लोक साहित्य रा आगीवाण सोहन दान चारण रो सनमान
आरएनई, खास
भारतीय ग्यांन परंपरा में लोक अर शास्त्र अेक-दूजा रा विरोधी नीं हुवै बल्कि आपस में हदभांत जुड़ाव राखै। लोक जीवण में पीढ़ी- दर - पीढ़ी चालणवाळी परंपरावां, रीति-रिवाज, भासा, साहित्य, कला अर जीवण पद्धति समाज रै अनुभवां रौ जीवंत सरूप हैं तो शास्त्र आ अनुभवां नै व्यवस्थित ग्यांन अर वैचारिक आधार प्रदान करै। अै विचार ख्यातनाम कवि-आलोचक प्रोफेसर (डाॅ.) अर्जुनदेव चारण करणी मण्डल कांनी सूं आयोजित ' लोक और साहित्य ' विसयक विसेस व्याख्यान में व्यक्त करिया। वे आपरै उदबोधन में कठोपनिषद रै अंतरगत वरणित रिसी उदालक रै पुत्र नचिकेता री कथा रौ उदाहरण देय 'र इण बात नै सिद्ध करी कै भारतीय ग्यांन परम्परा समाज में जेन-जी नै सवाल पूछण रौ हक प्रदान करै ।
आपरै विसेस उदबोधन में डाॅ.अर्जुनदेव चारण कह्यौ कै भारत री सांस्कृतिक सिमरधता नै समझण वास्तै फगत शास्त्रां रौ अध्ययन पर्याप्त नीं है बल्कि लोक जीवण, लोक साहित्य अर लोक परम्परा नै समझणौ ई जरूरी है। समैं रै सागै समाज में बदळाव आवै पण लोक परम्परावां आपारी सांस्कृतिक जड़ां अर सामाजिक यादां नै जीवित राखण में आपरी महताऊ भूमिका निभावै ।
राजस्थानी लोक साहित्य रा प्रतिष्ठित विद्वान मानीता प्रोफेसर (डाॅ.) सोहनदान चारण रै 80वें जलमदिन माथै आयोजित ओ साहित्यिक आयोजन अपणै आप में घणौ महताऊ अर सारथक सिद्ध हुयौ। इण अवसर माथै करणी मण्डल कांनी सूं केक काट 'र जलम दिन मनावण रै सागै ई प्रोफेसर सोहनदान चारण रौ अभिनन्दन ई हुयौ।
समारोह रै सरुआत में मिजमानां रै हाथां सूं मां सुरसत रै चित्र सांमी दीवौ जळाय 'र वांरै चरणां मांय पुहप चढाया। सरुआत में प्रोफेसर सोहनदान चारण स्वागत उदबोधन दीनौ । डाॅ.धनंजया अमरावत धन्यवाद ग्यांपित करियौ। समारोह संयोजन गौरव अमरावत कीनौ।
इण अवसर माथै प्रोफेसर गुलाबसिंह चौहान, प्रोफेसर कौशलनाथ उपाध्याय, प्रोफेसर रामनिवास शर्मा, प्रोफेसर श्यामसुन्दर शर्मा, प्रोफेसर कैलाशनाथ व्यास, प्रोफेसर एसपी व्यास, प्रोफेसर के.एल. रैगर, प्रोफेसर छोटाराम प्रजापत, प्रोफेसर अरविन्द परिहार, डाॅ. पद्मजा शर्मा, डाॅ.गजेसिंह राजपुरोहित, डाॅ.प्रकाशदान चारण, डाॅ. मनीषा डागा, श्री दशरथ कुमार सोलंकी, श्री दिनेश सिंदल, श्री हरि प्रकाश राठी, श्री मीठेश निर्मोही, डाॅ.रेणुका श्रीवास्तव, डाॅ.मीनाक्षी बोराणा,श्रीमती संतोष चौधरी,श्री महिपालसिंह उज्ज्वल,श्री अजीत सिंह चारण, श्री मोहन सिंह रतनू, डाॅ. ईला चारण, डाॅ.राजेन्द्रसिंह बारहठ, श्री आशीष चारण, श्री तेजसिंह लालस, श्री दुर्गादान सिंह चारण,श्री मनमोहन लालस,डाॅ.रंजना उपाध्याय,श्री माधोसिंह भाटी शांतिलाल सागै कैई प्रतिष्ठित रचनाकार-साहित्य प्रेमी मौजूद रैया ।

