180 देशों में रिलीज़ हुई हिंदी-राजस्थानी फिल्म 'ओमलो', 24 राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित
RNE Bikaner.
हरे कृष्णा पिक्चर्स, बैनर तले बनी रणदीप चौधरी द्वारा निर्देशित हिंदी - राजस्थानी फिल्म ओमलो आज 3 जुलाई से प्रसाद भारती के ओ टी टी चैनल वेब्ज (waves) जो निशुल्क है पर रिलीज हो रही है! फिल्म से जुड़े कला निर्देशक व प्रोडक्शन हैड यतिन राठौर ने बताया कि कांस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल, रेनबो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर व अटलांटा फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फीचर फिल्म अवार्ड के अलावा इस फिल्म को हॉट अलग-अलग कैटेगरी में 24 नेशनल इंटरनेशनल अवार्ड अब तक मिल चुके हैं ! फिल्म के निर्देशक रणदीप चौधरी ने बताया कि 3 जुलाई से यह फिल्म एक साथ 180 देशो इराक़, ईरान, टर्की, नेपाल, श्रीलंका, पाकिस्तान, फ्रांस, अमेरिका आदि में प्रसारित होगी !

फिल्म में बच्चे ओमलो की केंद्रीय भूमिका में महाराष्ट्र के बाल कलाकार शंभू महाजन है,मां के किरदार में उड़ीसा की सोनाली शर्मिष्ठा है, इसके अलावा राजस्थान में बीकानेर के रंगमंच से जुड़े कलाकार रमेश शर्मा, मीनू गौड़ के अलावा महेश जिलोवा,राजेश सिंघल, वंदना, देवा शर्मा ओर स्वयं निर्देशक ने अहम किरदार में है ! फिल्म में डूंगरगढ के बाल कलाकार शिवानी गढ़वाल, रामदेव सीवल, रामूराम गोदारा, हरि मोदी,रामरख सारण, सुरेश गोदारा,मघाराम साहू ने भी अनेक भूमिकाएं निभाई है! फिल्म का प्रोडक्शन का काम गांव के ही युवा सुभाष गोदारा ने संभाला है! रंगकर्मी रमेश शर्मा ने बताया कि फिल्म की ओमलो की कहानी एक सात साल के बच्चे ओर ऊँट के बीच अनूठे व मार्मिक रिश्ते पर केंद्रित है!

फिल्म पारिवारिक हिंसा के दुखद और यथार्थ पहलू को सामने लाती है, फिल्म में एक बच्चा पिता की ओर से दिए गए दर्द और भय के माहौल में जीने को मजबूर है ! ऊंट और बच्चे के बीच इस भावनात्मक रिश्ते से फिल्म एक सामाजिक संदेश भी देती है! फिल्म में स्त्रियों की पीड़ा, टूटी उम्मीदें, और एक मां की खामोश प्रार्थना अभिव्यक्त होती है! फिल्म में मां यह उम्मीद करती है कि उसका बेटा इस हिंसात्मक वातावरण के चक्र को तोड़ सके!

फिल्म में स्त्री पिता के कारण हिंसात्मक माहौल में शोषण के खिलाफ प्रतिकार बेटे के सुरक्षित भविष्य के प्रति उसका संकल्प समाज में शोषित महिला वर्ग को प्रेरित करता है! फिल्म यह संदेश भी देती है कि कभी-कभी इंसान से ज्यादा संवेदनशीलता जानवरों में भी होती है! फिल्म में संगीत अंतराष्ट्रीय लोक कलाकार ग़ाज़ी खान बरना का है ! फिल्म के निर्माता मनीष गोपालानी और रोहित मखीजा है


