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कमल रंगा का सुझाव, शिक्षण सामग्री राजस्थानी में ही हो, रंगा का सुझाव कि शिक्षण सामग्री बोलियों में न तैयार हो

 

RNE Bikaner.

राजस्थानी के वरिष्ठ रचनाकार व साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के अवार्डी कमल रंगा ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्षरत लेखकों, समर्थकों के लिए 12 मई 2026 एक ऐतिहासिक दिन रहा, क्योंकि इस दिन माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला करते हुए मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा की व्यवस्था के आधार पर प्रदेश के राजकीय एवं निजी विद्यालयों में राजस्थानी भाषा को विषय के रूप में लागू करने के निर्देश दिए है। इस मांग के लिए राजस्थानी युवा लेखक संघ व प्रज्ञालय संस्था ने 1980 से संघर्ष किया है, अब जाकर माननीय न्यायालय से इसे सफलता मिली है।
 

रंगा ने कहा कि माननीय न्यायालय ने सितम्बर तक इसकी अनुपालना रिपोर्ट भी मांगी है। राज्य सरकार को न्यायालय के निर्देश के अनुसार ठोस कार्यवाई तुरंत करनी चाहिए। रंगा का सुझाव था कि जो भी शिक्षण सामग्री तैयार की जाये वह राजस्थानी भाषा मे ही हो, न की बोलियों में। रंगा ने शिक्षण सामग्री तैयार करने के लिए शिक्षकों, शिक्षाविदों के साथ साहित्यकारों का सहयोग लेने की आवश्यकता भी जताई।

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