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Kotegate Railway Crossing : आरयूबी निर्माण के लिए मकान-दुकान हटाने की कार्रवाई शुरू, सांखला फाटक पर भी तेज हुआ काम

 
RNE Bikaner
बीकानेर शहर की दशकों पुरानी सबसे बड़ी यातायात समस्या माने जाने वाले कोटगेट और सांखला रेलवे फाटक को फाटक-मुक्त बनाने की कवायद अब धरातल पर दिखाई देने लगी है। प्रशासन ने कोटगेट आरयूबी (Rail Under Bridge) निर्माण के रास्ते में आ रहे मकानों और दुकानों को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार को कई स्थानों पर जेसीबी की मदद से निर्माण में बाधा बन रही परिसंपत्तियों को हटाया गया, जिससे वर्षों से अटकी परियोजना के आगे बढ़ने के संकेत मिले हैं।
संभागीय आयुक्त कार्यालय में हाल ही में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद प्रशासन, बीडीए, पीडब्ल्यूडी और रेलवे अधिकारियों ने दोनों परियोजनाओं को प्राथमिकता देते हुए काम में तेजी ला दी है। लक्ष्य जुलाई से मुख्य निर्माण कार्य शुरू कर दिसंबर तक दोनों आरयूबी को पूरा करना है।
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कोटगेट पर 8 ब्लॉक तैयार, रेलवे की हरी झंडी का इंतजार :
कोटगेट आरयूबी को लेकर लंबे समय से विवाद और विरोध के बीच अब तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। परियोजना के लिए आवश्यक 10 ब्लॉकों में से 8 ब्लॉक तैयार हो चुके हैं। विभाग को अब रेलवे से एक दिन के लिए छह घंटे का ट्रैफिक ब्लॉक मिलने का इंतजार है। अनुमति मिलते ही रेलवे ट्रैक के नीचे ब्लॉक डालने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
यह आरयूबी फड़ बाजार मोड़ से शुरू होकर रेलवे लाइन के नीचे से गुजरते हुए कोटगेट के पास निकलेगा। इसकी कुल लंबाई करीब 145 मीटर होगी।

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सांखला फाटक पर तेजी से चल रहा निर्माण :
दूसरी ओर सांखला फाटक पर 52 आरसीसी ब्लॉकों वाले डबल लेन अंडरपास का कार्य तेजी से चल रहा है। यह अंडरपास तौलियासर भैरूंजी गली के आगे रेलवे लाइन की ओर से शुरू होकर आसोपा भवन के पास समाप्त होगा। यहां से एक मार्ग रेलवे स्टेशन और दूसरा काली माई मंदिर की ओर निकलेगा। करीब 204 मीटर लंबे इस अंडरपास के लिए 23 निजी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चल रही है।
57 करोड़ की परियोजना, 16 करोड़ मुआवजे पर खर्च
राज्य सरकार ने कोटगेट और सांखला फाटक आरयूबी परियोजनाओं के लिए 57 करोड़ रुपये का संशोधित बजट मंजूर किया है। इसमें से लगभग 16 करोड़ रुपये प्रभावित लोगों को मुआवजे के रूप में दिए जा रहे हैं। केवल कोटगेट आरयूबी के लिए 12 निजी संपत्तियां प्रभावित हुई हैं और अधिकांश को मुआवजा दिया जा चुका है। परियोजना की बड़ी राशि बिजली, पानी और अन्य उपयोगिता सेवाओं को शिफ्ट करने पर खर्च होगी।
पानी और ट्रैफिक की चिंताओं पर प्रशासन का जवाब
कोटगेट आरयूबी को लेकर सबसे बड़ा विरोध इसके चार मीटर चौड़े डिजाइन को लेकर है। विरोधियों का कहना है कि इससे ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहेगी। हालांकि इंजीनियरों का तर्क है कि कोटगेट क्षेत्र में पहले से ही चार पहिया वाहनों के लिए वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था है और आगे भी यातायात पुलिस की सलाह के अनुसार संचालन किया जाएगा।
जलभराव की आशंकाओं को लेकर अधिकारियों का कहना है कि आरयूबी में हाई-पावर मोटर पंप लगाए जाएंगे, जो भारी बारिश की स्थिति में भी 5 से 6 घंटे के भीतर पानी निकाल सकेंगे। साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी विकसित किया जाएगा।
कोर्ट में मामला, 13 जुलाई को अगली सुनवाई
कोटगेट आरयूबी को लेकर कुछ पक्षों ने न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया है। हालिया सुनवाई में अदालत ने इसे जनहित की परियोजना बताते हुए संबंधित पक्षों को सहमति से समाधान निकालने की सलाह दी है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित है।
पूरी सड़क का होगाएक्स-रे’ : 
निर्माण के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी बाधा से बचने के लिए पीडब्ल्यूडी ने पूरी सड़क का ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (GPR) सर्वे कराने का निर्णय लिया है। इससे जमीन के नीचे मौजूद सीवरेज लाइन, बिजली केबल और अन्य सेवाओं की सटीक स्थिति का पता लगाया जाएगा।
फैक्ट फाइल
🔹 कुल परियोजना लागत: 57 करोड़ रुपये
🔹 कोटगेट आरयूबी लंबाई: 145 मीटर
🔹 सांखला फाटक आरयूबी लंबाई: 204 मीटर
🔹 सांखला फाटक पर आरसीसी ब्लॉक: 52
🔹 कोटगेट में प्रभावित संपत्तियां: 12
🔹 सांखला फाटक में प्रभावित परिसंपत्तियां: 23
🔹 कोटगेट के 10 में से 8 ब्लॉक तैयार
🔹 लक्ष्य: जुलाई से निर्माण, दिसंबर तक पूरा कार्य

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