार चुनावी राजनीति में दीपक पारीक उतरे है। वे व्यवसायी हैं। उनके पिता पंडित लक्ष्मीनारायण जी पारीक जरूर लूणकरणसर से विधानसभा का चुनाव लड़े थे। दीपक चर्चित व्यवसायी है और सामाजिक गतिविधियों में जुड़े हैं, इस कारण अंजान चेहरा नहीं है। मगर उनके सामने उनकी पार्टी के एक बागी जो पूर्व पार्षद रहे हैं, वे भी मैदान में है। उनसे भाजपा के सामने परेशानी है।
चूंकि कांग्रेस की तरफ से अनिल कल्ला को व भाजपा की तरफ से महापौर का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, इस वजह से यह वार्ड हॉट सीट है। अब देखें मतदाता क्या फैसला देता है। मगर वार्ड में चुनावी माहौल जबरदस्त है।
छात्र चुनाव तो लड़े थे, अब राजनीतिक चुनाव भी
नगर निगम का वार्ड 8 भी चुनावी चर्चा में है। यह वार्ड शिवबाड़ी के पास के इलाके का है। इस सीट को भी चुनाव में महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां से भाजपा ने अपने फायर ब्रांड युवा नेता भगवान सिंह मेड़तिया को कांग्रेस के नवीन जांगिड़ के सामने उतारा है। वार्ड में जबरदस्त चुनावी माहौल बना हुआ है।

भाजपा के भगवान सिंह मेड़तिया विद्यार्थी परिषद के समय से ही राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने छात्र संघ के चुनाव लड़े और लड़वाये। राजनीति के चुनाव में वे पहली बार खुद उतरे है। इससे पहले वे अपनी माताजी को पार्षद का चुनाव लड़ा जीता चुके हैं। चुनाव लड़ाने का उनको जबरदस्त अनुभव है। पिछले काफी समय से मेड़तिया बिजली, पानी व सड़क जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर अनेक आंदोलन कर चुके हैं।
मेड़तिया को इस बार महापौर का दावेदार माना जा रहा है, इस कारण इस वार्ड पर लोगों नजरें गड़ी हुई है। कांग्रेस के नवीन जांगिड़ पार्टी के परम्परागत वोटों व व्यक्तिगत संपर्कों के कारण मेड़तिया को चुनोती दे रहे हैं। अब मतदाता क्या फैसला करता है, यह तो समय आने पर ही पता चलेगा।

