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Bikaner : यहां पितृ अपने वंशजों से मिलने आ रहे, जल पाकर तृप्त हो रहे!

 

RNE Bikaner.

दिवंगत हो चुके पिता, दादा, मां, दादी, मौसी, बुआ या कोई भी दैहिक रिश्तेदार यहां तक कि मित्र और पहचान का पड़ौसी भी जो अब दुनिया में नहीं रहा है तो यह समय उनके एक बार धरती पर लौट आने का है। इसके साथ ही ये आत्माएँ आपसे कुछ अपेक्षा भी रखती है।

अगर इस अपेक्षा पर आप खरे उतर जाते हैं तो सदैव कल्याण का आशीर्वाद भी देती है। मान्यता के मुताबिक वे आत्माएं पितृपक्ष के 15 दिनों में धरती पर उतरती है और अपनी संतानों के हाथों जलग्रहण कर न केवल तृप्त होती है वरन संतानों, परिजनों को सदैव सुखी रहने का आशीर्वाद भी देती है।
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इसी मान्यता के चलते जहां देशभर के लोग खासतौर पर बिहार के गया में पितृपक्ष में तर्पण करने पहुंचते हैं वहीं बीकानेर में भी पितरों का मेला लग रहा है। यहां हर सरोवर, कुंड, बगीची और यहां तक घरों में भी पितरों यानी दिवंगत हो चुके पूर्वजों का आह्वान हो रहा है। आह्वान के साथ ही उनकी उपस्थिति मानते हुए कुशा और तिल हाथों में लेकर इन पूर्वजों को अंजलि भर-भर जल अर्पित किया जाता है। जल अर्पण की इस विधि को तर्पण कहते हैं। जब तर्पण प्रक्रिया पूरी होती है तो इन पितरों के साथ ही खुद के कल्याण के लिए भी प्रार्थना होती है। 

शहर के धरणीधर तालाब में तर्पण का खास इंतजाम किया गया है। यहां हर घाट पर अलग-अगल पंडितों की अगुवाई में तर्पण प्रक्रिया चल रही है। एक ओर पंडित नवरतन व्यास विधि-विधान से तर्पण करवा रहे हैं। मनमोहन सेवग, एडवोकेट गोपाल आचार्य, मांगीलाल, घनश्याम आचार्य, महेंद्र आचार्य चोंचिया महाराज सहित सैकड़ों लोग इस घाट पर तर्पण कर रहे हैं। तड़के पाँच बजे से पहला सत्र शुरू होता है और 08 बजे तक तीन सत्रों में तर्पण प्रक्रिया चलती है। 
 

वहीं दूसरी विद्वान पंडित नथमलजी के शिष्य पंडित गोपाल ओझा के मंत्रोच्चार मुताबिक जलार्पण कर रहे हैं। इस तर्पण मण्डल में भी अलसुबह से देर तक अलग-अलग सत्रों में जलांजलि अर्पित की जा रही है।
 

प्रकांड ज्योतिषाचार्य पंडित राजेंद्र व्यास "ममू महाराज", पत्रकार-ज्योतिषी सिद्धार्थ जोशी सहित एक ग्रुप नथूसर गेट के बाहर सूर्य मंदिर में पितरों के पूजन, जलार्पण में जुटा है। यहां भी पूर्ण विधि-विधान के साथ तर्पण-अर्पण का क्रम चलता है। कुछ इसी तरह श्रीरामसर स्थित कन्नू महाराज रंगा की बाड़ी में भी तर्पण हो रहा है। इसके अलावा कोलायत के कपिल सरोवर में भी हर दिन तर्पण हो रहा है।
गंगा, यमुना जैसी नदियों में तर्पण का अलग ही महात्म्य माना गया है। यही वजह है कि बीकानेर के बीसियों लोगों का एक दल खासतौर पर तर्पण करने के लिए 15 दिन की यात्रा पर हरिद्वार गया हुआ है। प्रकांड पंडित नथमलजी के सान्निध्य में यह दल तर्पण कर रहा है।

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