स्व लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में साहित्य, शिक्षा व रंगकर्म में सम्मान, समृद्ध परंपरा
RNE Special.
( स्व लक्ष्मीनारायण रंगा हिंदी व राजस्थानी में ख्याति प्राप्त रचनाकार थे। मौलिक शैक्षिक चिंतन के कारण उन्होंने प्रदेश में अलग पहचान बनाई। नाटक उनका स्थायी कलाकर्म था। उनके परिजन उनकी स्मृति में हर साल सम्मान समारोह कर राज्य स्तरीय प्रज्ञा सम्मान देते है, यह एक स्वस्थ स्तुत्य परंपरा है। इस आयोजन के ध्येय व विगत को रुद्रा न्यूज एक्सप्रेस ( RNE ) के लिए लिखा है उनके पुत्र व वरिष्ठ रचनाकार, आलोचक कमल रंगा ने। स्व रंगा को RNE परिवार की तरफ से श्रद्धा सुमन-- संपादक )
कमल रंगा:

देश के ख्यातनाम साहित्यकार, रंगकर्मी, चिंतक, अनुवादक एवं शिक्षाविद् कीर्तिशेष लक्ष्मीनारायण रंगा की पावन स्मृति में वर्ष 2024 से निरंतर ‘सृजन सौरम-हमारे बाऊजी’ कार्यक्रम के तहत विभिन्न तरह की साहित्यिक-सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की एक सतत् श्रृंखला के रूप में आयोजन होते रहे हैं।

इसी क्रम में लक्ष्मीनारायण रंगा की स्मृति में राज्य स्तरीय प्रज्ञा सम्मान प्रति वर्ष 3 कलानुशासनों की विभूतियों अर्पित किया जाता है। जिसमें साहित्य, शिक्षा एवं शोध तथा रंगकर्म है। यहां यह उल्लेखनीय है कि कीर्तिशेष रंगा अपनी लंबी सृजन यात्रा में निरन्तर इन तीनों कलानुशासनों में अपनी उल्लेखनीय सेवाएं देते हुए एक कर्मयोगी के रूप में अपनी गतिशीलता बनाए रखते हुए रचनात्मक एवं सृजनात्मक उपक्रम करते रहे।
रंगा के साहित्य की विभिन्न विधाओं की 175 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। साथ ही उन्होने साहित्य से इतर अन्य विषयों के साथ टेलीफिल्म आदि लेखन में भी अपनी कलम को सवाई किया था। आप एक कुशल अनुवादक, सफल प्रबंधक एवं समर्पित संपादक के रूप में भी जीवन पर्यन्त अपनी सेवाएं देते रहे है।
कीर्तिशेष रंगा की स्मृति में गत दो राज्य स्तरीय समारोह में क्रमशः डॉ. भरत ओळा, डॉ. मदन सैनी, डॉ उमाकांत गुप्त, प्रदीप भटनागर, श्याम जांगिड़, रामसहाय हर्ष को प्रज्ञा सम्मान अर्पित हो चुका है। इसी कड़ी में वर्ष 2026 का तीसरा राज्य स्तरीय प्रज्ञा सम्मान-2026 निम्न प्रतिभाओं को प्रदत्त किया जा रहा है। जिन्होने अपने-अपने क्षेत्र में तथा अपनी-अपनी विधाओं में उल्लेखनीय सेवाएं देते हुए एक अनुष्ठानकर्मी के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। उन्हें श्रीमती कमला देवी-लक्ष्मीनारायण रंगा ट्रस्ट एवं प्रज्ञालय संस्थान द्वारा प्रज्ञा सम्मान-2026 अर्पित किया जाएगा। विभूतियां हैं- डॉ. सत्यनारायण सोनी, साहित्य के क्षेत्र में, डॉ. विमला डुकवाल शिक्षा एवं शोध के क्षेत्र में एवं श्री विजयसिंह राठौड़ रंगकर्म के क्षेत्र में।
डॉ. सत्यनारायण सोनी का संक्षिप्त परिचय-

राजस्थानी कथा-साहित री सौरम सैमूदै भारतीय भासावां रै खेतर तक पूगावण वाळा कथाकारां- कवेसरा अर अनुवादकां मांय डॉ. सत्यनारायण सोनी रौ नांव आगीवाणां मांय लिखीजै। आपरौ कथा संग्रै ‘घमसाण’ अर ‘धान कथावां’ सागे हिन्दी कविता संग्रै ‘कवि होने की जिद मे’् आद रै सागै-सागै बाल साहित री आपरी चरचित पोथ्यां है। राजस्थानी-हिन्दी साहित नैं नूंवा-नकोर रूप सिरजतां डॉ. सोनी री कलम बिसाई कोनी लीन्ही है। इणी भात आप आलोचना रै खेतर मांय भी सवायौ काम कीन्हौ है। आप राजस्थानी री प्रतिष्ठित पत्रिका ‘कथेसर’ रौ संपादन भी आछै ढ़ब सूं कर रैया हो। आप राजस्थानी भेळै हिन्दी मांय ई समान इधकार सूं लिखता रैया हो।
पुरस्कार-सनमान रा साचा हकदार:
डॉ. सत्यनारायण सोनी राजस्थानी अकादमी बीकानेर, राना कैलिफोर्निया, ज्ञान भारती-कोटा, मारवाड़ी सम्मेलन-मुंबई, सृजन संस्था-श्रीगंगानगर सागै प्रदेस अर देस री प्रतिष्ठित मोकळी संस्थावां सूं पुरस्कृत अर सम्मानित है।
नूंवी दीठ नवादौ सिरजण:
कथाकार डॉ. सत्यनारायण सोनी राजस्थानी अर हिन्दी मांय अजेस अछूती रैई कहाणी अर कविता री जमीन पर आपरा पग-मंडणा करनै ओळख कमाई है। ‘घमसाण’ अर ‘धान कथावां’ मानवीय संवेदना रौ खरौ अर इतरौ भरोसैजोग चित्रण पाठकां नैं सूंपै कै पाठक अचूंभै झिल जावै। डॉ. सत्यनारायण सोनी नैं कला, साहित, शिक्षा अर रंगकरम रा पुरोधा, ओळूं-उबार लक्ष्मीनारायण जी रंगा री पवीत याद में तीजो राज्य स्तरीय लक्ष्मीनारायण रंगा प्रज्ञा-सनमान अरपित करतां थकां सैमूदौ बीकानेर नगर हरखीजै।
डॉ. विमला डुकवाल का परिचय-

शिक्षा एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण के माध्यम से आपने श्रेष्ठ गुरु के रूप में गौरवपूर्ण और रेखांकित करने योग्य सेवा से अमिट छाप छोड़कर अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है। आपके निर्देशन में 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। आपके 47 शोध पत्र एवं 52 सेमिनारों की प्रस्तुतियां एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। आपकी 65 पुस्तकें एवं जनरल लेख प्रकाशित एवं चर्चित रहे हैं। हम आपकी अमोलक साहित्य एवं शिक्षण साधना का अभिनन्दन करते हैं।
आपश्री मौन को शब्द देकर, शब्द में जीवन संजोकर समाज की अनुभूति को साकार करने में दक्ष है। शिक्षा, शोध एवं समाज सेवा क्षेत्र की दैदीप्यमान नक्षत्र है-डॉ. विमला डुकवाल। आपने सदा सीखते रहने की दीक्षा लेकर जो निरन्तर विद्या ग्रहण की, उससे हमेशा सकारात्मक सोच के साथ शिक्षा-शोध, साहित्य जगत को लाभान्वित किया तथा गरिमा प्रदान की।
शिक्षा-साहित्याकाश की नक्षत्र, शोध की पारखी एवं अद्भुत प्रतिभा की धनी आपश्री का हम भावाभिषेक करते हैं। आपको यूनिसेफ जयपुर, पोषण सोसायटी ऑफ इंडिया, इंडियन डायटेक्सि एसोसिएशन, राजस्थान एक्सटेंशन एज्यूकेशन सोसायटी, नेशनल इंस्टीट््यूट ऑफ न्यूट्रिशन, न्यूट्री स्कॉलर पुरस्कार, ड्यूपॉन्ट साउथ एशिया के द्वारा वेजिटेरियन केक ट्रीट के लिए लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार जैसे प्रदेश और देश के अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार एवं सम्मान अर्पित होते रहे हैं।
आपकी 30 वर्षों की कृषि, खाद्य एवं पोषण आदि क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियों, श्रेष्ठ शिक्षण-शोध एवं निष्ठावान सेवाओं का मान रखते हुए आपको वर्तमान में कृषि विश्वविद्यालय कोटा का कुलगुरु बनाना नगर-प्रदेश के लिए गर्व की बात है।

श्री विजय सिंह राठौड़ का परिचय ऊर्जा और सकारात्मकता से भरा व्यक्तित्व प्रति पल चेहरे पर मुस्कान रखने वाले श्री विजय सिंह सदैव सकारात्मकता और उत्साह से लबरेज रहते हैं। यही कारण है कि एक बार उनसे मिलने वाला व्यक्ति हमेशा के लिए उनका मुरीद हो जाता है। युवा एवं वरिष्ठ सभी रंगकर्मियों से सदा सम्पर्क में रहने वाले विजय सिंह जी साहित्य, संगीत एवं फिल्म सहित सभी कलाधर्मियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। आपने हिन्दी रंगकर्म के अलावा राजस्थानी लोकनाट्य, ग्रामीण रंगमंच के नाटकों में उत्कृष्ट अभिनय एवं निर्देशन कर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। आपने फिल्मों, टीवी धारावाहिकों, रेडियो नाटकों, राजस्थानी फिल्मों और वृत्तचित्रों में समय-समय पर विभिन्न भूमिकाओं का निर्वहन करते हुए करीब 45 नाटकों और 12 फिल्मों में अभिनय भी किया है।
सम्मान के सच्चे हकदार :
आपकी रंगकर्म एवं अन्य कलानुशासनों के प्रति समर्पित सेवाओं का जिला एवं प्रदेश स्तर पर साथ ही राव बीकाजी सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा सम्मान किया गया है।

