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Gangaur Bikaner: चौतीना से दौड़, ढढ्ढों में घूमर, घर-घर विदाई, जस्सूसरगेट भोलाई

 
RNE Bikaner
समूचा बीकानेर शहर मानो गवारमय हो गया। हर घर से कुछ इस तरह विदाई हुई मानो बेटी पहली बार ससुराल जा रही हो। जस्सूसरगेट, नया कुआं जैसे इलाकों में मेले भर गए। इन सबके बीच हुजूम उमड़ा जूनागढ से कोटगेट तक। यहां चौतीना कुआं से गवर दौड़ शुरू हुई जिसे देखने हजारों लोग जुटे। इन सबके बीच गणगौर की भव्यता की झांकी ढढ्ढों के चौक में नजर आई। करोड़ों के गहने पहनी इस गवर के सामने सैकड़ों महिलाओं- युवतियों ने घूमर की। 

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दरअसल आज गवर की विदाई के दिन पुजारिनों में उत्साह और उदासी साथ-साथ दिखे। 
उत्साह इस बात पर कि आज 16 दिन की पूजा- अराधना पूर्ण हुई। इसीलिए गणगौर को खूब सजाया, संवारा। भोग लगाया। गीत गाए। उसके सामने जमकर डांस किया।

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उदासी इस बात पर कि आज गणगौर विदा हो रही है। विदाई का यह दुख गीतों में भी साफ झलका। मसलन "अभी ना जाओ छोड़कर, दिल अभी भरा नहीं" जैसे गीत गवर को सजाते, संवारते गाए। 
पालसिये को सिर पर रखकर विदा करने जाते वक्त "आगे - आगे बैंड बाजा पीछे मोटरकार है, रो मति गवरल हरियाला ईसर साथ है" सरीखे गीत गाए। 
इतना ही नहीं गवर को विदा कर लौटते समय अनमनी होते हुए पुकारती रही " गवरल ऐ तूं पाछी आ... पाछी आ...।"
एक ओर जहां विदाई चलती रही वहीं दूसरी और ढढ्ढों के चौक में महिलाओं, युवतियों का हजूम उमड़ पड़ा। यहां सुख सौभाग्य देने वाली चांदमल जी की गवर के आगे जमकर घूमर नृत्य हुआ। माना जाता है कि इस गवर को करोड़ों के गहने पहनाए जाते हैं। इसीलिए जबरदस्त सुरक्षा व्यवस्था भी रहती है। देर रात तक यहां घूमर होती रही और इसके साथ ही हंसते- खेलते गणगौर को विदाई दी गई।

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