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अपने कॉलेज के समय के गुरु देवड़ा से मिलने उनके घर गए, अनुशासित शिष्य की तरह उनके हाल जाने

गुरु को अपने मन से अपनी राजनीतिक यात्रा बताई
भावुक हो गये गुरु से बात करते करते
शिष्य के अपने दायित्त्व को निभाने  का भरोसा दिलाया
 

मधु आचार्य ' आशावादी '

RNE Special.
 

देश हो या व्यक्ति, कानून की परिधि में ही उसे चलना, रहना और जीना होता है। इस कारण ही कहा जाता है कि कानून सख्त होता है। वह अपनी परिधि न तोड़ता है और न उसका अतिक्रमण करता है। किसी दूसरे को भी वो ये सब नहीं करने देता। देश की सरकार भी कानून यानी संविधान के दायरे में रहकर चलती है। उससे बाहर जाने का साहस नहीं करती है।

कानून मंत्री तो फिर कानून से भी सख्त होगा, यह कल्पना सहज में की जा सकती है। देश या प्रदेश के अनेक सख्त कानून मंत्रियों का इतिहास राजनीति में रुचि रखने वाले जानते है। मगर इन सब धारणाओं को ध्वस्त करने का  काम किया है देश के वर्तमान कानून मंत्री व छोटी काशी बीकानेर के चौथी बार के सांसद अर्जुनराम मेघवाल ने। कानून के भीतर भी दिल होता है और वह धड़कता है, इस तथ्य को स्थापित करने का काम अर्जुन जी ने किया है।
 

चार चुनाव इस बात के गवाह है:
 

बीकानेर संसदीय क्षेत्र से महाराजा डॉ करणीसिंह जी ने सर्वाधिक चुनाव लड़े थे और जीते थे। उसके बाद ये रिकॉर्ड अर्जुनराम जी मेघवाल के नाम है। उन्होंने चार चुनाव लड़े और चारों जीते। 
 

इतने बड़े संसदीय क्षेत्र में ये उपलब्धि मुश्किल है, मगर इन्होंने सहजता से अर्जित की। इसकी भी खास वजह है। वे इस संसदीय क्षेत्र के पहले प्रतिनिधि है जिनके द्वार यहां की जनता के लिए सदा खुले रहते है। उनको सड़क पर रोककर भी यहां का बाशिंदा अपना दर्द बता सकता है। दिल्ली में इनके घर पहुंचकर कोई भी सीधे इनसे मिल सकता है। ये और इनकी धर्मपत्नी पाना देवी सबसे पहले यहां से आने वाले के लिए रहने, भोजन की व्यवस्था करते है। फिर काम पूछते है और तुरंत उसकी राहत के लिए संबंधित जगह फोन करते है। बीकानेर वासी इनके व इनकी धर्मपत्नी के व्यवहार के कायल है।

सहज, सरल व मृदु भाषा कानून मंत्री का बड़ा हथियार है। विपक्षी चाहे कितने ही तीखे बोल बोल ले। अनर्गल आरोप लगा ले। ये शालीनता से उसका जवाब देते है, अपनी भाषा का स्तर नीचे नहीं ले जाते। चार चुनाव इस बात के गवाह है।
 

गुरु देवड़ा के घर पहुंचे मिलने:
 

बीकानेर के सांसद व केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का यही संवेदनशीलता का चेहरा व व्यवहार 26 अगस्त को जयपुर में देखने को मिला। 
 

मेघवाल की शिक्षा संघर्ष के बीच बीकानेर में ही हुई थी। उनकी कॉलेज राजकीय डूंगर महाविद्यालय, बीकानेर थी। उनका विषय इतिहास था। वे एक गंभीर राजनीतिक दौरे पर दिल्ली से जयपुर आये थे। बैठकों की मुख्यमंत्री के साथ व्यस्तता थी। रात को उनको 3 दिन की यात्रा पर सिंगापुर भी निकलना था।

उनको अपने डूंगर कॉलेज के अध्ययन के दौरान के शिक्षक रहे प्रमुख इतिहासकार व शिक्षाविद प्रोफेसर जी एस एल देवड़ा जी के जयपुर में होने की सूचना मिली।
 

कानून मंत्री मेघवाल तुरंत देवड़ा साहब के घर पहुंच गये। उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। उनकी पूरी बात सुनी और शुभकामनाएं प्राप्त की। अपने शिक्षक को ये अधिकार भी याद दिलाया कि जब चाहे वे आदेश दें, हाजिर रहूंगा। 
 

भावुक हो गए कानून मंत्री:
 

अपने शिक्षक देवड़ा साहब से बातचीत के दौरान व वापस जाते समय भावुक हो गए देश के कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल। ये उनका मानवीय संवेदनाओं से लबरेज रूप था। जिसे देखकर उनके शिक्षक देवड़ा साहब भी विस्मित मगर प्रसन्न थे।