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जनरंजन : अनिल कल्ला की असली परीक्षा अब होगी शुरू!!! पार्षदों की ठेकेदारी पर लगाम, सफाई, खंभों पर लाइट सहित ये मुद्दे रहेंगे हावी!!

 

 

नए बीकानेर महापौर अनिल कल्ला अब तक नगर परिषद व नगर निगम में आये मुखियाओं में सबसे युवा है। बीकानेर की जनता को इसी कारण उनसे बहुत अपेक्षा भी है। मगर अनिल की निगम में राह इतनी आसान नहीं है, विरासत में मिली स्थितियों को सुधारे बिना वे कुछ नया कर ही नहीं पाएंगे। उनको बिगड़ी व्यवस्था दुरस्त करते हुए कुछ नया करना होगा।

 

मधु आचार्य 'आशावादी'

बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस का बोर्ड बन गया।  निगम और पहले की नगर परिषद को देखें तो पहली बार किसी युवा के कंधे पर बड़ी जिम्मेदारी आई है। शहर की जनता ने काफी उम्मीदों को पालने के बाद इस युवा पर भरोसा किया है। कांग्रेस से पहले दो टर्म लगातार भाजपा का बोर्ड रहा और एक ढर्रे से निगम चलता रहा, तभी तो इस बार जनता ने उस व्यवस्था को बदला और कांग्रेस के हाथ में शहर की सरकार की कमान सौंपी।

 

 

कांग्रेस और अनिल कल्ला को मिली यह कमान इस मायने में ज्यादा महत्त्वपूर्ण है कि लोगों ने ट्रिपल इंजन की सरकार के नारे को नकारते हुए कांग्रेस को जिम्मेवारी दी। राज्य में भाजपा की सरकार है और बीकानेर के अलावा सभी निगमों में सरकार भाजपा को सौंपी, मगर बीकानेर में कांग्रेस को। अर्थ यह हुआ कि राज्य सरकार के विपरीत जाकर जनता ने कांग्रेस का पक्ष लिया।
 

इस वजह से कांग्रेस व युवा अनिल कल्ला के लिए निगम की सरकार चलाना किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं है। निगम की प्रशासनिक व्यवस्था से जनता परेशान है और उसके रोजमर्रा के काम भी कई दिनों तक नहीं होते हैं। सफाई तंत्र निरीक्षण के अभाव में पूरी तरह बिखरा हुआ है। लोग निगम में भ्रष्टाचार होने के आरोप भी गाहे - बगाहे लगाते रहते हैं। इस तरह देखा जाए तो खड्डों के बीच अनिल कल्ला को सुगम राह बनानी होगी।

सफाई का तंत्र विकसित करना जरूरी

शहर की गंदगी से हर कोई परेशान है। जब बड़े व्यापारियों का बीकानेर में आयोजन हुआ तो उनका कहना था कि बाहर से बड़ी उद्यमी को यहां बुलाने में शर्म आती है, क्योंकि शहर बहुत गंदा है। यह बात सत्य भी है। यहां पहले के निगम नेतृत्त्व ने केवल सफाई के लिए नए नए प्रयोग किये, कोई मजबूत तंत्र नहीं स्थापित किया। कुछेक सफाई के प्रयोगों में तो आपाधापी के आरोप भी बहुत लगे।
जब चंडीगढ़, इंदौर के नगर निगम अपने शहर को साफ रख सकते हैं तो बीकानेर का नगर निगम क्यों नहीं। यह अपने आप में बड़ा सवाल है। महापौर अनिल कल्ला को इस पर ठोस और सख्त निर्णय लेना होगा। सफाई से हर नागरिक जुड़ा है और उसकी अपेक्षाएं भी बड़ी ही है।


 

शहर की बाहरी कॉलोनियों को निगम में कभी का शामिल कर दिया, मगर अब भी वहां स्थायी रूप से सफाई कर्मचारी नहीं है। शहर में भी कर्मचारियों की कमी है। कुछ कर्मचारी सफाई के स्थान पर अन्य काम करने को अधिकारियों के दबाव में मजबूर है। सफाई कर्मचारियों की संख्या भी कम है। इनका निदान महापौर के लिए बड़ी चुनोती है। सफाई तंत्र का प्रभावी निरीक्षण जरूरी है, कुछ सख्ती करनी होगी।

सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था सुधारनी जरूरी

शहर की अनेक सड़कें, मोहल्ले व कॉलोनियों में सार्वजनिक प्रकाश व्यवस्था पूरी तरह से बिगड़ी हुई है, उसके कारण आम जनता को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसे दुरुस्त करना एक बड़ा जनहित का काम होगा। जिनके जिम्मे यह काम रहेगा, उनकी लगाम भी मेयर को कसनी पड़ेगी।

निर्माण की गुणवत्ता सुधारनी जरूरी

नगर निगम के निर्माण को आम आदमी बहुत ही संदेह की नजर से देखता है। उसे भरोसा ही नहीं होता। क्योंकि निर्माण की क्वालिटी अच्छी नहीं होती। इसका जीवंत प्रमाण यह है कि बिलो रेट में ही लगभग सभी टेंडर पास होते हैं। यदि ठेकेदार कहता है कि सरकार की तय दर से भी कम में मैं निर्माण को तैयार हूं तो जाहिर है उसमें भ्रष्टाचार ही एक मार्ग होगा। बिलो टेंडर लेने वालों के कामों की मेयर को गहरी पड़ताल करनी होगी और घटिया निर्माण करने वालों को दंडित करने होगा, तभी यह लूटमार का खेल रुकेगा। इस काम मे धन का बड़ा गोलमाल होने के आरोप लगातार ही जनता की तरफ से लगते रहते हैं। निगम की छवि को अच्छा बनाने के लिए अनिल कल्ला को थोड़ा तो कठोर बनना पड़ेगा।

पार्षदों की ठेकेदारी पर लगाम जरूरी

जनता को इस बात की शिकायत है कि अधिकतर पार्षद चुनाव जीतने के बाद ठेकेदारी का काम करते हैं। अपने वार्ड में होने वाले निर्णाण कार्य करने का जैसे उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। जब वे काम करेंगे तो उसकी क्वालिटी का अंदाजा लग सकता है। इस आदत पर लगाम जरूरी है। निर्माण एक प्रशासनिक कार्य है, उससे पार्षदों को दूर रखा जाना चाहिए।

अनिल कल्ला से अपेक्षाओं की वजह भी है

नए मेयर अनिल कल्ला से निगम की अव्यवस्थाओं को सुधारने की अपेक्षा बहुत है। जनता ने उनसे बहुत उम्मीदें बांधी है। जो गलत नहीं है और उसकी वजहें भी है। नए मेयर युवा है। संगठनकर्ता के रूप में उनकी पहचान पहले से बनी हुई है। खुद ठेकेदारी नहीं करते। कुछ अच्छा करने का उनमें जज्बा है, जो उन्होंने राजीव यूथ क्लब के जरिये दिखाया भी है। पिता जनार्दन कल्ला व चाचा पूर्व मंत्री डॉ बी डी कल्ला से बचपन से ही प्रशासनिक अनुभव सीखा है। जनता से जुड़ाव रखा है। 

 

मगर निगम में जड़ बुराईयां है, यह भी शास्वत सत्य है। इनको समाप्त करना नए मेयर का पहला काम होगा तभी वह अपने साफ सुथरे शहर व स्मार्ट सिटी की परिकल्पना को साकार कर सकेंगे।

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